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प्रतापगढ़ में आंवला उगाने वाले किसानों की बदली जिंदगी, ODOP योजना से बढ़ी कमाई

यूपी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना ने प्रतापगढ़ में आंवला किसानों की जिंदगी बदल दी है. प्रतापगढ़ के आंवले को अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल का मार्केट मिल रहा है. अमेजन, फ्लिपकार्ट और सरकारी पोर्टल के जरिए प्रतापगढ़ का स्वाद सीधे मेट्रो शहरों के डाइनिंग टेबल तक पहुंच रहा है.

ODOP Scheme
सुनील कुमार यादव
  • प्रतापगढ़,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:50 PM IST

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का आंवला सिर्फ बागों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत आंवला देश-दुनिया में पहुंच रहा है और किसानों की किस्मत बदल रहा है. सरकार की ODOP योजना से जुड़कर यहां के किसान आंवला से बने उत्पादों से लाखों की कमाई कर रहे हैं और महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है.

प्रतापगढ़ को आंवला नगरी और अमृत फल आंवला का गढ़ कहा जाता है. यहां का आंवला देश भर में मशहूर है. यूपी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में प्रतापगढ़ के मुख्य उत्पाद आंवला को चुना गया है.

ODOP से बदला प्रोडक्शन का तरीका-
पहले किसान सिर्फ कच्चा आंवला बेचते थे, जिससे उन्हें ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता था. लेकिन ODOP योजना के बाद तस्वीर बदल गई है. अब जिला प्रशासन और उद्यान विभाग किसानों को आंवले की उन्नत खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग दे रहा है. जिले में 15 से ज्यादा आंवला प्रोसेसिंग प्लांट लग चुके हैं, जहां फल से कैंडी, च्यवनप्राश, पाउडर, हेयर ऑयल समेत कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.

महिलाओं को मिल रहा रोजगार-
इस पूरे बदलाव की सबसे खूबसूरत कड़ी हैं गांव-देहात की महिलाएं. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बाकायदा आंवला उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी गई. नतीजा यह हुआ कि जो महिलाएं कल तक सिर्फ घर संभालती थीं, वे आज पैकेजिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स में काम करके परिवार की कमाई का मजबूत जरिया बन चुकी हैं.

आंवला को मिला मार्केट-
प्रशासन और उद्यान विभाग ने किसानों को सिर्फ बागवानी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें प्रोसेसिंग के साथ-साथ बाजार में माल बेचने के गुर भी सिखाए. ODOP के तहत मिलने वाली सब्सिडी, आसान लोन और ई-कॉमर्स की मदद से यह आंवला अब सिर्फ स्थानीय हाट तक नहीं रुकता. अमेजन, फ्लिपकार्ट और सरकारी पोर्टल के जरिए प्रतापगढ़ का स्वाद सीधे मेट्रो शहरों के डाइनिंग टेबल तक पहुंच रहा है. पिछले साल जिले में इसका कुल कारोबार 50 करोड़ रुपये के पार निकल गया.

10 हजार टन हो गई प्लांट की क्षमता- रमेश कुमार
कारोबार से जुड़े रमेश कुमार बताते हैं कि पहले जहां प्लांट की क्षमता 1,000 टन थी, वह बढ़कर अब 10,000 टन हो गई है. वहीं किसान महेश यादव का कहना है कि योजना आने के बाद मांग में गजब का उछाल आया है और फसलों के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं. कटनी, जबलपुर से लेकर हरियाणा तक सीधी सप्लाई होने से बिचौलियों की उंगली दबाने वाली धांधली खत्म हो गई है और पाई-पाई का मुनाफा सीधे किसान की जेब में पहुंच रहा है.

आमदनी में कोई कमी नहीं है- गुड्डू मिश्रा
गुड्डू मिश्रा बताते हैं कि हम लोगों को वन जिला वन प्रोडक्ट में पूरा लाभ मिल रहा है. हम किसान भी हैं और ट्रेनिंग भी करते हैं. आंवला अमृत फल है. आंवला से बहुत सारे प्रोडक्ट बनते हैं. कैंडी, मुरब्बा, चटनी, लड्डू जैसे बहुत सारे प्रोडक्ट बनते हैं. इसका लाभ भी मिला है. आमदनी में कोई कमी नहीं है और खपत में भी कोई कमी नहीं है.

इस तरह ODOP योजना ने प्रतापगढ़ के आंवले को खेती से आगे कारोबार का रूप दिया है. किसान, कारोबारी व स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इससे जुड़ रही हैं, जिससे जिले के इस पारंपरिक उत्पाद को बड़ा बाजार मिल रहा है.

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