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Bank Saving Account: बैंक में जमा हैं 10 लाख, तो देना पड़ सकता है हिसाब-किताब... जानें क्या कहते हैं बैंक के नियम?

अगर आप सोचते हैं कि सेविंग अकाउंट का मतलब है कि जितना चाहे उसमें पैसा जमा कर लो, तो शायद आप कुछ नियमों को चूक रहे हैं. सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करने को लेकर आपको कुछ नियमों के बारे में पता होना चाहिए, खास तौर पर जब आपके अकाउंट में एक वित्त वर्ष में 10 लाख से ज्यादा जमा है.

Bank Deposit
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

अगर आप अपने सेविंग अकाउंट में अक्सर कैश जमा करते हैं, तो आपको इससे जुड़े नियमों की जानकारी होना जरूरी है. बैंक में पैसा जमा करना एक कॉमन बात है, लेकिन अगर एक वित्त वर्ष में कैश जमा करने की रकम काफी ज्यादा हो जाती है, तो बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दे सकता है. ऐसे में आपसे जमा किए गए पैसे के सोर्स के बारे में पूछा जा सकता है.

सेविंग अकाउंट में कैश जमा करने की लिमिट

मौजूदा नियमों के अनुसार, सेविंग अकाउंट में एक वित्त वर्ष के दौरान कुल 10 लाख रुपए या उससे ज्यादा कैश जमा होने पर बैंक को इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को देनी होती है. यह रकम एक बार में जमा करने या अलग-अलग बार में जमा करने, दोनों को मिलाकर देखी जाती है. इसका मतलब यह नहीं है कि 10 लाख रुपए से ज्यादा जमा करते ही टैक्स नोटिस आ जाएगा, लेकिन इतनी रकम जमा होने पर पैसे के सोर्स की जांच हो सकती है.

10 लाख से ज्यादा जमा करने पर क्या होगा?

अगर आपके सेविंग अकाउंट में एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपए से ज्यादा कैश जमा होता है, तो आपको यह बताना पड़ सकता है कि पैसा कहां से आया है. अगर रकम आपकी नौकरी की कमाई, कारोबार, किराए  आय या किसी दूसरे सोर्स से आई है, तो उसके दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है. इनकम टैक्स विभाग जरूरत पड़ने पर इन पैसों का हिसाब मांग सकता है.

50 हजार से ज्यादा कैश जमा करते समय PAN जरूरी

एक दिन में 50000 रुपए से ज्यादा कैश जमा करने पर PAN की जानकारी देनी होती है. अगर PAN मौजूद नहीं है, तो नियमों के अनुसार Form 60 का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका मकसद बड़े कैश लेनदेन का रिकॉर्ड रखना और पैसों के सोरस को आसानी से समझना है.

अगर आपके पास बड़ी मात्रा में कैश है, तो उसके सोर्स से जुड़े कागजात जरूर संभालकर रखें. जैसे नौकरी की सैलरी के रिकॉर्ड, कारोबार की बिक्री का हिसाब, किराए से जुड़ा रिकॉर्ड या दूसरे जरूरी दस्तावेज. इससे बैंक या टैक्स विभाग की ओर से सवाल आने पर आप आसानी से जवाब दे पाएंगे.

 

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