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यूपी में नई स्टार्टअप पॉलिसी को मंजूरी, राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के विजन को मिलेगी रफ्तार, सबकुछ जानें

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 6 जुलाई 2026 को नई स्टार्टअप पॉलिसी 2026 को मंजूरी दी है. इस पॉलिसी से सूबे को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के विजन को रफ्तार मिलेगी. इस नई पॉलिसी में AI, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और एयरोस्पेस जैसे डीप-टेक क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. इन क्षेत्रों की बड़ी परियोजनाओं को ₹100 करोड़ तक की पेशेंट कैपिटल मिल सकती है.

CM Yogi Adityanath
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

उत्तर प्रदेश अब सिर्फ खेती और उद्योग के लिए नहीं, बल्कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी चर्चा में है. बीते कुछ सालों में सूबे के नोएडा और लखनऊ जैसे शहर स्टार्टअप हब के तौर पर विकसित हुए हैं. सरकार इस मिशन को और तेज कर रही है. इसके लिए सरकार की तरफ से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. 

नई स्टार्टअप पॉलिसी 2026 को मंजूरी-
6 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने Startup Policy 2026 को मंजूरी दी है. यह नई पॉलिसी सूबे को $1 ट्रिलियन इकॉनमी बनाने के लक्ष्य से सीधे जुड़ी है और 2030 तक इस विज़न में स्टार्टअप्स की भूमिका तय करती है. नई पॉलिसी में क्या कुछ खास है. चलिए जानते हैं.

  • पात्र स्टार्टअप्स को अब 15 लाख रुपए तक की सीड फंडिंग मिल सकेगी.
  • रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं को 50 लाख रुपए तक का समर्थन मिलेगा.
  • शुरुआती चरण की पूंजी सहायता के लिए 1,000 करोड़ रुपए का स्टार्टअप फंड बनाया गया है.
  • चुनिंदा स्टार्टअप्स को 2 साल तक हर महीने 20,000 रुपए का सस्टेनेंस अलाउंस मिलेगा.
  • प्रोटोटाइप ग्रांट को दोगुना कर 10 लाख रुपए कर दिया गया है.
  • क्लाउड सर्विस के लिए हर साल 2 लाख रुपए तक की प्रतिपूर्ति मिलेगी.

खास बात यह है कि इस पॉलिसी में AI, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और एयरोस्पेस जैसे डीप-टेक क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. इन क्षेत्रों की बड़ी परियोजनाओं को ₹100 करोड़ तक की पेशेंट कैपिटल (लंबी अवधि की पूंजी) मिल सकती है. नीति के तहत यूपी स्टार्टअप मिशन को एक स्वायत्त संस्था के रूप में मंजूरी दी गई है, जो अब यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की जगह स्टार्टअप्स से जुड़े कामकाज को संभालेगी और जिसकी अगुवाई मुख्य सचिव करेंगे.

महिलाओं और वंचित वर्गों पर खास फोकस-
नई पॉलिसी में महिला उद्यमियों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान बरकरार रखे गए हैं. पॉलिसी में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र पर भी फोकस किया गया है. इन इलाकों में स्थापित स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता रहेगा. ये इसलिए किया गया है, ताकि राज्य के पिछड़े इलाकों में भी उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके.

पुरानी नीति का भी हुआ बड़ा असर-
साल 2026 से पहले तक राज्य में स्टार्टअप पॉलिसी 2020 (पहला संशोधन-2022) लागू थी. इस पॉलिसी के तहत सरकार ने ₹1,000 करोड़ का कॉर्पस फंड बनाया था, जिसे SIDBI द्वारा प्रबंधित अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) के ज़रिए स्टार्टअप्स तक पहुंचाया गया. इसके अलावा स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए ₹5 लाख तक की ग्रांट, बाजार में उत्पाद लॉन्च करने के लिए ₹7.5 लाख तक की सीड कैपिटल, और पेटेंट फाइलिंग के लिए भारतीय पेटेंट पर ₹2 लाख व अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर ₹10 लाख तक की प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं दी गईं.

इस नीति के तहत सरकार ने लक्ष्य रखा था कि राज्य के हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेटर स्थापित हो, कुल मिलाकर 100 इनक्यूबेटर बनें, और कम से कम 10,000 स्टार्टअप्स का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो.

यूपी में तेजी से फैल रहा स्टार्टअप कल्चर-
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब करीब 17,000 सक्रिय स्टार्टअप्स हैं, जिनमें से 8 यूनिकॉर्न बन चुके हैं. राज्य में 72 इनक्यूबेटर और विशेष सेंटर काम कर रहे हैं, जो हेल्थकेयर, कृषि और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन को बढ़ावा दे रहे हैं. खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, राज्य की रणनीति टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी स्टार्टअप कल्चर पहुंचाने पर केंद्रित है, जिसमें कृषि-नवाचार जैसे स्थानीय उद्योगों को भी स्टार्टअप कहानी का हिस्सा बनाया जा रहा है.

देश के बड़े स्टार्टअप राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात के मुकाबले उत्तर प्रदेश अभी भी संख्या के लिहाज से आगे बढ़ रहा है, लेकिन नोएडा और लखनऊ के स्टार्टअप हब्स और जिला-स्तरीय कार्यक्रमों के चलते राज्य की रैंकिंग में लगातार सुधार देखा जा रहा है.

नई नीति 2026 के साथ उत्तर प्रदेश का लक्ष्य साफ है, सिर्फ स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि डीप-टेक और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में भी राज्य को अग्रणी बनाना, ताकि यह इकोसिस्टम राज्य के $1 ट्रिलियन इकॉनमी के सफर में मजबूत योगदान दे सके.

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