CBSE Result 2023: मजदूर की बेटी ने 12वीं में हासिल किए 94 प्रतिशत अंक, मुश्किलों को पार कर लिखी सफलता की कहानी

शिवानी वर्मा के पिता श्रमिक (पुताई मजदूर) हैं तो मां घरेलू सहायिका (domestic help) हैं. बचपन से ही पढ़ने में तेज शिवानी का परिवार उन्नाव का रहने वाला है लेकिन रोज़गार की तलाश में शिवानी के पिता को अपने परिवार के साथ लखनऊ आना पड़ा.

शिवानी वर्मा
शिल्पी सेन
  • लखनऊ ,
  • 12 मई 2023,
  • अपडेटेड 11:38 PM IST

'मंज़िलें उनको ही मिलती है जिनके सपनों में जान होती है.....!!' ये बात लखनऊ की शिवानी वर्मा के लिए कही जा सकती है।शिवानी ने तमाम दुश्वारियों और कमज़ोर आर्थिक स्थिति के बावजूद ऐसी सफलता हासिल की है जो दूसरों को प्रेरणा दे सकती है. शिवानी ने शुक्रवार को घोषित हुई सीबीएसई(CBSE) बोर्ड की परीक्षा में 94.4 प्रतिशत मार्क्स ला कर अपने माता पिता और शिक्षकों का नाम रोशन किया है तो अपने सपनों को भी नई उड़ान दी है.


पिता करते हैं पुताई का काम, मां घरेलू सहायिका
शिवानी वर्मा के पिता श्रमिक (पुताई मजदूर) हैं तो मां घरेलू सहायिका (domestic help) हैं. बचपन से ही पढ़ने में तेज शिवानी का परिवार उन्नाव का रहने वाला है लेकिन रोज़गार की तलाश में शिवानी के पिता को अपने परिवार के साथ लखनऊ आना पड़ा. नन्ही शिवानी की पढ़ाई उसी समय छूट जाती पर लखनऊ में 'प्रेरणा' स्कूल चलाकर वंचित बच्चों को पढ़ाई के लिए मदद करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद उर्वशी साहनी के सम्पर्क में शिवानी का परिवार आ गया. बस यहीं से होनहार शिवानी के जीवन में नया मोड़ आ गया.

शिवानी की मेधा से प्रभावित होकर उर्वशी साहनी ने उसको अपने प्रेरणा स्कूल में एडमिशन दे दिया. क्लास में सभी बच्चों को पीछे छोड़कर शिवानी ने महज़ दो साल में ही दूसरे स्कूल में अपने लिए जगह बना ली. स्टडी हॉल एजुकेशन फाउंडेशन (SHEF) की सीईओ उर्वशी साहनी ने अपने स्कूल स्टडी हॉल में शिवानी का एडमिशन न सिर्फ कराया बल्कि उसकी पढ़ाई और फ़ीस का भी खर्चा उठाया लेकिन चुनौतियां अभी बाकी थीं. स्कूल यूनिफॉर्म और किताबों की जरूरतें हर कक्षा के साथ बढ़ती ही चली गईं. शिवानी याद करती हुई कहती हैं 'हम लोग 'मैम' (जिनके घर में शिवानी की माँ सहायिका का काम करती हैं) के घर में रहते थे. उन्होंने एक कमरा हमको रहने के लिए दिया था. मुझे पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो इसलिए मम्मी पापा और भाई रात में कई बार कमरे से बाहर लॉन में ही सो जाते थे. जिससे मैं सुकून से पढ़ सकूं.' शिवानी ने हर बाधा को पार करते हुए हाईस्कूल में भी बेस्ट ऑफ फाइव में 95% नम्बर हासिल किया. शिवानी कहती हैं 'मुझे खुशी है कि मैंने 94% हासिल किया है लेकिन मैं हिस्ट्री और एकनॉमिक्स पर बेहतर कर सकती थी.'


माता पिता के त्याग और उर्वशी आंटी के सहयोग से जारी रखी पढ़ाई
अपनी मुश्किलों की बात करते हुए शिवानी अपनी मां माधुरी देवी के योगदान का ज़िक्र ख़ास तौर पर करती हैं. शिवानी कहती हैं 'मां दूसरों के घर में भी काम करतीं और घर का भी सारा काम करतीं लेकिन मुझसे कभी भी घर का कोई काम नहीं कराती थीं जिससे मैं अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगा पाऊं.' शिवानी अपनी सफलता का श्रेय सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद उर्वशी साहनी को भी देती हैं जिनके स्कूल में शिवानी की बारहवीं तक की मुफ्त शिक्षा हुई. शिवानी कहती है 'अगर उर्वशी आंटी न होतीं तो इतनी फीस दे पाना मेरे मम्मी पापा के लिए सम्भव न होता.' शिवानी की पूरी फ़ीस स्टडी हॉल स्कूल ने माफ कर दी.

कोविड के संकटकाल में फिर से शिवानी के परिवार के सामने मुश्किल आई जब परिवार को उन्नाव में अपने पैतृक गाँव में लौटना पड़ा. सारी जमापूँजी खर्च हो गई क्योंकि रोजाना दिहाड़ी (daily wage) पर काम करने वाले शिवानी के पिता बाल सिंह के पास कोई काम नहीं रहा. कोरोना का संकट काल खत्म होते ही शिवानी को लेकर उसके माता-पिता लखनऊ वापस आ गए, जिससे उसकी पढ़ाई जारी रह सके. शिवानी कहती है कि उसकी सफलता का श्रेय उसके माता पिता के त्याग और उसकी लगातार मदद करने वाली उर्वशी आंटी को है. स्टडी हॉल की प्रिन्सिपल मीनाक्षी बहादुर कहती हैं' शिवानी स्कूल की शाइनिंग स्टार हैं. सभी बच्चों को जिस तरह समान अधिकार मिलने चाहिए वो उसकी प्रत्यक्ष उदाहरण है. स्टडी हॉल इसी के लिए काम करता है.'

अपने हम उम्र और बच्चों से अलग शिवानी एक साइकोलॉजिस्ट (Psychologist) बनना चाहती है. शिवानी का कहना है कि वो लोगों के मन को समझती हैं और लोगों की इस तरह से मदद करना चाहती है. इसके लिए शिवानी लखनऊ विश्वविद्यालय या शहर के नेशनल कॉलेज में साइकोलॉजी में एडमिशन लेना चाहती है. फिलहाल शिवानी को आगे पढ़ाई के लिए भी स्कालर्शिप मिलेगी. उसके लिए शिवानी का चयन पहले ही हो चुका है.


 

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