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Pink Tax On Women Product: क्यों पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के प्रोडक्ट होते महंगे.. क्या होता है 'पिंक टैक्स', किस तरह से वसूला जाता है यह

कई बार एक समान प्रोडक्ट होने पर भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के प्रोडक्ट की कीमत को ज्यादा रखा जाता है. लेकिन इसके पीछे के वजह किसी को मालूम नहीं है.

Pink Tax
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

अगर आप किसी दुकान से रेजर खरीदने जाएं, तो अक्सर एक अजीब फर्क देखने को मिलता है. पुरुषों के लिए मिलने वाला रेजर करीब 40 रुपए में मिल जाता है, लेकिन महिलाओं के लिए बनाया गया रेजर लगभग 100 रुपए तक का होता है. इसी तरह महिलाओं के लिए लिप बाम करीब 250 रुपए में बिकती है, जबकि पुरुषों के लिए वही उत्पाद लगभग 160 रुपए में उपलब्ध हो जाता है. यही नहीं, सैलून में भी हेयर कट करवाने पर महिलाओं से पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा पैसे लिए जाते हैं. अब सवाल यह उठता है कि जब कई बार प्रोडक्ट लगभग समान होते हैं, तो महिलाओं से ज्यादा कीमत क्यों वसूली जाती है? इस स्थिति को 'पिंक टैक्स कहा जाता है.

क्या होता है पिंक टैक्स?
पिंक टैक्स एक ऐसा छिपा हुआ एक्स्ट्रा खर्च है, जो महिलाओं के लिए बनाए या उनके नाम से मार्केट किए जाने वाले प्रोडक्ट्स और सेवाओं पर लगाया जाता है. खास बात यह है कि यह कोई सरकारी टैक्स नहीं है और न ही इसके लिए सरकार की कोई आधिकारिक नीति या नियम होते हैं. दरअसल, कंपनियां महिलाओं के लिए बनाए गए प्रोडक्ट्स की कीमतें पुरुषों की तुलना में ज्यादा तय करती हैं. यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में देखी जाती है.

रिसर्च में भी सामने आया कीमतों का फर्क
कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में भी यह सामने आया है कि महिलाओं के उत्पाद अक्सर महंगे होते हैं. न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ कंज़्यूमर अफेयर्स की एक स्टडी के मुताबिक, महिलाओं के लिए मार्केट किए गए प्रोडक्ट्स की कीमतें पुरुषों के उत्पादों से औसतन 7 प्रतिशत ज्यादा पाई गईं. वहीं पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में यह अंतर करीब 13 प्रतिशत तक देखा गया. 

ब्रिटेन में की गई एक जांच में यह भी सामने आया कि महिलाओं का डिओडोरेंट पुरुषों की तुलना में लगभग 8.9 प्रतिशत महंगा था, जबकि महिलाओं के फेस मॉइस्चराइजर की कीमत पुरुषों के मुकाबले 34.28 प्रतिशत ज्यादा थी.

महिलाओं पर बढ़ता बोझ
पिंक टैक्स केवल कीमतों का मामूली अंतर नहीं है, बल्कि यह महिलाओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी डालता है. भारत में यह समस्या और भी स्पष्ट हो जाती है, क्योंकि यहां महिलाओं को एक तरफ ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है और दूसरी ओर उन्हें पुरुषों की तुलना में कई बार कम वेतन मिलता है. ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2022 के अनुसार भारत में पुरुषों और महिलाओं के बीच औसतन 19 प्रतिशत का वेतन अंतर है, जबकि दोनों समान काम करते हैं. ऐसे में ज्यादा खर्च और कम आय का यह संतुलन महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डालता है और उनकी क्रय शक्ति को भी प्रभावित करता है.

पिंक टैक्स शब्द की शुरुआत कैसे हुई
महिलाओं से ज्यादा कीमत वसूलने की यह प्रवृत्ति काफी समय से मौजूद है, लेकिन 'पिंक टैक्स' शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1994 में कैलिफोर्निया में किया गया था. उस समय यह मुद्दा तब सामने आया जब यह महसूस किया गया कि कई शहरों में कंपनियां लगातार महिलाओं से पुरुषों की तुलना में ज्यादा कीमत वसूल रही हैं. इसके बाद जेंडर के आधार पर होने वाले इस मूल्य भेदभाव को औपचारिक रूप से पहचान मिली.

 

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