क्या लोन रिकवरी के लिए बैंक जब्त कर सकता है आपकी प्रॉपर्टी? जानें क्या कहता है RBI का नया प्रस्ताव

RBI ने बैंकों और NBFC के लिए कर्ज वसूली से जुड़े नए नियमों का मसौदा पेश किया है. इसके तहत बैंक डूबे हुए कर्ज की वसूली के लिए सिक्योरिटी के तौर पर रखी संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकेंगे. लेकिन उन्हें इन्हें 7 साल के भीतर बेचना होगा. RBI का कहना है कि सही समय पर बेचने से बैंक की ज्यादा से ज्यादा रिकवरी हो सकेगी.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए कर्ज वसूली प्रक्रिया को लेकर नए नियमों का मसौदा जारी किया है. इन प्रस्तावित नियमों के तहत अब बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान डूब चुके कर्ज की वसूली के लिए गिरवी रखी गई जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकेंगे. हालांकि, संस्थानों को इन संपत्तियों को हमेशा के लिए रखने की अनुमति नहीं होगी. उन्हें तय समय सीमा के भीतर इन संपत्तियों को बेचकर वसूली करनी होगी.

सात साल के भीतर बेचनी होगी प्रॉपर्टी
RBI के ड्राफ्ट के अनुसार, बैंक या NBFC किसी भी कब्जे में ली गई अचल संपत्ति को अधिकतम सात साल तक ही अपने पास रख सकेंगे. इस अवधि के भीतर उन्हें उस संपत्ति को बेचकर अपना बकाया पैसा वसूल करना होगा. केंद्रीय बैंक का मानना है कि समय पर और पारदर्शी तरीके से संपत्ति की बिक्री करने से वित्तीय संस्थानों को ज्यादा से ज्यादा रिकवरी करने में मदद मिलेगी. ये नियम केवल उन मामलों में लागू होंगे, जहां कर्ज को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट यानी NPA घोषित किया जा चुका हो और वसूली के बाकी सभी विकल्प विफल साबित हो चुके हों.

क्या है SNFA और इसका उद्देश्य?
RBI ने अपने मसौदे में 'Specified Non-Financial Assets' यानी SNFA का जिक्र किया है. इसका मतलब उन अचल संपत्तियों से है जिन्हें बैंक या वित्तीय संस्थान अपने बकाया कर्ज की भरपाई के लिए कब्जे में लेते हैं. इसमें जमीन, मकान और अन्य गैर-वित्तीय संपत्तियां शामिल हो सकती हैं. मसौदे में कहा गया है कि बैंक उधार लेने वाले के पूरे या आंशिक बकाया के बदले ऐसी संपत्तियों का हासिल कर सकते हैं. इसका उद्देश्य प्रॉपर्टी कारोबार करना नहीं बल्कि फंसे हुए कर्ज की वसूली करना होगा.

नियमों पर रहेगा फोकस
RBI ने कहा कि इन नियमों को लागू करते समय पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी होगा. वित्तीय संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संपत्तियों की बिक्री सही तरीके से हो और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे. इसी वजह से मसौदे में यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि बैंक या NBFC कब्जे में ली गई प्रॉपर्टी को दोबारा उसी उधारकर्ता या उससे जुड़े किसी व्यक्ति को नहीं बेच पाएंगे. 

26 मई तक मांगे गए सुझाव
RBI ने इन प्रस्तावित नियमों पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 26 मई तक सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं. इसके बाद सुझावों की समीक्षा कर अंतिम नियम लागू किए जा सकते हैं. माना जा रहा है कि नए नियमों से बैंकों की फंसी हुई रकम की रिकवरी प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी.

 

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