झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का 14वें दिन भी जारी है. सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई. लेकिन किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है. इस बीच जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन में शामिल छात्रों ने अपना दर्द बताया. कोई छात्र 20 साल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है और पेपर लीक की वजह से परेशान है तो किसी का कहना है कि फॉर्म भरते ही फोन आने लगते हैं कि पैसे दे दो, नौकरी लगवा दूंगा. चलिए आपको प्रदर्शन में शामिल छात्रों का दर्द बताते हैं.
'मेरी पूरी जवानी पेपर लीक से बर्बाद हो गई'
प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने बताया कि मेरा नाम राहुल क्रांति है. राज्य का भविष्य का सौदा हो रहा है. पैसे से तौला जा रहा है उनका भविष्य. हम 20 साल से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. मेरी उम्र 39 साल हो गई है. आगे मैंने हाई स्कूल का भी परीक्षा क्वालिफाई किया. सिलेक्टेड कैंडिडेट से 20 नंबर अधिक नंबर लाया. इसके बावजूद भी मेरी नियुक्ति नहीं हुई. सहायक का परीक्षा लिखा, उसमें भी क्वालिफाई हूँ, इसके बावजूद भी नियुक्ति नहीं होती है. जबकि 14,000 सीट खाली रहता है. परीक्षा एक बार हुआ तो रिजल्ट एक बार होना चाहिए. नियुक्ति एक बार होना चाहिए. लेकिन टुकड़ों-टुकड़ों में यहाँ सभी नियुक्तियाँ बढ़ती हैं. 5 बार नियुक्ति पत्र सहायकाचार्य का बांटा गया. लेकिन अभी तक एक पद पूरा नहीं हुआ.
राहुल ने बताया कि जेपीएससी मैंने लास्ट अटेम्प्ट इस बार मैंने ट्राई किया. लास्ट टाइम मेरा चांस था. और इसमें वो पेपर नहीं लीक हुआ. ओएमआर लीक हो गया तो क्रांति करना तो मेरा मजबूरी हो गया.
फॉर्म भरते हैं तो फोन आने लगते हैं- प्रदर्शनकारी
एक प्रदर्शनकारी बताया कि सिर्फ मेरे पास नहीं, बहुत सारे एस्पिरेंट जो टीचर की वैकेंसी फॉर्म भरते हैं या कोई और एग्जाम का फॉर्म भरते हैं तो हमें फोन आने लगते हैं. हमारा डाटा लीक होता है. मैं फॉर्म भरता हूँ तो मेरा डाटा सिर्फ कमीशन के पास होना चाहिए. लेकिन वो पब्लिक नहीं होना चाहिए.
'3-4 लाख दो, नौकरी लगवा दूंगा'
उन्होंने बताया कि बहुत सारे लोग कॉल करते हैं, जिनका प्रीलिम्स क्लियर हो जाता है और जो मेन्स लिखते हैं तो उनको कॉल आते हैं कि आप अगर इस सब्जेक्ट में अपना नंबर बढ़वाना चाहते हैं तो इस अकाउंट में पैसा डाल दीजिए. उन्होंने बताया कि 3-4 लाख रुपए मांगते हैं. अलग-अलग डिमांड होती है. सबसे बड़ा सवाल ये है कि डाटा लीक कहाँ से हो रहा है?
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