गर्मी की झुलसाती दोपहर हो, मूसलाधार बारिश हो या कड़ाके की ठंड, राजू कुमार ने इसी रेल गुमटी पर अपनी ड्यूटी निभाई. रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी के रूप में कार्यरत राजू ने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया. नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार 70वीं बीपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए डीएसपी पद पर चयनित हो गए. समस्तीपुर निवासी राजू कुमार के लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था. जब वह महज 12 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. हालात ऐसे नहीं थे कि वे बड़े शहरों में जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें. लेकिन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को मजबूत बनाया.
नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई
राजू ने अपनी तैयारी के लिए उपलब्ध हर साधन का इस्तेमाल किया. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई जारी रखी. किताबों से लगातार ज्ञान हासिल किया और वीडियो के जरिए विशेषज्ञ शिक्षकों से सीखते रहे. सीमित संसाधनों में भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा.
दोस्तों के प्रोत्साहन ने बदली दिशा
राजू कुमार ने दोस्तों के प्रोत्साहन पर बीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की. उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ तैयारी की और पहली ही कोशिश में सफलता हासिल कर ली. यह उपलब्धि उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की सबसे बड़ी पहचान बन गई. राजू की सफलता का एक और पहलू लोगों को प्रभावित कर रहा है. डीएसपी पद पर चयनित होने के बाद भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा. परिणाम आने के अगले ही दिन वह अपनी ड्यूटी पर पहुंचे. गुमटी पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा रहा, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी.
मां को दिया सफलता का श्रेय
राजू अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हैं. उनका कहना है कि हर कठिन समय में उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे राजू ने साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है. क्सौल के एक साधारण गुमटी मैन से डीएसपी बनने तक का राजू कुमार का सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है. जो लोग परिस्थितियों को अपनी कमजोरी मान लेते हैं, उनके लिए राजू कुमार की सफलता एक मजबूत जवाब है.
(रिपोर्ट- गणेश शंकर)
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