योगी सरकार की पॉलिसी ने दी लेदर उद्योग को नई पहचान, ग्लोबल संकट के बावजूद कानपुर लेदर उद्योग में बड़ी ग्रोथ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की नीतियों की वजह से कानपुर का लेदर उद्योग तेजी से ग्रोथ कर रहा है. ग्लोबल संकट के बावजूद पिछले 5 साल में कानपुर रीजन के लेदर ए्क्सपोर्ट में करीब 35 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में कानपुर रीजन से करीब 10,200 करोड़ रुपये का कुल एक्सपोर्ट दर्ज किया गया. इसमें अकेले लेदर इंडस्ट्री का योगदान करीब 7,000 करोड़ रुपये रहा. यानी कानपुर रीजन के कुल निर्यात में लगभग 70 फीसदी हिस्सेदारी लेदर सेक्टर की रही.

Kanpur leather Industry
सिमर चावला
  • कानपुर,
  • 20 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:10 PM IST

उत्तर प्रदेश के पारंपरिक लेदर उद्योग में बड़ा बदलाव हुआ है. अब ये नए दौर में पहुंच चुका है. योगी सरकार की नीतियों, बेहतर कानून व्यवस्था और निवेश को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से कभी कानपुर की पहचान रहे चमड़ा कारोबार को नई रफ्तार मिली है. सरकार की औद्योगिक नीतियों और लेदर सेक्टर के लिए किए गए विशेष प्रावधानों का असर अब एक्सपोर्ट के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है. कारोबारियों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में लेदर और फुटवियर इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है. इसका सबसे बड़ा फायदा निर्यात आधारित इकाइयों को मिला है.

कानपुर के एक्सपोर्ट में लेदर सेक्टर का 70 फीसदी योगदान-
कानपुर लंबे समय से देश के प्रमुख लेदर हब में शामिल रहा है, अब भी प्रदेश के चमड़ा उद्योग की रीढ़ बना हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में कानपुर रीजन से करीब 10,200 करोड़ रुपये का कुल एक्सपोर्ट दर्ज किया गया. इसमें अकेले लेदर इंडस्ट्री का योगदान करीब 7,000 करोड़ रुपये रहा. यानी कानपुर रीजन के कुल निर्यात में लगभग 70 फीसदी हिस्सेदारी लेदर सेक्टर की रही. कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी हुई है.

लेदर उद्योग के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हुआ- यादवेंद्र सिंह
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के रीजनल चेयरमैन यादवेंद्र सिंह ने बताया कि यूपी सरकार की नीतियों ने लेदर उद्योग के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है. सरकार की नई लेदर एंड फुटवियर पॉलिसी और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं की वजह से उद्योग में लगातार विस्तार हो रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा निर्यात आधारित इकाइयों को मिला है.

इस रिपोर्ट में लेदर फैक्ट्री में काम करते श्रमिक, बेल्ट तैयार करती आधुनिक मशीनें और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस की तस्वीरें इस बदलाव की कहानी खुद बयां करती हैं. उद्योग में लगने वाली आधुनिक मशीनों पर सरकार करीब 30 फीसदी तक सब्सिडी भी दे रही है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है. कानपुर आज भी उत्तर प्रदेश में चमड़ा उद्योग की रीढ़ माना जाता है.

ग्लोबल संकट के बाद भी बढ़ा निर्यात-
लेदर इंडस्ट्री को पिछले कुछ वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अमेरिका की टैरिफ नीति, रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक परिस्थितियों ने व्यापार को प्रभावित किया, लेकिन इसके बावजूद उत्तर प्रदेश का लेदर सेक्टर अपनी ग्रोथ बनाए रखने में सफल रहा. कारोबारियों के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ये बाधाएं नहीं आतीं तो एक्सपोर्ट का आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता था.

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों की तुलना करें तो कानपुर रीजन के लेदर एक्सपोर्ट में करीब 35 से 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. साल 2020-21 में जहां एक्सपोर्ट करीब 5,000 करोड़ रुपये के आसपास था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

लेदर पॉलिसी निवेश की संभावनाएं बढ़ी-
लेदर कारोबारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की नई लेदर एंड फुटवियर पॉलिसी ने इस सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को और मजबूत किया है. देश के कई राज्यों ने लेदर सेक्टर के लिए अपनी-अपनी नीतियां बनाई हैं, लेकिन यूपी की नीति को कारोबारियों ने सबसे आकर्षक बताया है.
इस पॉलिसी के तहत निवेशकों को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं.

  • जमीन खरीद पर 85 फीसदी तक सब्सिडी.
  • बिल्डिंग निर्माण पर सहायता.
  • मशीनरी खरीद पर सब्सिडी.
  • विदेशी प्रदर्शनियों और बायर-सेलर मीट में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन.

कारोबारियों के मुताबिक, यदि कोई उद्यमी करीब 50 करोड़ रुपये का निवेश करता है तो आने वाले पांच वर्षों में करीब 40 करोड़ रुपये तक का लाभ कमा सकता है. यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश के लेदर सेक्टर की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

लेदर पार्क और मेगा लेदर क्लस्टर से बदलेगी तस्वीर-
सरकार की ओर से लेदर सेक्टर को क्लस्टर आधारित विकास मॉडल से आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है. कानपुर में लेदर फुटवियर पार्क पर काम आगे बढ़ चुका है. इसके लिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में नई यूनिटों के शुरू होने की उम्मीद है. इसके अलावा लंबे समय से प्रस्तावित मेगा लेदर क्लस्टर को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

कारोबारियों का मानना है कि मेगा लेदर क्लस्टर बनने के बाद टेनरी उद्योग को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में लेदर उत्पादों के लिए पर्यावरण और गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी होता है. क्लस्टर के जरिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होने से यूपी की कंपनियां वैश्विक बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी.

कानपुर लेदर सेक्टर दे रहा 7-8 लाख रोजगार-
लेदर इंडस्ट्री सिर्फ एक्सपोर्ट का माध्यम नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाला सेक्टर भी है. कारोबारियों के मुताबिक, अकेले कानपुर रीजन में लेदर इंडस्ट्री करीब 7 से 8 लाख लोगों को रोजगार दे रही है. नए निवेश, क्लस्टर और फुटवियर पार्क विकसित होने के बाद रोजगार के अवसर और बढ़ने की उम्मीद है.

इसका असर उन श्रमिकों पर भी पड़ सकता है जो रोजगार के लिए तमिलनाडु और दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं. कारोबारियों का कहना है कि जब यूपी में ही आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे तो बड़ी संख्या में कुशल श्रमिक वापस लौट सकते हैं.

स्किल डेवलपमेंट से तैयार हो रही नई वर्कफोर्स-
लेदर सेक्टर में कुशल श्रमिकों की जरूरत को देखते हुए सरकार की ओर से स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं. इन कार्यक्रमों के तहत युवाओं को लेदर निर्माण, मशीन संचालन और अन्य तकनीकी कार्यों की ट्रेनिंग दी जा रही है. कंपनियां अपनी फैक्ट्रियों में भी प्रशिक्षण दे सकती हैं, जबकि कानपुर लेदर क्लस्टर जैसे संस्थानों में अलग-अलग ट्रेड में ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध है.

लगातार ग्रोथ कर रहा यूपी का लेदर सेक्टर- आलोक श्रीवास्तव
FIEO (Federation of Indian Export Organisations) कानपुर रीजन के हेड आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश का लेदर सेक्टर लगातार ग्रोथ कर रहा है. उन्होंने कहा कि अगर पूरे प्रदेश की बात करें तो कानपुर के अलावा आगरा, नोएडा जैसे प्रमुख शहरों को मिलाकर उत्तर प्रदेश से लेदर का कुल एक्सपोर्ट करीब 15 से 16 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है.

उन्होंने बताया कि 2021-22 में कानपुर से लेदर एक्सपोर्ट करीब 4,200 करोड़ रुपये के आसपास था. कोविड के असर के बाद अगले वर्ष भी यह आंकड़ा करीब 4,500 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इसके बाद लगातार ग्रोथ दर्ज हुई और अब कानपुर रीजन का लेदर एक्सपोर्ट बढ़कर करीब 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, सरकार की ओर से MSME सेक्टर और लेदर-फुटवियर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू की गई हैं. लेदर एंड फुटवियर पॉलिसी, लेदर पार्क और मशीनरी व प्लांट पर सब्सिडी जैसी योजनाओं से उद्योगों को विस्तार करने में मदद मिली है.

उन्होंने कहा कि सरकार की प्रोडक्टिव और इंडस्ट्री फ्रेंडली अप्रोच का सकारात्मक असर दिख रहा है और यही वजह है कि लेदर सेक्टर लगातार निवेश और विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

पॉलिसी का उद्योग पर बड़ा असर- मुख्तारुल अमीन
सुपर हाउस के चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने बताया कि सरकार की नीतियों का असर लेदर और फुटवियर सेक्टर पर साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की नई नीतियों के तहत बाहर से आने वाले फुटवियर और संबंधित उत्पादों के लिए BIS (Bureau of Indian Standards) मानकों को अनिवार्य किया गया है, जिससे आयात में कमी आई है. इसका फायदा घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को मिला है और बाजार की बढ़ती मांग को भारतीय कंपनियां पूरा कर रही हैं.

मुख्तारुल अमीन ने कहा कि सरकार की ओर से फुटवियर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लाई गई नीतियां, लेदर पार्क और अन्य औद्योगिक पहलें एक्सपोर्ट बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से भारतीय लेदर और फुटवियर उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता मिल रही है.

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