UPSC Civil Services परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करना हर अभ्यर्थी का सपना होता है, ताकि वह IAS या IPS में से कोई एक पद पर तैनाती पा सके. हालांकि इनमें से भी ज्यादातर उम्मीदवारों की पहली पसंद IAS होती है, लेकिन ऐसे भी कई अभ्यर्थी हैं जो अच्छी रैंक आने के बाद भी IAS या IPS की जगह IFS यानी भारतीय विदेश सेवा में जाना पसंद करते हैं. इसकी वजह सिर्फ विदेशों में पोस्टिंग या फिर काम का तरीका नहीं, बल्कि सैलरी और मिलने वाली कई सुविधाएं भी हैं. अब सवाल यह है कि जब दोनों सेवाओं में चयन एक ही परीक्षा से होता है, तो कमाई के मामले में इतना अंतर कैसे आ जाता है? जाने-माने कंटेंट क्रिएटर और एंटरप्रिन्योर अंकुर वारिकू ने IAS और IFS का फासला अपने वीडियो में बताया है. उन्होंने दोनों की कमाई का पूरा गणित कुछ मिनटों की वीडियो में समझाया. हालांकि उनके मुताबिक शुरुआत में दोनों की बेसिक सैलरी एक जैसी रहती है, लेकिन सर्विस आगे बढ़ने के साथ IFS अधिकारी की कमाई में मिलने वाला फॉरेन अलाउंस दोनों के बीच में एक बड़ा अंतर पैदा करता है.
शुरुआती 1 से 5 साल में दोनों की बेसिक सैलरी बराबर
अंकुर वारिकू के मुताबिक IAS और IFS अधिकारियों की शुरुआत एक जैसी बेसिक सैलरी से होती है. करीब पांचवें साल तक आते-आते IAS अधिकारी DM बनते हैं, जबकि IFS अधिकारी किसी फॉरेन मिशन में थर्ड सेक्रेटरी के तौर पर तैनात हो जाते हैं. दोनों की इंडियन बेसिक सैलरी उस समय भी बराबर रहती है.
फर्क यहां से शुरू होता है. IFS अधिकारी को बेसिक सैलरी के अलावा डॉलर में फॉरेन अलाउंस मिलता है और यह टैक्स-फ्री होता है. अगर विकसित देशों में हो, जैसे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, या जापान में हो तो कमाई का अंतर और बढ़ जाता है. वारिकू के मुताबिक करीब 27 साल की उम्र तक IFS अधिकारी की कुल कमाई 3 से 4 लाख रुपये महीने तक पहुंच जाती है.
15 साल बाद IAS को क्या मिलता है?
करीब 15 साल की सर्विस के बाद IAS अधिकारी की इन-हैंड सैलरी करीब 1.5 लाख रुपये तक हो जाती है. इसके साथ सरकारी बंगला, ड्राइवर और स्टाफ जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं.
वहीं IFS अधिकारी इस समय तक किसी प्रमुख दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी या काउंसलर के पद पर पहुंच जाता हैं. उन्हें फॉरेन अलाउंस के साथ एम्बेसी अपार्टमेंट और बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं.
35 साल की सर्विस के बाद क्या होता है?
करीब 35 साल की सेवा के बाद IAS अधिकारी सेक्रेटरी के पद से रिटायर होते हैं. उन्हें पेंशन मिलती है, लेकिन सरकारी बंगला वापस करना होता है.
वहीं IFS अधिकारी राजदूत के पद से रिटायर हो सकते हैं. वारिकू के मुताबिक IFS अधिकारी अपनी सेवा का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारत से बाहर बिताते हैं और इस दौरान टैक्स-फ्री डॉलर में कमाई करते हैं. इसी आधार पर उनका कहना है कि लंबे समय में IFS अधिकारी IAS अधिकारी से ज्यादा पैसे कमा सकता है.
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