यूपीएससी में सफलता का दावा करने वाले शख्स की सच्चाई सामने आ गई है. ये वाक्या बिहार के शेखपुरा है. सच सामने आने के बाद परीक्षा में सफलता का झूठा दावा करने वाला युवक भूमिगत हो गया है. युवक को शेखपुरा के पूर्व विधायक ने सम्मानित भी किया था. लेकिन अब सच सामने आ गया है.
रंजीत कुमार का झूठ आया सामने-
माहुली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव निवासी अर्जुन यादव का पुत्र रंजीत कुमार ने हाल ही में जारी यूपीएससी परीक्षा परिणाम में खुद को 440वीं रैंक प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी बताकर प्रचारित किया था. इस खबर के फैलते ही इलाके में उसे कई जगहों पर सम्मानित किया गया। बताया जाता है कि पूर्व विधायक विजय यादव, स्थानीय मुखिया तथा माहुली थाना की पुलिस ने भी युवक को यूपीएससी में सफलता मिलने की सूचना पर सम्मानित किया. इस दौरान कार्यक्रम आयोजित कर उस पर हजारों रुपये खर्च किए गए. हालांकि सोमवार की शाम जब परिणाम की पड़ताल की गई तो पता चला कि 440वीं रैंक कर्नाटक राज्य के एक अभ्यर्थी रंजीथ को मिली है, जबकि शेखपुरा का रंजीत कुमार उसी सफलता को अपना बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था.
सच सामने आने के बाद से गायब है युवक-
पूर्व मुखिया सरफराज आलम ने बताया कि फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद रंजीत कुमार घर छोड़कर फरार हो गया है. माहुली थाना के थानाध्यक्ष ने बताया कि सूचना के आधार पर युवक को थाना बुलाकर सम्मानित भी किया गया था, लेकिन जब मामला संदिग्ध लगा तो उसे प्रवेश पत्र के साथ थाना आने के लिए कहा गया. इसके बाद से उसका मोबाइल बंद है और वह भूमिगत हो गया है. इसी तरह का एक मामला पहले भी सामने आ चुका है. बिहार में आकांक्षा सिंह नाम की अभ्यर्थी ने भी यूपीएससी में सफलता का दावा किया था, जबकि वास्तविक रूप से गाजीपुर की आकांक्षा सिंह को 301वीं रैंक मिली थी.
सोमवार को यूपीएससी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया था कि असली परिणाम गाजीपुर की आकांक्षा सिंह का है. अब शेखपुरा का यह नया मामला सामने आने के बाद लोगों में काफी चर्चा है. जानकारी मिल रही है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद युवक दिल्ली की ओर भाग गया है और लोग उसकी तलाश कर रहे हैं.
(अरुण कुमार की रिपोर्ट)
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