असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है. कुल 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को चुनाव होने हैं. यहां बहुमत का आंकड़ा 64 है. वोटों की गिनती 4 मई 2026 को की जाएगी. इस चुनाव में जहां बीजेपी जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस वापसी के लिए पूरा जोर लगा चुकी है.
आपको मालूम हो कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव 2021 में कुल 93 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 60 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 126 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी. विधानसभा चुनाव 2016 में 60 सीटों पर जीत हासिल कर असम में बीजेपी पहली बार सत्ता पर काबिज हुई थी. उधर, असम में कांग्रेस ने पिछली विधानसभा में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सिर्फ 29 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी. कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोट गठबंधन ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
असम विधानसभा चुनाव 2026 पर एक नजर
1. असम विधानसभा चुनाव में कुल 2.5 करोड़ मतदाता हैं
2. असम में 1.25 करोड़ पुरुष मतदाता, 1.25 करोड़ महिला और 343 थर्ड जेंडर मतदाता हैं.
3. 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 5.75 लाख युवा पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
4. 126 सीटों के लिए कुल 31,486 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
5. इस बार असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.
6. इस बार असम चुनाव में राष्ट्रीय दलों से 211 उम्मीदवार, राज्य दलों से 116, पंजीकृत दलों ने 137 और 258 निर्दलीय प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं.
7. राज्य की 15वीं विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त होगा.
असम चुनाव में इस बार ये प्रमुख चेहरे आजमा रहे अपनी किस्मत
असम चुनाव में इस बार किस्मत आजमा रहे प्रमुख चेहरों में असम के मौजूदा मुख्यमंत्री और सत्ताधारी भाजपा गठबंधन के प्रमुख नेता हिमंत बिस्व सरमा हैं. वह सरमा जालुकबाड़ी विधानसभा सीटे से चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस ने सरमा के खिलाफ बिदिशा नियोग को टिकट दिया है. निर्दलीय दीपिका दास भी यहां से चुनावी मैदान में हैं. असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विपक्षी गठबंधन असम सम्मिलित मोर्चा के मुख्य नेता गौरव गोगोई अभी जोरहाट लोकसभा सीट से सांसद हैं. कांग्रेस ने उन्हें जोरहाट विधानसभा सीट से टिकट दिया है. भाजपा ने यहां से हितेंद्र नाथ गोस्वामी को चुनावी मैदान में उतारा है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल इस बार बिन्नाकांडी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने यह सीट अपने सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) के लिए छोड़ दी है.
एजीपी ने यहां से शहाबुद्दीन मजूमदार को चुनावी मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने यह सीट अपने सहयोगी असम जातीय परिषद (एजेपी) के लिए छोड़ दी है. एजेपी ने यहां से रेजाउल करीम चौधरी को टिकट दिया है. कांग्रेस के विपक्षी गठबंधन असम सम्मिलित मोर्चा में शामिल राइजोर दल के नेता अखिल गोगोई सिबसागर सीट से चुनावी मैदान में हैं. भाजपा ने इस सीट से कुशल दोवारी को उतारा है.विपक्षी गठबंधन असम सम्मिलित मोर्चा में शामिल असम जातीय परिषद के प्रमुख लुरिनज्योति गोगोई खोवांग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने इस सीट से चक्रधर गोगोई को टिकट दिया है. एजीपी के नेता अतुल बोरा बोकाखाट निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार हैं. बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के नेता हग्रामा मोहिलारी, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के नेता उरखाओ ग्वरा ब्रह्मा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुष्मिता देव भी इस चुनाव के खास चेहरे हैं.
असम का निचला इलाका हर चुनाव में निर्णायक
असम का विधानसभा चुनाव क्षेत्र एक जैस नहीं है बल्कि यह तीन अलग-अलग क्षेत्रों ऊपरी, मध्य और निचले असम में बंटा हुआ है. इस हर एक क्षेत्र का अपना सियासी मिजाज है. ऊपरी असम में जहां 35 विधानसभा सीटें आती हैं तो वहीं मध्य असम जिसे बोडोलैंड के नाम से जाना जाता है, उसमें 41 विधानसभा सीटें आती हैं. निचले असम में 50 विधानसभा सीटें आती हैं. ऐसे में असम का निचला क्षेत्र ही सत्ता की चॉबी लेने और देने का काम करता है. निचले असम में मुस्लिम मतदाता हर चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं. यह क्षेत्र बांग्लादेश से सटा हुआ है. असम के नीचले क्षेत्र की 50 सीटों में से पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 23 सीटों पर तो कांग्रेस-एआईयूडीएफ ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बारपेटा, धुबरी और गोलपाड़ा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है. यहां पर कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के बीच सीधा मुकाबला है, क्योंकि पिछली बार एआईयूडीएफ 16 सीटें जीती थी, लेकिन हालात इस बार बदले हुए हैं.
ऊपरी असम की सीटों पर विपक्षी दलों की नजर
ऊपरी असम में कुल 35 सीटें हैं. पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए यहां की 35 सीटों में से 30 पर जीत दर्ज की थी. उधर, कांग्रेस को सिर्फ 5 सीटों पर जीत मिली थी. भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा चुनाव 2026 में ऊपरी असम की सीटें पर विपक्षी पार्टियों से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है. कांग्रेस और उसके सहयोगी दल ऊपरी असम की सीटों पर नजर गड़ाए हुए हैं. ऊपरी असम के तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट जैसे जिलों वाला इलाका सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है. राजनीति के जानकारों का कहना है कि ऊपरी असम की कई सीटों पर अहोम समुदाय के मतदाता निर्णायक होते हैं. यह समुदाय इस बार कांग्रेस के पक्ष में झुका नजर आ रहा है. ऐसे में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है. आपको मालूम हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में विपक्ष में एकता की कमी और अलग-अलग चुनाव लड़ने से एनडीए को बढ़त मिली थी लेकिन इस बार कांग्रेस का कई दलों के साथ गठबंधन के कारण विपक्ष मजबूत नजर आ रहा है.
मध्य असम में हैं कुल इतनी विधानसभा सीटें
मध्य असम में हैं कुल 41 विधानसभा सीटें हैं. विधानसभा चुनाव में 2021 में 41 सीटों में से एनडीए ने जहां 22 सीटें तो कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी. ये इलाका क्षेत्रीय दलों के लिए अहम माना जाता है. नगांव, मोरीगांव के साथ बोडोलैंड क्षेत्र शामिल है, जहां जातीय और क्षेत्रीय राजनीति का असर दिखता है. हालांकि परिसीमन ने राजनीति को नया आकार दिया है और कई सीटों की सीमाएं बदल गई हैं. एसटी सीटों की जहां संख्या बढ़ी है तो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी संरचनागत बदलाव आया है. अब देखना है कि इस बार इस क्षेत्र से किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं.
कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में
असम में 2026 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है. हालांकि पिछले चुनावों के नतीजे पार्टी के लिए निराशाजनक रहे थे, जिससे उसकी स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. भारतीय जनता पार्टी की मजबूत स्थिति और संगठनात्मक पकड़ कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. ऐसे में 2026 का चुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक साख को दोबारा स्थापित करने की भी परीक्षा होगा. उधर, इस बार चुनाव में महिला मतादात और जेन जी की वोट पर बीजेपी की उम्मीदें टिकी हुई हैं. चुनाव से ठीक पहले सरकार ने अरुणोदय योजना के तहत राज्य की करीब 40 लाख महिलाओं के खाते में 3,600 करोड़ की रकम भेजी थी. असम में महिला वोटरों की तादाद पुरुषों के समान ही है. कई सीटों पर उनके वोट निर्णायक हैं. 4 मई 2026 को वोटों की गिनती के साथ यह पता चल जाएगा कि असम में बीजेपी की सरकार फिर बनती है या सालों बाद कांग्रेस की वापसी होती है.