वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट बाजार ने 2026 की पहली छमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. नाइट फ्रैंक (Knight Frank) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच देश के हाउसिंग मार्केट में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. हालांकि, इस दौरान कुछ ऐसे संकेत भी सामने आए हैं जो आने वाले समय में डेवलपर्स और बाजार दोनों के लिए चुनौती बन सकते हैं. खास बात यह रही कि नए घरों की सप्लाई बिक्री से भी तेज रही, जबकि बिना बिके घरों का स्टॉक भी बढ़ गया.
8 बड़े शहरों में 1.71 लाख से ज्यादा घरों की बिक्री
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में देश के आठ प्रमुख शहरों में कुल 1,71,471 घरों की बिक्री दर्ज की गई. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1 फीसदी अधिक है. दूसरी ओर, इसी दौरान 1,87,350 नए घर लॉन्च किए गए, जो कुल बिक्री से करीब 16 हजार यूनिट ज्यादा हैं. इससे साफ है कि बाजार में खरीदार मौजूद हैं, लेकिन डेवलपर्स की ओर से नए प्रोजेक्ट्स की रफ्तार मांग से भी तेज बनी हुई है.
बढ़ने लगा बिना बिके घरों का स्टॉक
बिक्री और सप्लाई के बीच बढ़ते अंतर का असर अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है. नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में अनसोल्ड इन्वेंट्री (बिना बिके घरों) की संख्या बढ़कर 5,25,695 यूनिट्स तक पहुंच गई है. यह पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी अधिक है. इसके साथ ही मौजूदा स्टॉक खत्म होने का औसत समय यानी Quarter to Consume बढ़कर 6 क्वार्टर (18 महीने) हो गया है. इससे संकेत मिलता है कि बाजार में उपलब्ध घरों को बिकने में पहले की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है.
लग्जरी घरों की बढ़ी मांग, किफायती घरों का हिस्सा घटा
रिपोर्ट में खरीदारों की पसंद में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहले जहां अफोर्डेबल हाउसिंग की मांग ज्यादा रहती थी, वहीं अब प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट का दबदबा लगातार बढ़ रहा है. 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में बढ़कर 54 फीसदी हो गई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 49 फीसदी था. वहीं 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी लगातार घटती जा रही है. इससे साफ है कि बाजार का फोकस धीरे-धीरे प्रीमियम प्रॉपर्टी की ओर शिफ्ट हो रहा है.
मुंबई सबसे आगे, NCR में दिखी सुस्ती
शहरवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 47,355 यूनिट्स की बिक्री के साथ मुंबई देश का सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय हाउसिंग मार्केट बना हुआ है. बेंगलुरु में बिक्री में 5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पुणे में 2 फीसदी की मामूली वृद्धि रही. इसके उलट दिल्ली-एनसीआर में बाजार थोड़ा धीमा रहा, जहां बिक्री में 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
ऑफिस मार्केट को GCC से मिला बड़ा सहारा
कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर ने भी मजबूत प्रदर्शन किया. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में 4.46 मिलियन वर्ग मीटर ऑफिस स्पेस की लीजिंग हुई, जो पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से सिर्फ 2 फीसदी कम है. इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा योगदान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का रहा. बड़ी विदेशी कंपनियां भारत में अपने टेक्नोलॉजी, रिसर्च और बिजनेस ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही हैं. कुल ऑफिस लीजिंग में GCC की हिस्सेदारी 43 फीसदी रही, जबकि फ्लेक्स ऑफिस स्पेस का हिस्सा बढ़कर 24 फीसदी हो गया. इसके चलते ऑफिस मार्केट में वैकेंसी घटकर 14.6 फीसदी रह गई है.
बाजार के लिए आगे क्या संकेत?
रिपोर्ट से साफ है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अभी भी मजबूत स्थिति में है. घरों की बिक्री ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और ऑफिस मार्केट भी रिकॉर्ड स्तर के करीब प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि, तेजी से बढ़ती नई सप्लाई और 5.25 लाख से ज्यादा अनसोल्ड इन्वेंट्री इस बात का संकेत दे रही है कि आने वाले महीनों में डेवलपर्स के लिए डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी. अगर यह संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर बाजार की गति पर भी पड़ सकता है.
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