सरकार ने पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल की मंजूरी दे दी है. इसका मतलब है कि अब आपके हाथ में प्लास्टिक नोट देखने को मिल सकते हैं. अब 10 और 20 रुपए के एक-एक अरब प्लास्टिक नोट जारी कए जाएंगे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में इसकी लिखित जानकारी दी.
10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोट-
आरबीआई ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जब ट्रायल सफल हो जाएगा तो इन नोटों को नियमित तौर पर जारी कर दिया जाएगा. शुरुआत में 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे.
प्लास्टिक नोट लाने की क्या है वजह?
पाॉलीमर नोट लाने की सबसे बड़ी वजह इसका लंबे समय तक चलना है. ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते हैं और आसानी से फटते भी नहीं है. इसके साथ ही इससे नकली नोटों पर भी लगाम लगेगी. पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना करीब-करीब नामुमकिन हो जाएगा. इसके साथ ही कागज के नोटों की बार-बार छपाई की वजह से खर्च बढ़ जाता है. अगर पॉलीमर नोट होंगे तो छपाई का खर्च कम होगा.
कैसे बनते हैं प्लास्टिक के नोट?
प्लास्टिक नोट पॉलीमर नामक प्लास्टिक फिल्म से बनते हैं. इसपर डिजाइन, सुरक्षा फीचर और सीरियल नंबर प्रिंट किये जाते हैं. प्लास्टिक नोट में एक खास किस्म के प्लास्टिक के दाने यानी BOPP को हाई टेम्परेचर पर पिघलाया जाता है. इससे प्लास्टिक की पतली और पारदर्शी शीट तैयार होती है. शीट को सफेद स्याही से पेंट करते हैं, ताकि बाकी रंग प्रिंट हो सकें. इसके बाद नोट के एक हिस्से को पारदर्शी छोड़ दिया जाता है. पारदर्शी हिस्से में होलोग्राम लगाया जाता है. रोशनी पड़ने पर इसका रंग बदलता है.
प्लास्टिक और कागज के नोट में क्या है अंतर?
पॉलीमर नोट बीओपीपी नाम के प्लास्टिक से बने होते हैं. जबकि कागजी नोट कॉटन और सूती लिंटन के मिक्स से बनते हैं. पॉलीमर नोट काफी मजबूत होते हैं, इसको फाड़ना आसान नहीं होता है. जबकि कागज के नोट आसानी से फट जाते हैं. पॉलीमर नोट कागजी नोटों के मुकाबले काफी ज्यादा चलते हैं. पॉलीमर नोटों में होलोग्राम और सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से शामिल किए जा सकते हैं. जबकि कागजी नोट में वाटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड और माइक्रो-लेटरिंग होती है. पॉलीमर नोटों पर गंदगी नहीं जमती है. इसे साफ करना आसान है. जबकि कागजी नोट जल्दी गंदा होते हैं.
किन देशों में इस्तेमाल होते हैं पॉलीमर नोट?
दुनिया के कई देशों में प्लास्टिक के नोट इस्तेमाल होते हैं. इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यजीलैंड, वियतनाम, रोमानिया, पापुआ न्यू गिनी, ब्रुनेई, वानूआतू, मालदीव, मॉरिटानिया, निकारागुआ और त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देश शामिल हैं. सबसे पहले प्लास्टिक नोटों की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. साल 1988 ऑस्ट्रेलिया में पॉलीमर नोट शुरू हुए थे. साल 2016 में ब्रिटेन ने सभी नोटों को पॉलीमर नोटों से बदल दिया.
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