कोटा में रहकर सफलता की कहानी लिखने वाले विद्यार्थियों के पीछे केवल उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि माता-पिता का त्याग और शिक्षकों का मार्गदर्शन भी होता है. इस बार जेईई-एडवांस्ड में सफलता की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें बेटे के साथ उसकी मां भी पढ़ाई करती नजर आईं. बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार की सफलता में उनकी मां गुंजा का योगदान किसी सहपाठी से कम नहीं रहा. बेटे को आईआईटी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने ऑनलाइन क्लास देखीं, नोट्स तैयार किए और कठिन समय में उसका हौसला बनाए रखा.
बीमारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, मां ने संभाली पढ़ाई
गुंजन कुमार ने दो साल तक कोटा में रहकर एक निजी कोचिंग संस्थान से जेईई की तैयारी की. परीक्षा से ठीक पहले उन्हें न्यूमोथोरेक्स (फेफड़ा कोलैप्स होना) की गंभीर समस्या हो गई. इस वजह से वह करीब तीन महीने तक बेड रेस्ट पर रहे और नियमित कक्षाएं भी अटेंड नहीं कर सके. ऐसे मुश्किल समय में उनकी मां गुंजा ने मोर्चा संभाला. गुंजा गृहिणी हैं और उन्होंने बीएड किया हुआ है. वह बेटे के साथ कोटा में ही रह रही थीं. उन्होंने ऑनलाइन क्लासेज देखीं, उनके नोट्स तैयार किए और बाद में उन्हीं नोट्स की मदद से गुंजन ने अपनी पढ़ाई जारी रखी.
कमजोर आंखों के बावजूद नहीं छोड़ा सपना
गुंजन की आंखों की रोशनी भी काफी कमजोर है. उनकी आई-साइट 70 प्रतिशत से अधिक कमजोर है और वह 9.5 नंबर का चश्मा पहनते हैं. इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया. उन्होंने जेईई मेन में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल किए. वहीं, जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी-ओबीसी कैटेगरी में 50वीं रैंक और कॉमन पीडब्ल्यूडी कैटेगरी में 120वीं रैंक प्राप्त की. अब वह आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस (CS) ब्रांच में दाखिला लेकर अपना सपना पूरा करने जा रहे हैं.
गुंजन के पिता राजनारायण प्रसाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) में इंजीनियर हैं. वहीं, उनका छोटा भाई भी फिलहाल कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा है.
गुंजन बोले- परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की नहीं, हौसले की भी होती है
रिजल्ट आने के बाद गुंजन ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा हमारे पक्ष में नहीं होतीं. परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की नहीं, बल्कि हौसले की भी होती है. उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि कोटा में रहकर आईआईटी-जेईई की तैयारी करेंगे और पूरी मेहनत करेंगे. उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान मां ने जिस तरह साथ दिया, वह उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ. शिक्षकों के मार्गदर्शन और मां के सहयोग से ही वह यह सफलता हासिल कर सके. उनका मानना है कि विद्यार्थियों को हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
मां बोलीं- बेटे का सपना ही मेरा सपना था
गुंजन की मां गुंजा ने बताया कि बेटे का सपना ही उनका सपना बन गया था. जब गुंजन बीमार हुआ तो वह भी चिंतित हुईं, लेकिन हार नहीं मानी. उन्होंने बेटे के साथ बैठकर ऑनलाइन क्लासेज देखीं और खुद नोट्स तैयार किए. बाद में जब वही नोट्स गुंजन की पढ़ाई में काम आए, तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी हुई.
कोटा सिर्फ पढ़ाई नहीं, आत्मविश्वास भी सिखाता है
एलन करियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि कोटा केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र है. यह शहर सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं सिखाता, बल्कि चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास भी देता है. उनके अनुसार, गुंजन की कहानी विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए प्रेरणादायक है.
इसी वजह से चुना था कोटा
कमजोर आंखों के बावजूद गुंजन के सपने हमेशा बड़े रहे. वह आईआईटी में पढ़ना चाहते थे. उन्होंने 10वीं में 82.5 प्रतिशत और 12वीं में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. कोटा आने से पहले उन्होंने इंटरनेट पर जेईई की तैयारी के लिए सबसे बेहतर कोचिंग की जानकारी खोजी. इसी दौरान उन्होंने वर्ष 2021 के जेईई मेन और एडवांस्ड ऑल इंडिया टॉपर तथा एलन के छात्र मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा. उनकी सफलता से प्रेरित होकर गुंजन ने भी कोटा जाने का फैसला किया. उन्होंने अपने माता-पिता से कोटा भेजने की जिद की. बेटे की लगन देखकर परिवार ने पूरा साथ दिया और वर्ष 2023 में उनका दाखिला एलन करियर इंस्टीट्यूट में करा दिया गया.
अक्टूबर में आई सबसे बड़ी मुश्किल
कोटा आने के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन परीक्षा से पहले जिंदगी ने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी. 5 अक्टूबर 2025 को उन्होंने संस्थान में रूटीन टेस्ट दिया. अगले दिन उनके सीने में तेज दर्द शुरू हो गया. डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि अत्यधिक भारी सामान उठाने के कारण बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और वह कोलैप्स हो गया. न्यूमोथोरेक्स की वजह से गुंजन करीब तीन महीने तक बेड रेस्ट पर रहे. हालांकि, इस कठिन दौर में मां, परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें टूटने नहीं दिया और आखिरकार उन्होंने अपने आईआईटी के सपने को सच कर दिखाया.
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