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ODOP से बदली बनारसी साड़ी, गुलाबी मीनाकारी और साड़ी उद्योग की तस्वीर

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत वाराणसी में गुलाबी मीनाकारी, बनारसी साड़ी और लकड़ी के खिलौने जैसे पारंपरिक उद्योगों को मजबूती दी गई है. इसके तहत सरकार कई तरह की सुविधाएं मुहैया करा ही है. इसमें मार्जिन मनी स्कीम के तहत लोन दिया जाता है. इसके साथ ही कारीगरों को ट्रेनिंग दी जाती है. इसके अलावा डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और डाइंग और फिनिशिंग में भी मदद की जाती है.

ODOP Scheme
रोशन जायसवाल
  • वाराणसी,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

जापान की तर्ज पर वन विलेज वन प्रोडक्ट को उत्तर प्रदेश में भी एक जिला-एक उत्पाद यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट(ODOP) की शुरुआत 24 जनवरी 2018 को हुई. फिर इसकी सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी इसको अपना लिया. जिसके बाद देश भर में सरकार की ये स्कीम फैल गई. वाराणसी में भी ODOP के तहत लकड़ी के खिलौना, गुलाबी मीनाकारी और साड़ी उद्योग है. इस योजना के शुरू होने के बाद से ही इन उत्पादों, खासकर साड़ी-सिल्क मटेरियल उद्योग में काफी बढोतरी देखने को मिली है.

जगतपुर में चल रहा ODOP-CFC- 
वाराणसी का ODOP-CFC जगतपुर में क्रियाशील है. जिसकी खास बात ये है कि वाराणसी और आसपास के बुनकरों को छोटे-मोटे काम के लिए कहीं और भटकना नहीं पड़ रहा है. वे यही एक ही छत के नीचे अपने बिनाई किए हुए सिल्क मैटेरियल और साड़ियों पर डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और डाइंग एवं फिनिशिंग करा पा रहे है.

4 कर्मचारियों से शुरू हुआ था काम- नमिता
वाराणसी में ओडीओपी-सीएफसी का संचालन करने वाली यहां की निदेशक नमिता भुराड़िया ने बताया कि उनके केंद्र में मशीन के द्वारा काम को आसान और तेज बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और डाइंग एवं फिनिशिंग का काम होता है. उन्होंने बताया कि बुनकर उनके केंद्र तक आते है, यहां मिलने वाली सुविधाओं का लाभ कम दरों में लेते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि दो साल पहले महज 4 कर्मचारियों से शुरू किया गया काम आज 70 से भी ज्यादा से पहुंच गया है और पहले से अब में उन्हें आर्थिक लाभ भी हुआ है.

एक छत के नीचे होते हैं सारे काम- बुनकर
वहीं ODOP-CFC अपने सिल्क मटेरियल पर काम कराने पहुंचे बुनकर रितेश पाल ने बताया कि इस सेंटर का उनको लाभ मिल रहा है. एक ही छत के नीचे उनके सारे काम हो जाते हैं, उन्हें भटकना नहीं पड़ रहा है. जिसके चलते इसका असर उनको आर्थिक लाभ के रूप में हुआ है.

कारीगरों को मिली है आर्थिक मजबूती-
यहां से जुड़े कारीगरों की बात करें तो कुलदीप और मनीष बताते है कि यहां काम करने से उनकी माली स्थिति पहले से बेहतर हुई है. तो वहीं डिजाइनर पकंज सिंह पटेल ने भी बताया कि पढ़ाई के बाद सीधे नौकरी मिल जाने से वे आर्थिक रूप से मजबूत हुए है और यहां का वातावरण बहुत अच्छा है. तो वहीं डिजाइनर प्रिंस गुप्ता ने भी बताया कि एक छत के नीचे काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है और उनकी भी माली स्थिति में सुधार यहां नौकरी करके हुआ है.

ODOP ने पूरे समाज का भला किया- शैलेश सिंह
बुनकर बहुल वाराणसी के लोहता के भट्टी गांव में ODOP के तहत अपनी जकाट मशीन चलाने वाले बुनकर शैलेश सिंह ने बताया कि ODOP के बाद से उद्यमियों को बैंक का पूरा सपोर्ट मिला है. मशीन खरीदने के बाद प्रोडक्शन काफी बढ़ा. जिसका लाभ सिर्फ मुझे नहीं, बल्कि मुझसे जुड़े लोगों को भी मिला है. सुविधाओं के बारे में उन्होंने बताया कि 25% सब्सिडी या अधिकतम 10 लाख रुपए का लाभ उनको मिला और बनारसी साड़ी और ड्रेस मटेरियल की मार्केटिंग तो खुद ही हो जाती है. आमदनी में वृद्धि के सवाल पर उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति अच्छी हुई, बैंक से संबंध अच्छे हुए और मुझसे जुड़े लोगों का भी भला हुआ. इस प्रकार ODOP ने पूरे समाज का भी भला किया.

पहले पानीपत में काम करते थे, अब यहां आ गए हैं- मजदूर
बुनकर शैलेश के ही फैक्ट्री में काम करने वाले धनंजय सिंह ने बताया कि पहले वे हरियाणा के पानीपत में काम करते थे. लेकिन मूलरूप से फतेहपुर के होने के चलते वाराणसी से घर आना जाना आसान हो जाता है. इसलिए वे पानीपत से वाराणसी आकर मशीनों की देखभाल करने लगे और उनके साथ कुछ और भी मजदूर आ गए. जिससे उनकी काफी न केवल बचत हो रही है, बल्कि माली स्थिति भी सुधरी है और बचत किया हुआ रुपया घर के काम आ रहा है. ODOP के लिए वे सरकार का दिल से धन्यवाद देते है.

ODOP के बारे में जानकारी देते हुए वाराणसी के जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उद्योग उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जो न केवल राज्य, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही है. इस योजना के अंतर्गत वाराणसी से कुल तीन उत्पाद लिए गए है. पहला है वाराणसी साड़ी, दूसरा है गुलाबी मीनाकारी और तीसरा है लकड़ी का खिलौना.

परंपरागत कारीगर, आर्टिजन और उद्यमी जो वर्षों से इस काम को करते चले आ रहे है. उनको वित्तीय समावेश में आगे बढ़ाने के लिए ये कार्यक्रम लाया गया है. इसके तहत सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है. पहली सुविधा के तहत सब्सिडीयुक्त लोग दिया जा रहा है, जिसके तहत 25% तक की सब्सिडी दी जा रही है. 

अब तक 820 साड़ी व्यवसायियों को ODOP मार्जिन मनी के तहत लोन दिया गया है. अब तक कुल 31 करोड़ तक की सब्सिडी तो 126 करोड़ का लोन दिया गया है. दूसरा घटक ट्रेनिंग का है. पहले से काम कर रहे कारीगरों को 10 दिनों की ट्रेनिंग और टूल किट दिया जाता है. जिसके तहत 2500 लोगों को ट्रेनिंग देकर लोन दिया गया और फिर आगे सीएम योजना के तहत लोन देकर आगे बढाने का काम किया जा रहा है. 

तीसरा घटक ODOP-CFC है. जिसमें कुल चार तरह के काम होते है- डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और डाइंग एवं फिनिशिंग है. ये सारा काम बाजार रेट से कम दर पर उपलब्ध कराया जाता है और बुनकर अपना काम करा सकते है. इसको 90% का सरकार ने अनुदान भी दिया है. 

चौथा घटक है ODOP-MDA. इसके तहत प्रोडेक्ट का मार्किंटिग का जाती है और 75% तक का स्टॉल का किराया सरकार देती है. एक आदमी के आने जाने का किराया भी सरकार देती और माल ढुलाई का खर्चा भी सरकार देती है. अब तक इसके तहत 3-4 हजार लोगों को सरकार ने देश-विदेश में और प्रदेश में ये सुविधा दी जा रही है. उन्होंने आगे बताया कि बनारसी साड़ी का एक्पोर्ट लगातार बढ़ा है.

 
गल्फ वार के चलते थोड़ी दिक्कत जरूर आई है. लेकिन जब से ये योजना शुरू हुई है, तब से 5 गुना एक्सपोर्ट बढ़ा है. इसमें इंटरस्टेट एक्सपोर्ट भी शामिल है. उन्होंने आगे बताया कि हमारा ध्येय है कि कारीगरों को उद्यमी, स्माल उद्यमी को माइक्रो उद्यमी बनाए, माइक्रो उद्यमी को मीडियम उद्यमी और मीडियम उद्यमी को बड़ा उद्यमी बनाए. इनको ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट में जोड़कर अपना पैसा मजबूत करे.

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