नौकरी पाने के लिए फर्जी अनुभव और बैंक रिकॉर्ड का सहारा लेना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया. ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने ऑटोमोबाइल कंपनी में ऊंचे पद पर नौकरी हासिल करने के लिए खुद को एक ग्रुप का पूर्व कर्मचारी बताया था. उसने वहां से हर महीने 2 लाख 80 हजार 670 रुपए वेतन मिलने का दावा करते हुए बैंक स्टेटमेंट भी कंपनी को दिए थे.
नौकरी छोड़ने के बाद दोबारा जांच में खुला राज
पुलिस के मुताबिक, आरोपी देवेंद्र कुमार दुबे ने 20 अगस्त 2025 को एक ऑटोमोबाइल कंपनी में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर नियुक्ति के दौरान अपने अनुभव और वेतन से जुड़े दस्तावेज जमा किए थे. कुछ समय नौकरी करने के बाद उसने मई 2026 में इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के बाद कंपनी ने उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट शुरू किया. इसी दौरान कंपनी ने उसके पुराने रोजगार और वेतन से जुड़ी जानकारी का दोबारा सत्यापन कराया. जांच में पता चला कि जिस कंपनी में आरोपी ने पहले काम करने का दावा किया था, वहां उसके रोजगार का कोई रिकॉर्ड ही नहीं था.
बैंक स्टेटमेंट भी जांच में संदिग्ध मिले
पुरानी नौकरी से जुड़े दस्तावेजों के साथ आरोपी ने अपने वेतन के सबूत के तौर पर बैंक स्टेटमेंट भी जमा किए थे. कंपनी की ओर से कराए गए सत्यापन में बैंक से जुड़े रिकॉर्ड भी संदिग्ध पाए गए. इसके बाद कंपनी ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी. शिकायत मिलने के बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की. दस्तावेजों की जांच और अन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 33/26 दर्ज किया. उस पर बीएनएस की संबंधित धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला दर्ज किया गया.
केस दर्ज होते ही फरार हो गया था आरोपी
मामला दर्ज होने के बाद देवेंद्र पुलिस की गिरफ्त से बाहर था. वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी तलाश और गिरफ्तारी के लिए टीम को सक्रिय किया. जांच के दौरान पुलिस को तकनीकी माध्यम से जानकारी मिली कि आरोपी कानपुर में छिपा हुआ है. इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम कानपुर पहुंची और स्थानीय स्तर पर उसकी तलाश शुरू की. आखिरकार आरोपी को पनकी थाना क्षेत्र स्थित वैष्णवी कुंज से गिरफ्तार कर लिया गया.
कोर्ट ने आरोपी को जेल भेजा
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के सामने पेश किया. कोर्ट के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने फर्जी अनुभव और बैंक से जुड़े दस्तावेज कैसे तैयार किए और नौकरी हासिल करने के लिए उनका इस्तेमाल किस तरह किया. मामले में दस्तावेजों से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है.
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