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दुनिया में मशहूर सहारनपुर की लकड़ी, ODOP की मदद से काष्ठ कला के कारोबार ने पकड़ी रफ्तार, ग्लोबल लेबल पर चमक रहा वुडन सिटी

यूपी के सहारनपुर को वुडन सिटी से नाम से जाना जाता है. जिले की काष्ठ कला को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP में शामिल किए जाने के बाद अब इस पारंपरिक हुनर को नई तकनीक और आर्थिक मदद मिल रही है. इसकी वजह से सहारनपुर तेजी से ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहा है.

Saharanpur Wooden Industry
राहुल कुमार
  • सहारनपुर,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

उत्तर प्रदेश का सहारनपुर, जिसे देश-दुनिया में वुडन सिटी के नाम से जाना जाता है, यहां की लकड़ी पर कारीगरों के हाथों से उकेरी गई महीन नक्काशी सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कला और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी है. 

सहारनपुर की इसी काष्ठ कला को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP में शामिल किए जाने के बाद अब इस पारंपरिक हुनर को नई तकनीक, आर्थिक मदद और ग्लोबल मार्केट से जोड़ने का काम किया जा रहा है. खाताखेड़ी समेत सहारनपुर के कई इलाकों में लकड़ी के फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट का बड़ा कारोबार है, यहां सोफा, बेड, डाइनिंग टेबल, अलमारी, झूले, टेबल और लकड़ी से बने सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं, जिनकी मांग देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी है.

ODOP योजना से उद्योगों को फायदा-
करीब 45 साल से फर्नीचर के कारोबार से जुड़े मोहम्मद मुजम्मिल हुसैन बताते हैं कि ODOP योजना से सहारनपुर के छोटे कारीगरों से लेकर बड़े कारखानेदारों तक को फायदा मिला है. सरकार की तरफ से मशीनरी और दूसरी सुविधाएं मिलने से काम आसान हुआ है और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली है. उनके मुताबिक सहारनपुर में बड़ी संख्या में आर्टिजन इस उद्योग से जुड़े हुए हैं और सरकारी योजनाओं के जरिए छोटे कारीगर भी लोन लेकर अपने काम को बड़े स्तर तक ले जा पा रहे हैं. सहारनपुर की लकड़ी की पहचान अब सिर्फ पारंपरिक हाथ के हुनर तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक मशीनों ने उत्पादन और लकड़ी की गुणवत्ता दोनों को बेहतर करने का काम किया है.

विदेशों में भेजे जा रहे हैं प्रोडक्ट-
शाइनिंग हैंडीक्राफ्ट के मैनेजर विजय कटारिया भी पिछले करीब चार-पांच साल से ODOP की सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार से मिली सब्सिडी की मदद से नई मशीनरी खरीदी गई और बड़ा प्लांट लगाया गया. उनके यहां वुड सीजनिंग और वुड केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट चल रहे हैं. वुड सीजनिंग से लकड़ी की गुणवत्ता बेहतर होती है, जबकि केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए लकड़ी को कीड़ों से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है. विजय कटारिया के मुताबिक सरकार के प्रोत्साहन से उनकी इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने का मौका मिला और आज उनके प्रोडक्ट जर्मनी, अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों तक पहुंच रहे हैं.

सब्सिडी से आगे बढ़ने का मिला मौका- नवाब शाह
सहारनपुर की वुडन इंडस्ट्री को नई पहचान दिलाने में एक्सपोर्ट कारोबार भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. मर्चेंट्स ऑफ इंडिया के नवाब शाह साल 2009 से एक्सपोर्ट के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि ODOP योजना आने के बाद छोटे कारोबारियों को काफी फायदा मिला है. पहले कई कारोबारी आर्थिक परेशानियों और जटिल प्रक्रियाओं की वजह से बड़ा काम शुरू नहीं कर पाते थे, लेकिन योजना के जरिए वित्तीय मदद और सब्सिडी मिलने से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला. 

100 से 150 साल पुरानी है कला-
नवाब शाह के मुताबिक सहारनपुर की काष्ठ कला करीब 100 से 150 साल पुरानी है और एक समय इसके लुप्त होने का खतरा था, लेकिन ODOP जैसी योजनाओं ने इस कला से जुड़े आर्टिस्ट्स को एक तरह से जीवनदान दिया है. उनका कहना है कि सरकार का लोकल टू ग्लोबल का विजन अब जमीन पर दिखाई दे रहा है और सहारनपुर के लकड़ी के प्रोडक्ट अमेजन, फ्लिपकार्ट और दूसरे इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर मैन्युफैक्चरर से सीधे ग्राहक तक पहुंच रहे हैं.

आर्थिक मदद ही नहीं, ट्रेनिंग भी मिलती है-
ODOP का फायदा सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है. कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है. मंडी समिति रोड स्थित ईपीसीएच कार्यालय में समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां कारीगर नई तकनीक सीखते हैं और ट्रेनिंग के बाद उन्हें सर्टिफिकेशन भी दिया जाता है. इसके अलावा कारीगरों की सेहत को लेकर भी हेल्थ कैंप और आंखों की जांच जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. यानी सरकार और उद्योग से जुड़े संगठनों की कोशिश है कि कारीगरों का हुनर बढ़े, उनकी सेहत का ध्यान रखा जाए और उनकी मेहनत को बेहतर बाजार मिले.

नए बाजार तक पहुंच बनाने में मिलती है मदद- नासिर
खाताखेड़ी के कारोबारी मोहम्मद नासिर भी ODOP योजना को कारोबार के लिए फायदेमंद बताते हैं. उनका कहना है कि खाताखेड़ी और आसपास के इलाकों में लकड़ी का कारोबार बड़े स्तर पर है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े हुए हैं. यहां सोफा, बेड, डाइनिंग, टेबल, अलमारी, झूले और रसोई से जुड़े लकड़ी के तमाम सामान तैयार होते हैं. इनकी सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों में होती है. नासिर के मुताबिक सरकार की योजनाओं से कारोबारियों को आर्थिक मदद मिली है और मेलों तथा प्रदर्शनियों में शामिल होने का मौका मिलने से तैयार माल को नए बाजार तक पहुंचाने में भी मदद मिलती है. हालांकि उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए बैंक से लोन मिलने की प्रक्रिया को और आसान किया जाना चाहिए, ताकि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके.

9 साल में 87 करोड़ से ज्यादा का लोन-
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो ODOP योजना के तहत सहारनपुर में बड़ी संख्या में लाभार्थियों को फायदा मिला है. पिछले नौ वित्तीय वर्षों में ODOP मार्जिन मनी योजना के तहत कुल 506 लोगों को 87 करोड़ 75 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में विभाग को तीन करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला है, जिसमें अब तक 78 लाख रुपये का ऋण मार्जिन मनी के रूप में वितरित किया जा चुका है. वहीं ODOP टूल किट योजना के तहत पिछले नौ वर्षों में 2275 लोगों को 10 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया और इसके बाद उन्हें टूल किट उपलब्ध कराई गई. प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को मानदेय भी दिया जाता है.

इंटरनेशनल लेवल के मेलों में हिस्सा लेने के लिए मदद-
सरकार की MDA योजना के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मेलों और प्रदर्शनियों में हिस्सा लेने वाले कारोबारियों को भी सहायता दी जाती है. उनके स्टॉल चार्ज का 75 प्रतिशत तक सहयोग, माल ढुलाई में वित्तीय सहायता और निर्धारित नियमों के तहत यात्रा खर्च में भी मदद दी जाती है. मार्जिन मनी योजना में करीब 25 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है और अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. जिला उद्योग विभाग के मुताबिक ODOP के अलग-अलग सेगमेंट में अब तक 506 लोगों ने मार्जिन मनी योजना, 2275 लोगों ने टूल किट योजना और करीब 150 लोगों ने MDA योजना का लाभ लिया है.

1000 करोड़ की है सहारनपुर की वुडन इंडस्ट्री-
सहारनपुर की काष्ठ कला को ODOP में शामिल किए जाने के पीछे यहां की पुरानी परंपरा और बड़े कारोबार का भी अहम योगदान है. जिला उद्योग विभाग के मुताबिक सहारनपुर में करीब 350 निर्यातक यूनिट हैं और वुडन इंडस्ट्री का कारोबार करीब 1000 करोड़ रुपये के आसपास है. यहां से लकड़ी के उत्पाद विदेशों में भी एक्सपोर्ट किए जाते हैं और वर्तमान समय में भी कई नई यूनिटें स्थापित हो रही हैं. यानी सहारनपुर की लकड़ी अब सिर्फ स्थानीय बाजार की पहचान नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना रही है.

हालांकि कारोबारियों की अपनी कुछ चुनौतियां भी हैं. छोटे कारोबारियों के सामने बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अब भी मौजूद हैं. कारोबारियों का कहना है कि अगर बैंकिंग प्रक्रिया को और आसान किया जाए और वुडन इंडस्ट्री से जुड़े इलाकों में सड़क, सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जाए तो सहारनपुर की लकड़ी का कारोबार और तेजी से आगे बढ़ सकता है.

कुल मिलाकर सहारनपुर की वुडन इंडस्ट्री में अब परंपरा और आधुनिकता का संगम देखने को मिल रहा है. कारीगरों के हाथों का हुनर, आधुनिक मशीनों का साथ, सरकारी योजनाओं की आर्थिक मदद, ट्रेनिंग और देश-विदेश तक पहुंचता बाजार... इन सभी ने मिलकर सहारनपुर की वुडन इंडस्ट्री को नई पहचान दी है. ODOP ने स्थानीय हुनर को स्थानीय बाजार से निकालकर ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया है. यही वजह है कि सहारनपुर की वुडन सिटी में अब पीढ़ियों पुराना हुनर नई तकनीक और सरकारी मदद के साथ मिलकर कारोबार की नई कहानी लिख रहा है.

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