दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक नीट 2026 का पेपर देशभर में बिकने की जानकारी सामने आई, लेकिन शुरुआती दौर में परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए और सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं थी.
8 मई की रात 8 बजे सेंट्रल आईबी से राजस्थान पुलिस को इस मामले की शिकायत मिली. इसके बाद रात 9 बजे जयपुर में सेंट्रल आईबी और एसओजी के अधिकारी पहुंचे. देर रात एसओजी आईजी अजयपाल लांबा और सेंट्रल आईबी की टीम सीकर पुलिस के साथ करीब 100 पुलिसकर्मियों को लेकर सीकर के पीपराली इलाके में जांच के लिए पहुंची. यहां हॉस्टलों में छात्रों के मोबाइल खंगाले गए और कोचिंग व कॉलेज के व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप की जांच शुरू की गई.
व्हाट्सएप और टेलीग्राम से मिला बड़ा सुराग
जांच के दौरान एजेंसियां हैरान रह गईं, जब कई व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में वही “गेस पेपर” मिला, जिससे नीट परीक्षा में सवाल पूछे गए थे. एनटीए को इस पूरे मामले की शिकायत एक पीजी हॉस्टल संचालक ने दी थी. केरल में एमबीबीएस कर रहे उसके बेटे ने यह गेस पेपर उसके पास भेजा था. इसके बाद एसओजी ने जांच आगे बढ़ाते हुए उस छात्र तक पहुंच बनाई, जिसने यह पेपर आगे भेजा था. इस कड़ी में करीब 100 छात्रों तक पहुंच बनाई गई.
पूछताछ में सामने आया बड़ा नाम
जांच के दौरान रात करीब 3 बजे पुलिस एक छात्र अमित मीणा तक पहुंची. पूछताछ जारी थी कि अचानक उसका फोन बजा. फोन उठाने पर सामने से रिषी नाम के व्यक्ति ने पैसे को लेकर बातचीत शुरू की और कहा कि अब तक पैसे नहीं दिए, और आगे भी पैसे कमाने का ऑफर दिया. इस बातचीत से एसओजी टीम चौंक गई. अमित मीणा ने बताया कि उसने रिषी से 5 लाख रुपये में पेपर लेकर आगे बेचा है. उसने यह भी बताया कि रिषी ने पहले भी 2025 में पेपर मिलने की बात कही थी, लेकिन तब उसे भरोसा नहीं हुआ था.
100 छात्रों तक फैला मामला, कई नाम उजागर
अमित मीणा की निशानदेही पर जांच आगे बढ़ी. सीकर एसओजी ने जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी रिषी के पिता दिनेश बिवाल के बारे में जानकारी जुटाई. जयपुर पुलिस ने सुबह 4 बजे दिनेश बिवाल को पकड़ा, जिसने अपने भाई मांगीलाल बिवाल का नाम बताया. मांगीलाल ने आगे अपने बेटे सवाईमाधोपुर से एमबीबीएस कर रहे विकास बिवाल का नाम लिया. विकास ने फिर गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार तक का लिंक बताया.
नेटवर्क की परतें खुलती गईं
मांगीलाल ने यह भी बताया कि उसने पिछले साल नासिक के शुभम खैरनार से पेपर लिया था और इस बार हरियाणा के शुभम यादव से जुड़ा था. जांच में धीरे-धीरे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं.
डर और कोचिंग प्रतिस्पर्धा से शुरू हुआ खुलासा
सीकर से शुरू हुआ यह मामला धीरे-धीरे कई शहरों तक फैल गया. एक छात्र ने अपने दोस्त को चुरू भेजा, जहां से पेपर केरल में एमबीबीएस कर रहे छात्र तक पहुंचा. वहां से यह मामला पीजी हॉस्टल संचालक तक पहुंचा. हॉस्टल संचालक ने लड़कियों को पेपर दिया, जिन्होंने परीक्षा के बाद बताया कि सवाल उसी पैटर्न से आए थे. इसके बाद यह बात सरकारी कर्मचारी तक पहुंची, जिसने इसे कोचिंग टीचर शशिकांत सुथार को दिखाया. टीचर ने कोचिंग मालिकों तक यह बात पहुंचाई, लेकिन मामला दबाने की कोशिश भी हुई. आखिरकार 7 मई को टीचर की तरफ से एनटीए को शिकायत भेजी गई, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी.
-शरत कुमार की रिपोर्ट