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Good News: दो सालों से 11 लर्निंग सेंटर चला रही हैं यह प्रोफेसर, 300 से ज्यादा बच्चों का संवरा जीवन

हैदराबाद की एक प्रोफेसर गरीब बच्चों के लिए मुफ्त में शिक्षण केंद्र चला रही है ताकि इन छात्रों का जीवन संवर जाए और उन्हें एक अच्छी जिंदगी मिले.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 19 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 2:45 PM IST

हमारे देश में ज्यादातर लोग आसपास की परेशानियों के बारे में बात तो बहुत करते हैं लेकिन इस परेशानियों को हल करने का बात बहुत कम लोग करते हैं. इन लोगों में से एक है हैदराबाद की प्रोफेसर सुजाता सुरेपल्ल, जो दलित महिला सामूहिक की संस्थापक हैं. सुजाता सातवाहन विश्वविद्यालय में प्रोफेस हैं, और पछले दो सालों से 11 शिक्षण केंद्र चला रही हैं. 

गरीब और पिछड़ी पृष्ठभूमि के लगभग 300 बच्चों को यहां पर शिक्षा दी जा रही है. शिक्षक इन छात्रों को बुनियादी भाषा, अंकगणित और विज्ञान पढ़ाते हैं. ये शुक्षक पिछड़े इलाकों से आने वाले युवा हैं जिन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की है. 

बच्चों ले किए है सुरक्षित स्थान 
इन केंद्रों पर बच्चों को  गणित, भाषा और कंप्यूटर कौशल में नियमित कक्षाएं मिलती हैं. इसके अतिरिक्त, गर्मियों के महीनों के दौरान कराटे, ड्राइंग, नृत्य, क्रिकेट और कैरम का आयोजन किया जाता है. प्रोफेसर सुजाता का कहना है कि ये मनोरंजक गतिविधियां न केवल बच्चों को संलग्न करती हैं बल्कि परिवारों के अपमानजनकऔर हिंसक परिवेश से दूर एक सुरक्षित स्थान भी देती हैं. 

शहर की सिंगरेनी कॉलोनी के निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से उन्हें यहां की दयनीय स्थिति का पता चला. यहां VAMBAY (वाल्मीकि अंबेडकर आवास योजना) के घरों के पास एक खाली जमीन के पास बड़ी मात्रा में कचरा जमा था. उन्होंने GHMC अधिकारियों से क्षेत्र को खाली करने का आग्रह किया, लेकिन उनके अनुरोधों को अनसुना कर दिया गया, जिसके कारण उन्हें अपनी जेब से प्रति माह `10,000 खर्च करने पड़े. ताकि इस जगह को कक्षा और खेल क्षेत्र के रूप में उपयोग किया जा सके. 

बच्चों को मिल रही हैं मुफ्त शिक्षा 
माता-पिता अपने बच्चों को कई कारणों से इन शिक्षण केंद्रों में नामांकित कराते हैं, जिनमें से एक प्रमुख कारक यह है कि कक्षाएं निःशुल्क हैं, इसके अलावा कि शिक्षक छात्रों पर विशेष ध्यान देते हैं, जो कि अधिकांश सरकारी स्कूलों में लगभग असंभव है. कई निवासियों को लगता है कि अपने बच्चों को सरकारी आवासीय स्कूलों - जिन्हें आम तौर पर गुरुकुल स्कूलों के नाम से जाना जाता है - में भेजने से उन्हें मदद मिलेगी और वे हिंसक माहौल से दूर रहेंगे.

दलित महिला कलेक्टिव ने, हैदराबाद अर्बन लैब की एक पहल, iLocal से जुटाए गए कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी फंड के साथ, सफाई अभियान, शिक्षण केंद्रों और क्षेत्र में पार्क जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को जोड़कर समुदाय की समस्याओं को कम करने के लिए कुछ प्रयास किए हैं. अब शिक्षण केंद्र में आने वाले बच्चों में बहुत सारे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. वे अपनी पढ़ाई में अच्छा कर रहे हैं और उन्हें अपने स्कूल के शिक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है.

 

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