यूपीएससी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है. आमतौर पर माना जाता है कि इस परीक्षा को पास करने के लिए महंगी कोचिंग, बड़े शहर और ढेर सारे संसाधनों की जरूरत होती है. लेकिन देश के कई युवा ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने सीमित साधनों, सेल्फ स्टडी और मजबूत इरादों के दम पर इस मिथक को तोड़ दिया. इन अफसरों की सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत में ईमानदार हो तो बिना कोचिंग भी आईएएस और आईपीएस बनने का सपना पूरा किया जा सकता है.
सुलोचना मीणा
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के अडालवाड़ा गांव की सुलोचना मीणा ने 22 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की. वर्ष 2021 में उन्होंने ऑल इंडिया 415वीं रैंक और एसटी कैटेगरी में छठी रैंक हासिल की.
किसान परिवार से आने वाली सुलोचना को गांव में अकसर पढ़ाई छोड़कर शादी करने की सलाह दी जाती थी. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया. अखबार, एनसीईआरटी की किताबें, यूट्यूब की मुफ्त क्लास और सेल्फ स्टडी के जरिए उन्होंने यह मुकाम हासिल कर खुद को साबित किया. आज वह झारखंड कैडर में एसडीओ के पद पर तैनात हैं.
अनुदीप दुरीशेट्टी
तेलंगाना के अनुदीप दुरीशेट्टी ने बिट्स पिलानी से बीटेक किया और बाद में गूगल में नौकरी भी की. लेकिन उनका सपना सिविल सेवा में जाना था. शुरुआती तीन प्रयासों में असफल रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार सेल्फ स्टडी जारी रखी और साल 2017 में न सिर्फ यूपीएससी पास किया बल्कि ऑल इंडिया रैंक में टॉप कर इतिहास रच दिया. उस समय उन्होंने यूपीएससी में सबसे अधिक अंक हासिल करने का रिकॉर्ड भी बनाया था.
मुस्कान डागर
हरियाणा की मुस्कान डागर ने हिंदू कॉलेज से बीएससी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की. शुरुआती कुछ महीनों तक उन्होंने कोचिंग ली, लेकिन बाद में सेल्फ स्टडी के भरोसे आगे बढ़ीं. पहले प्रयास में उन्हें 472वीं रैंक मिली, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं थीं. उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और इस बार 72वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया.
तरुणी पांडे
पश्चिम बंगाल में जन्मीं और झारखंड के जामताड़ा में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे का सफर संघर्षों से भरा रहा. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें सरकारी स्कूल में पढ़ना पड़ा. उनका सपना डॉक्टर बनने का था और एमबीबीएस में दाखिला भी मिल गया था, लेकिन बीमारी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी.
साल 2016 में उनके परिवार पर बड़ा दुख तब टूटा जब उनकी बहन के पति श्रीनगर में शहीद हो गए. इसी दौरान उन्हें प्रशासनिक सेवा की ताकत और जिम्मेदारी का एहसास हुआ. यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों के सहारे तैयारी करते हुए उन्होंने सिर्फ 120 दिनों की तैयारी के बाद यूपीएससी 2021 में ऑल इंडिया 14वीं रैंक हासिल कर आईएएस कैडर प्राप्त किया.
अनन्या
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनन्या ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकोनॉमिक्स ऑनर्स किया. कॉलेज के अंतिम वर्ष में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू करने का फैसला लिया.
उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया. खुद नोट्स बनाए, सिलेबस समझा और रोजाना तय समय तक पढ़ाई की. प्रीलिम्स और मेंस की तैयारी साथ-साथ की. साल 2019 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की और मात्र 22 साल की उम्र में अपना सपना पूरा किया. वर्तमान में वह पश्चिम बंगाल कैडर में तैनात हैं.
अभिजीत पाटिल
महाराष्ट्र के अभिजीत पाटिल ने यह साबित किया कि यूपीएससी की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग जरूरी नहीं होती. उन्होंने अनुशासित सेल्फ स्टडी और मुफ्त ऑनलाइन संसाधनों के सहारे तैयारी की. यूपीएससी सीएसई 2022 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 470वीं रैंक हासिल की और राजस्थान कैडर में आईपीएस अधिकारी बने. महज 22 साल की उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें देश के सबसे युवा आईपीएस अधिकारियों में शामिल कर दिया.
वंदना मीणा
राजस्थान के सवाई माधोपुर से ताल्लुक रखने वाली वंदना मीणा की पढ़ाई दिल्ली में हुई. उन्होंने सेंट कोलंबस स्कूल से स्कूली शिक्षा और दिल्ली विश्वविद्यालय से मैथ्स ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं लिया. घर पर रहकर यूट्यूब और ऑनलाइन किताबों के सहारे तैयारी की. उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2021 में उन्होंने 330वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया. वंदना के अनुसार तैयारी के दौरान वह रोजाना 15 से 16 घंटे पढ़ाई करती थीं.
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