बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है. बीजेपी के लिए ये सीट प्रतिष्ठा की बन गई है. बीजेपी ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर वो खुद प्रचार कर रहे हैं. इसके साथ ही सूबे में तमाम दिग्गज लीडर प्रचार में जुटे हैं. एनडीए उम्मीदवार के समर्थन में पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने भी वीडियो जारी किया है. उधर, आरजेडी लीडर तेजस्वी यादव भी मैदान में है. उन्होंने ने भी प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है. आरजेडी और बीजेपी की लड़ाई में एक तीसरी ताकत की भी चर्चा हो रही है. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद इस सीट से चुनाव मैदान में हैं. उनके मैदान में आने से त्रिकोणीय लड़ाई की चर्चा हो रही है. चलिए बांकीपुर का मूड समझने की कोशिश करते हैं.
बीजेपी का गढ़ बांकीपुर सीट-
बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ रहा है. लंबे समय से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है. इस सीट पर बीजेपी का 30 साल से कब्जा है. यहां की जनता लगातार बीजेपी को जीत दिला ही है. यह सीट साल 1995 से लगातार बीजेपी के खाते में रही है. आखिरी बार इस सीट पर बीजेपी के नितिन नवीन ने साल 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. हालांकि जब वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो उन्होंने ये सीट छोड़ दी. उसके बाद इस सीट पर उपचुनाव का ऐलान हुआ है.
क्या हैं इस सीट के आंकड़े?
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बांकीपुर सीट में करीब 3.79 लाख वोटर हैं. इसमें 1.2 से 1.35 लाख वोटर्स की उम्र 18 से 29 साल के बीच है. इसका मतलब है कि करीब एक-तिहाई मतदाता युवा हैं. इस बार के चुनाव में ये एक बड़ा फैक्टर हो सकता है. ये सीट शहरी सीट है. इसलिए माना जाता है कि इस सीट पर वोटर्स का रुझान राष्ट्रीय और सूबे के मुद्दों के मुताबिक होता है.
बीजेपी की ताकत और चुनौती?
बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन है. पार्टी का बूथ लेवल तक नेटवर्क है. इस सीट पर व्यापारी का दबदबा माना जाता है और उनकी संख्या भी अच्छी खासी है. इस वर्ग को बीजेपी का समर्थक माना जाता है. बीजेपी इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रख सकती है. लेकिन इस बार छात्र आंदोलन की वजह से युवा मतदाताओं को लुभाने की चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है. इस इलाके में शहरी युवाओं की अच्छी-खासी संख्या है, जो अपनी सोच सोशल मीडिया से बनाते हैं. उनका रुख बदला तो बीजेपी के लिए चुनौती हो सकती है.
आरजेडी की मजबूती और कमजोरी-
आरजेडी इस सीट पर कई दशकों से कुछ खास नहीं कर पाई है. हर बार पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. इसका असर इस उपचुनाव में प्रचार में भी देखने को मिला. पार्टी के दिग्गज लीडर तेजस्वी यादव आखिरी वक्त में प्रचार में उतरे. पार्टी भी ज्यादा एक्टिव नहीं दिख रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि आरजेडी को इस चुनाव से ज्यादा उम्मीद नहीं है. लेकिन आरजेडी ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है. रेखा गुप्ता पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थीं.
इस सीट पर आरजेडी की सबसे बड़ी ताकत रेखा गुप्ता को चुनाव मैदान में उतारना है. रेखा गुप्ता वैश्य समाज से आती हैं और इस समाज की अच्छी-खासी आबादी इस इलाके में वोटर्स है. इसके साथ ही युवा वोटर्स भी आरजेडी के लिए इस चुनाव में मददगार हो सकते हैं. छात्र आंदोलन की वजह से युवा वोटर्स का झुकाव आरजेडी की तरफ होता है तो पार्टी को सालों बाद इस सीट पर अच्छी खबर मिल सकती है.
प्रशांत किशोर की क्या है ताकत?
सोशल मीडिया पर बांकीपुर उपचुनाव को लेकर प्रशांत किशोर की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. प्रशांत किशोर भी उम्मीदवार हैं. वो लगातार प्रचार भी कर रहबे हैं. उनके भाषणों की चर्चा भी हो रही है. उनकी सभाओं में भीड़ भी जुट रही है. लेकिन ये भीड़ वोट में बदलेगी या नहीं, इसको लेकर संशय है. प्रशांत किशोर की चर्चा युवाओं में ज्यादा है. लेकिन बाकी लोग उनकी चर्चा कम कर रहे हैं.
प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी ताकत सोशल मीडिया पर उनका प्रचार तंत्र है. युवा उनकी तरफ आकर्षित भी हो रहा है. लेकिन जीत तक पहुंचने के लिए अभी काफी कुछ चीजों की जरूरत होगी.
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