जब भी किसी ऐसे देश का नाम सुनने को मिलता है जहां लोगों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता, तो यह बात काफी अट्रैक्टिव लगती है. आमतौर पर हर नौकरीपेशा व्यक्ति चाहता है कि उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा उसके पास ही रहे. यही वजह है कि दुनिया की कुछ जगह जहां जीरो इनकम टैक्स होता है, वह निवेशकों और अमीर लोगों के लिए पसंदीदा ठिकाने बन गए हैं. लेकिन सिर्फ इनकम टैक्स न होने का मतलब यह नहीं है कि वहां रहने का खर्च भी कम होगा.
कौन सा देश नहीं लेता इनकम टैक्स?
दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां लोगों की सैलरी पर टैक्स नहीं लगाया जाता. इनमें संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान और सऊदी अरब शामिल हैं. इन देशों की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक तेल और गैस से होने वाली आय पर आधारित रही है.
इसके अलावा बहामास, केमैन आइलैंड्स, बरमूडा और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स जैसे कैरेबियन देश भी इनकम टैक्स नहीं लेते. यूरोप में मोनाको ऐसा देश है जहां निवासियों को न तो इनकम टैक्स देना पड़ता है और न ही कैपिटल गेन टैक्स. वहीं ब्रुनेई और वनुआतु भी उन देशों में शामिल हैं जहां व्यक्तिगत आय पर टैक्स नहीं लगाया जाता.
बिना इनकम टैक्स कैसे चलती सरकार?
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब सरकार नागरिकों से इनकम टैक्स नहीं लेती, तो उसका खर्च कैसे चलता है. दरअसल, इन देशों के पास आय के दूसरे मजबूत सोर्स होते हैं. खाड़ी देशों को तेल और गैस से बड़ी कमाई होती है. वहीं कई कैरेबियन देश पर्यटन, विदेशी निवेश और वित्तीय सेवाओं से अच्छा रेवेन्यू जुटाते हैं.
कुछ देश एक्सपोर्ट शुल्क, लाइसेंस फीस और विशेष निवेश योजनाओं के जरिए भी अपनी आमदनी बढ़ाते हैं. हाल के वर्षों में कई देशों ने वैट (VAT) और कॉर्पोरेट टैक्स जैसे विकल्प भी अपनाने शुरू किए हैं.
टैक्स नहीं फिर भी खर्च ज्यादा
कई लोग यह मान लेते हैं कि इनकम टैक्स नहीं है तो जीवन भी सस्ता होगा, लेकिन हकीकत इससे अलग है. इन देशों में रहने का खर्च कई बार बेहद ज्यादा होता है. जैसे मोनाको दुनिया के सबसे महंगे शहरों में गिना जाता है, जहां घर खरीदना या किराए पर लेना हर किसी के बस की बात नहीं है.
इसके अलावा खरीदारी करते समय वैट, कस्टम ड्यूटी और अन्य टैक्स भी चुकाने पड़ते हैं. यानी भले ही आपकी सैलरी पर टैक्स न लगे, लेकिन रोजमर्रा के खर्चों में आपको एक्स्ट्रा पे करना पड़ सकता है.