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योगी आदित्यनाथ सरकार में यूपी में पैदा हो रहे रोजगार के नए अवसर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लगा पंख

योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश में MSME को काफी बढ़ावा मिल रहा है. देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में बढ़ रहे उत्तर प्रदेश ने अब अपने लगभग 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के कार्यबल को मजबूत करने पर भी जोर देना शुरू किया है. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.

Yogi Adityanath
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की चर्चा अक्सर एक्सप्रेसवे, निवेश शिखर सम्मेलनों और नए कारखानों के इर्द-गिर्द होती है. लेकिन उद्योग जगत का मानना है कि सिर्फ बुनियादी ढांचा ही उत्पादन को गति नहीं देता. प्रशिक्षित मशीन ऑपरेटर, कुशल कारीगर, तकनीशियन और संविदा कर्मचारी समय पर उत्पादन, गुणवत्ता बनाए रखने और प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में अहम भूमिका निभाते हैं.

देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में बढ़ रहे उत्तर प्रदेश ने अब अपने लगभग 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के कार्यबल को मजबूत करने पर भी जोर देना शुरू किया है. यही MSME क्षेत्र राज्य की विनिर्माण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता रहा है. 

यह रणनीति औद्योगिक नीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाती है. आज किसी राज्य की क्षमता केवल नए कारखानों की संख्या पर नहीं, बल्कि कुशल श्रमिकों की उपलब्धता, स्थानीय उद्योगों की मजबूती और पारंपरिक उद्योगों की बदलते बाजार के अनुरूप ढलने की क्षमता पर भी निर्भर करती है.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण कानपुर का चमड़ा उद्योग है, जो उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्लस्टरों में शामिल है. यहां हजारों श्रमिक टैनिंग, कटिंग, सिलाई और फिनिशिंग जैसे कार्यों में लगे हुए हैं. एक हालिया अध्ययन के अनुसार, इस उद्योग में स्थायी और संविदा कर्मचारियों की संख्या लगभग बराबर है और इसमें से ज्यादातर को मासिक वेतन मिलता है, जिससे उनकी आय अपेक्षाकृत स्थिर रहती है.

इन श्रमिकों को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने उन्हें कौशल विकास कार्यक्रमों, स्वास्थ्य बीमा और उद्योग कार्ड जैसी सुविधाओं से जोड़ा है. इससे उन्हें कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और दुर्घटना बीमा का लाभ मिल रहा है. अधिकारियों का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा से लैस कुशल कार्यबल ही उत्पादन क्षमता और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बनाए रख सकता है. 

यह मॉडल सिर्फ चमड़ा उद्योग तक सीमित नहीं है. वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत मुरादाबाद के पीतल उद्योग और मेरठ के खेल सामग्री उद्योग जैसे पारंपरिक विनिर्माण केंद्रों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजाइन सुधार और तकनीकी उन्नयन में मदद दी जा रही है.

इस योजना का उद्देश्य सिर्फ पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें घरेलू और वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना भी है.
 
ODOP के बाद 1.46 लाख ये ज्यादा कारीगरों को प्रशिक्षण-
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में ODOP शुरू होने के बाद से 1.46 लाख से ज्यादा कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 20,000 से ज्यादा उद्यमियों को सीधे लाभ मिला है. इस योजना से 3.16 लाख से अधिक रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं. 

मुरादाबाद के पद्मश्री सम्मानित शिल्पकार दिलशाद हुसैन के मुताबिक, ODOP योजना के तहत ब्रांडिंग, विपणन और प्रदर्शनियों में भागीदारी के कारण शहर के पीतल उद्योग की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ी है.

अमरोहा के फर्नीचर कारीगर जितेंद्र सैनी का कहना है कि धातु और लकड़ी के हस्तशिल्प को ODOP में शामिल किए जाने से मशीनरी, कच्चे माल और कारोबार विस्तार के लिए वित्तीय सहायता मिलने लगी है, जिससे कारीगरों की आय बढ़ी है.

उद्यमी अमित गोयल के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर बने लकड़ी के हस्तशिल्प अब प्रदर्शनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं.

निर्यातक फिरोज अहमद का कहना है कि गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग में सुधार के कारण मुरादाबाद के धातु शिल्प, भदोही के कालीन, कन्नौज के इत्र, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और अलीगढ़ के ताले जैसे उत्पादों की वैश्विक मांग मजबूत हुई है. 

प्रशिक्षित युवा MSME से जुड़े-
राज्य के निर्यात आंकड़े भी इस बदलाव को दर्शाते हैं. उत्तर प्रदेश का निर्यात 2017-18 के 86,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इनमें लगभग 50% हिस्सेदारी ODOP और हस्तशिल्प उत्पादों की है. राज्य को अब तक 79 भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी मिल चुके हैं. GI उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए बजट आवंटन 145 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये किया गया है.
 
कार्यबल विकास अब पारंपरिक उद्योगों से आगे भी बढ़ रहा है. औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत प्रशिक्षित युवा अब मशीन ऑपरेटर, फिटर और तकनीशियन के रूप में MSMEs से जुड़ रहे हैं, जिससे उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिल रहा है.

इसके साथ ही राज्य सामाजिक सुरक्षा, बीमा, पेंशन और श्रमिक कल्याण योजनाओं के जरिए ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को संगठित अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास कर रहा है.

करीब 96 लाख MSMEs वाले राज्य में ये पहल सिर्फ कल्याणकारी योजनाएं नहीं हैं. छोटे उद्योग चमड़ा, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध कराकर पूरे औद्योगिक तंत्र को सहारा देते हैं. ऐसे में कौशल विकास, बेहतर बाजार पहुंच और सामाजिक सुरक्षा इन उद्यमों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकती है.

इस तरह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा सिर्फ निवेश और बुनियादी ढांचे पर आधारित नहीं है, बल्कि उन लाखों श्रमिकों, कारीगरों और उद्यमियों पर भी टिकी है जो कारखानों, कार्यशालाओं और छोटे उद्योगों को गति देते हैं.
 
राज्य यदि देश का बड़ा विनिर्माण केंद्र बनने का लक्ष्य हासिल करना चाहता है, तो उसकी सफलता सिर्फ नए कारखानों की संख्या से नहीं, बल्कि उन लोगों की क्षमता और कौशल से तय होगी जो इन उद्योगों को आगे बढ़ाते हैं.

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