हर साल जून महीने में चीन में एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है. इस दौरान सड़कों पर से ट्रैफिक साफ हो जाता है, एग्जान सेंटर के आसपास कंस्ट्रक्शन रोक दिया जाता है. लाखों माता-पिता घंटों तक स्कूलों के बाहर अपने बच्चों का इंतजार करते दिखते हैं. इसकी वजह होती है चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा. जिसे 'गाओकाओ' (Gaokao) कहा जाता है. यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाला पड़ाव माना जाता है.
इस साल गाओकाओ परीक्षा 7 जून से शुरू हो चुकी है. 2026 में करीब 1.29 करोड़ छात्रों ने इस परीक्षा के लिए रजिस्टर कराया है. सुनने में यह नंबर काफी बड़ा लगता है, लेकिन इसके पीछे एक चौंकाने वाली सच्चाई भी छिपी है. दरअसल लगातार दूसरे साल गाओकाओ परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है.
चीन में गाओकाओ को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है. विश्वविद्यालय में प्रवेश का रास्ता इसी परीक्षा से होकर गुजरता है. छात्र को किस कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला मिलेगा, यह काफी हद तक उसके मार्क्स पर निर्भर करता है.
इस परीक्षा तक पहुंचने के लिए छात्रों को लगभग 12 वर्षों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. हजारों मॉक टेस्ट, कई घंटों की पढ़ाई और लगातार दबाव उनके जीवन का हिस्सा बन जाते हैं. कई परिवारों के लिए यह परीक्षा सफलता और असफलता के बीच की सबसे बड़ी लाइन मानी जाती है.
चीन के शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल गाओकाओ के लिए रजिस्टर कराने वाले छात्रों की संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग 4.5 लाख कम रही. इससे पहले 2025 में भी उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट देखी गई थी.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे चीन की घटती जन्मदर एक बड़ा कारण है. पिछले कुछ वर्षों में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है, जिसका असर अब हाई एजुकेशन में दाखिला लेने वाली जेनरेशन पर दिखाई देने लगा है.
केवल जनसंख्या में कमी ही इसकी वजह नहीं है. चीन की अर्थव्यवस्था फिलहाल कई चुनौतियों का सामना कर रही है और रोजगार बाजार भी दबाव में है. लाखों विश्वविद्यालय ग्रेजुएशन नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन अवसर सीमित होते जा रहे हैं. इस साल करीब 1.27 करोड़ विश्वविद्यालय छात्र डिग्री लेकर नौकरी बाजार में उतरने वाले हैं. ऐसे में कंपनियां पॉपुलर विश्वविद्यालयों के छात्रों को पहला मौका दे रही हैं, जबकि सामान्य संस्थानों से पढ़े युवाओं को रोजगार पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
एक समय था जब गाओकाओ को बेहतर भविष्य की गारंटी माना जाता था. लेकिन अब कई परिवार और छात्र यह सवाल पूछने लगे हैं कि क्या सालों की तैयारी और विश्वविद्यालय की डिग्री वास्तव में अच्छी नौकरी सुनिश्चित कर सकती है?
बदलते आर्थिक हालात और रोजगार के हालात ने युवाओं की सोच को प्रभावित किया है. यही वजह है कि चीन की सबसे पॉपुलर परीक्षा मानी जाने वाली गाओकाओ में भाग लेने वालों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े परिवर्तन का भी संकेत माना जा रहा है.