EPFO New Rule: EPF Scheme 2026.. क्या अब सैलरी से कटेगा ज्यादा पैसा? रकम निकालना तो नहीं होगा मुश्किल.. जानें सबकुछ

सरकार ने EPF Scheme, 1952 की जगह EPF Scheme, 2026 को लागू कर दिया है. इसका एक बड़ा फायदा है कि अगर कोई कर्मचारी 12 प्रतिशत से ज्यादा पीएफ में जमा करना चाहे तो वह इस एक्स्ट्रा रकम को कर सकेगा.

EPFO New Rule
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:50 PM IST

अगर आप सैलरीड पर्सन हैं, और आपकी सैलरी में से भी पीएफ कटता है, तो इस खबर को पढ़ना आपके लिए काफी जरूरी है. दरअसल केंद्र ने EPF Scheme, 1952 की जगह EPF Scheme, 2026 लागू कर दी है. हालांकि स्कीम के बदलने से कॉन्ट्रीब्यूशन रेट में कोई कमी नहीं आई है. लेकिन इस नई स्कीम से यह तय हो गया है कि कितना कॉन्ट्रीब्यूशन जरूरी है और कितना एक्स्ट्रा.

नई स्कीम के तहत जो नियम हैं, वह ईपीएफ को ज्यादा सरल, डिजिटल और करीब 8 करोड़ सब्क्राइबर के लिए आसान कर दिया है. नई स्कीम 29 जून से प्रभावी हो चुकी है, जो 1952 वाली स्कीम, जो लंबे समय से चली आ रही है उसे बदला है.

कॉन्ट्रीब्यूशन के नियम में क्या हुआ बदलाव?

सबसे बड़ा बदलवा जो ये नई स्कीम तय कर रही है, वो है कर्मचारी का कॉन्ट्रीब्यूशन. नई स्कीम साफ कहती है कि 15000 का वेतन पाने वाले हर कर्मचारी के लिए 12% की कटौती बतौर पीएफ रकम तो तय है ही. यानी कंपनियों को नियमानुसार इस रूल को तो फॉलो करना ही होगा.

पहले पीएफ कटौती के लिए जो वेतन सीमा तय होती थी वह कंपनी आधारित हाई सैलरी या म्युचूअल एग्रीमेंट्स पर होती थी. लेकिन नए नियम ने तय कर दिया है कि जरूरी और वैकल्पिक कॉन्ट्रीब्यूशन क्या होगा.

15000 वेतन का 12 प्रतिशत यानी 1800 रुपए तो आपके भविष्य के लिए सेव होता ही है. लेकिन अगर इससे ऊपर भी कोई ज्यादा पैसा जमा करता है तो उसे एक्स्ट्रा कॉन्ट्रीब्यूशन के तौर पर देखा जाएगा. हालांकि एम्प्लॉयर भी एम्प्लॉय के अनुसार ही एक्स्ट्रा कॉन्ट्रीब्यूट करें ऐसा जरूरी नहीं है.

पीएफ निकासी के बदले नियम

जहां पीएफ से पैसा निकालने के लिए पहले फॉर्म में 13 ऑप्शन होते थें. अब उन्हें घटाकर 13 से 3 तक दिया गया है. इसका मकसद है पैसा निकालने की प्रोसेस को आसान बनाना.

निकासी के लिए 3 कैटेगरी रखी गई हैं. पहले है एसेंशियल, जिसमें बीमारी, पढ़ाई और शादी जैसे खर्च है. दूसरी कैटेगरी है हाउसिंग नीड, जिसमें खरीद, कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग से जुड़े खर्च हैं. तीसरी कैटेगरी है स्पेशल कैटेगरी, इसमें खासतौर से एमरजेंसी खर्च शामिल हैं.

पैसे निकालने की बात करें तो कैटेगरी के अनुसार एलीजिबिलिटी की 100 प्रतिशत राशि की निकासी हो जा सकती है, लेकिन खाते में कुछ पीएफ का 25 प्रतिशत हिस्सा रहना चाहिए.

नई ईपीएफ योजना की एक और प्रमुख विशेषता डिजिटल सेवाओं पर इसका अधिक जोर है. EPF Scheme 2026 इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग, ऑनलाइन पीएफ क्लेम सेटलमेंट, ई-पासबुक और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) एकीकरण को प्रोत्साहित करती है. इसका उद्देश्य ईपीएफ सेवाओं को तेज, अधिक पारदर्शी और कर्मचारियों को लंबी कागजी कार्रवाई से मुक्ति दिलाना है. 

 

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