जेल की कहानी भी अजीब होती है. जेल जाने वाले नेता कैदी जेल में रहकर बाहर चुनाव जीत जाते है तो कई कैदी जेल में बंद रहकर परीक्षा भी पास कर लेते है. कुछ ऐसी ही कहानी सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल की है, जहाँ जेल में बंद 11 कैदियों ने बोर्ड की परीक्षा पास की है.
100 फीसदी रहा जेल का रिजल्ट-
सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो जेल की सलाखें भी किसी के सपनों को कैद नहीं कर सकतीं. इस जेल में अलग-अलग गुनाहों में बंद 11 कैदियों ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया था और सभी 11 कैदी सफल होकर एक नई मिसाल बन गए हैं. इस जेल का रिजल्ट 100 फीसदी रहा है.
रोहित को मिली है हत्याकांड में उम्रकैद की सजा-
लाजपोर सेंट्रल जेल से सामने आई यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, सुधार और नई जिंदगी की शुरुआत की कहानी है. ये वही लोग हैं, जिन्होंने कभी गुनाह की राह चुनी थी. लेकिन अब शिक्षा के जरिए अपनी जिंदगी को नई दिशा देने में जुटे हैं. हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रोहित रतिराम यादव से एक बड़ी गलती हो गई, जिसकी सजा वह आज भी भुगत रहे हैं. लेकिन जेल में बिताए समय ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है. उन्होंने 2024 में 10वीं की परीक्षा पास की थी और अब 12वीं में भी सफलता हासिल की है. रोहित की जेल में चल रही पढ़ाई ने उनकी सोच को बदल दी है और अब वह भविष्य में कभी गलती नहीं दोहराना चाहते हैं.
कई सालों से जेल में बंद हैं ये कैदी-
एनडीपीएस केस में 20 साल की सजा काट रहे सरफराज इकबाल पटेल को अपनी गलती का एहसास हुआ. वो पिछले 7 सालों से जेल में हैं. उन्होंने खुद को सुधारने का फैसला लिया और जेल में स्कूल ज्वॉइन किया. सरफराज को यहां के शिक्षक और प्रशासन लगातार उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. उनकी जिंदगी बहुत कीमती है और वह सजा पूरी होने के बाद एक अच्छे इंसान के रूप में समाज में लौटना चाहते हैं. साथ ही यह भी चाहते हैं कि उनके कर्मों का असर उनके परिवार, पत्नी और बच्चों पर न पड़े. एक अन्य कैदी साहिल सुरेश पटेल, जो हत्या के प्रयास के मामले में 7 साल की सजा काट रहे हैं और पिछले 2 वर्षों से जेल में हैं. उन्होंने भी 12वीं की परीक्षा पास की है. साहिल का कहना है कि जेल प्रशासन उन्हें अपराधी की नजर से नहीं देखता, बल्कि उन्हें सुधारने की कोशिश करता है. यही सकारात्मक माहौल उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है.
जेल में शिक्षा सुधार का बड़ा जरिया-
इन कहानियों के बीच एक बात साफ है कि जेल के भीतर शिक्षा अब सुधार का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है. यहां कैदियों के लिए स्कूल चलाया जा रहा है, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की भी सीख दी जाती है. यही वजह है कि जो लोग कभी अपराध की दुनिया में भटक गए थे, वे आज शिक्षा के जरिए एक नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
(संजय सिंह राठौड़ की रिपोर्ट)
ये भी पढ़ें: