नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयर की बाजार में लिस्टिंग के बाद अब ब्रोकरेज हाउसों ने इस पर कवरेज शुरू कर दी है. PL Capital ने NSE को Accumulate रेटिंग दी है और शेयर का टारगेट प्राइस ₹1,950 रखा है. इसका मतलब है कि ब्रोकरेज के मुताबिक मौजूदा स्तर से शेयर में आगे बढ़ने की गुंजाइश है, हालांकि यह किसी निवेशक के लिए खरीदने की सलाह नहीं है. PL Capital ने यह टारगेट FY29 की अनुमानित कमाई के 35 गुना वैल्यूएशन के आधार पर तय किया है.
NSE की बाजार में कितनी मजबूत पकड़?
PL Capital के मुताबिक NSE भारतीय एक्सचेंज कारोबार में अभी भी सबसे मजबूत स्थिति में है. YTDFY27 में कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93% से ज्यादा रही. वहीं स्टॉक और इंडेक्स फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी करीब 100% रही. इस मजबूत पकड़ की बड़ी वजह NSE की बेहतर लिक्विडिटी, टेक्नोलॉजी और कई तरह के प्रोडक्ट हैं. आसान भाषा में समझें तो NSE पर बड़ी संख्या में खरीदार और विक्रेता मौजूद रहते हैं, जिससे ट्रेडिंग आसानी से हो पाती है. इसी वजह से निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच NSE की पकड़ मजबूत बनी हुई है.
NSE के लिए सबसे बड़ी परेशानी इंडेक्स ऑप्शन सेगमेंट में हिस्सेदारी का कम होना है. PL Capital के अनुसार YTDFY27 में NSE की इंडेक्स ऑप्शन मार्केट हिस्सेदारी करीब 65% रह गई है. FY24 में यह हिस्सेदारी करीब 97% और FY26 में करीब 72% थी. यानी पिछले कुछ वर्षों में NSE ने इस सेगमेंट में अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवाई है. ब्रोकरेज के मुताबिक इसकी वजह रेगुलेटरी बदलाव हैं. इनमें साप्ताहिक एक्सपायरी पर लगाए गए प्रतिबंध, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और प्रॉपराइटरी ट्रेडिंग से जुड़े नियम शामिल हैं. इन बदलावों का असर सिर्फ NSE पर नहीं, बल्कि पूरे इंडस्ट्री के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ा है.
शेयर की लिस्टिंग 1800 पर हुई
NSE के शेयर गुरुवार को 1800 के भाव पर लिस्ट हुए. इसका IPO प्राइस 1,785 था. लिस्टिंग के कुछ ही मिनटों में शेयर 1,878 तक पहुंच गया. यानी IPO प्राइस के मुकाबले शुरुआती कारोबार में करीब 5% की तेजी देखने को मिली. इस तेजी के साथ NSE का मार्केट कैप करीब 4.65 लाख करोड़ पहुंच गया. इसके साथ NSE भारत की सबसे ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियों में 10वें स्थान पर आ गया और इस स्तर पर इसने हिंदुस्तान यूनिलीवर यानी HUL को पीछे छोड़ दिया.
FY29 तक कमाई की रफ्तार धीमी रहने का अनुमान
PL Capital के अनुसार FY21 से FY26 के बीच NSE का रेवेन्यू करीब 25% CAGR यानी सालाना औसत दर से बढ़ा. लेकिन FY26 से FY29 के बीच ब्रोकरेज को रेवेन्यू ग्रोथ करीब 11% CAGR रहने का अनुमान है. इसकी एक बड़ी वजह इंडेक्स ऑप्शन में NSE की घटती हिस्सेदारी है. FY26 में NSE के ऑपरेटिंग रेवेन्यू का करीब 79% हिस्सा ट्रांजैक्शन इनकम से आया था. वहीं लिस्टिंग सर्विस, को-लोकेशन, डेटा फीड और इंडेक्स लाइसेंसिंग जैसे कारोबार को FY26-29 के दौरान करीब 14% CAGR से बढ़ने का अनुमान है. ट्रांजैक्शन इनकम की ग्रोथ इस दौरान करीब 9% रहने की उम्मीद है.
NSE का वैल्यूएशन कितना है?
PL Capital के मुताबिक NSE का IPO करीब 4.4 लाख करोड़ के वैल्यूएशन पर हुआ, जो FY29 की अनुमानित कमाई का करीब 32 गुना है. ब्रोकरेज का कहना है कि इस वैल्यूएशन में NSE को मिलने वाला प्रीमियम काफी हद तक शामिल हो चुका है.
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