पिता चलाते हैं किराना की दुकान, बेटी ने लगातार तीसरी बार पास की BPSC की परीक्षा

मुजफ्फरपुर की जया लगातार तीसरी बार BPSC की परीक्षा पास की है. उनके पिता एक किराना की दुकान चलाते हैं. वर्तमान में जया सीतामढ़ी में समाज कल्याण विभाग में कार्यरत हैं. नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी. उनका कहना है कि पुलिस सेवा में चयन उनके लिए गर्व के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है.

Muzaffarpur News
मणि भूषण शर्मा
  • मुजफ्फरपुर,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

बिहार के मुजफ्फरपुर की जया ने साबित कर दिया है कि मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है. शहर के गोबरसही चौक की रहने वाली जया ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में लगातार 3 बार सफलता हासिल कर युवाओं के लिए एक नई मिसाल पेश की है. खास बात यह है कि उन्होंने 67वीं BPSC में रेवेन्यू ऑफिसर, 68वीं BPSC में असिस्टेंट डायरेक्टर (समाज कल्याण विभाग) और अब 70वीं BPSC में DSP (पुलिस उपाधीक्षक) पद हासिल किया है.

पिता चलाते हैं किराना स्टोर-
जया एक साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता सुनील कुमार किराना दुकान चलाते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी. जया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर के प्रभात तारा स्कूल और जैतपुर पब्लिक स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली से फिजिक्स ऑनर्स में स्नातक किया और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से उच्च शिक्षा प्राप्त की. वर्ष 2022 में उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) भी हासिल की.

तीसरी बार पास की BPSC परीक्षा-
अकादमिक क्षेत्र में बेहतर अवसर होने के बावजूद जया ने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया. उन्होंने UPSC और BPSC की तैयारी शुरू की और लगातार सफलता हासिल करती चली गईं. पहले प्रयास में रेवेन्यू ऑफिसर, दूसरे प्रयास में समाज कल्याण विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर और तीसरे प्रयास में DSP बनकर उन्होंने अपनी मेहनत का लोहा मनवा दिया.

समाज कल्याण विभाग में कार्यरत हैं जया-
वर्तमान में जया सीतामढ़ी में समाज कल्याण विभाग में कार्यरत हैं. नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी. उनका कहना है कि पुलिस सेवा में चयन उनके लिए गर्व के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है. अवसर मिलने पर वह महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में विशेष रूप से काम करना चाहती हैं.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए जया कहती हैं कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेनी चाहिए. उनका मानना है कि धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. जया की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे मुजफ्फरपुर के लिए गर्व की बात है.

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