बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर वोटिंग हुई. इस बार 34.30 फीसदी वोटिंग हुई. पिछले चुनाव यानी 2025 विधानसभ चुनाव के मुकाबले 7 फीसदी कम वोटिंग हुई है. पिछली बार बांकीपुर में 41.39 फीसदी वोटिंग हुई थी. अब सवाल उठ रहा है कि करीब 7 फीसदी कम वोटिंग का क्या मतलब है? क्या बीजेपी के गढ़ में आवाम ने कुछ अलग किया है या फिर से बीजेपी को सदन में पहुंचाया है. इसका असली खुलासा तो 3 अगस्त को तब होगा, जब वोटों की गिनती होगी. लेकिन इसका क्या मतलब है, चलिए अभी इसे समझते है.
बांकीपुर में 34.30 फीसदी वोटिंग-
बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में 34.30 फीसदी वोटिंग हुई है. विधानसभा चुनाव 2025 के मुकाबले इस बार 7 फीसदी कम वोटिंग हुई है. पिछली बार 41.39 फीसदी वोटिंग हुई थी. जिसमें बीजेपी के नितिन नवीन ने जीत हासिल की थी. नितिन नवीन ने 84 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी. इस सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. 1995 से इस सीट पर बीजेपी लगातार जीत रही है. लेकिन इस उपचुनाव में कुछ और भी चर्चा चल रही है. इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है. इस उपचुनाव में बीजेपी को आरजेडी और जनसुराज पार्टी से टक्कर मिलने की चर्चा है. इसके साथ ही कम वोटिंग ने बीजेपी की धड़कनें बढ़ा दी है.
बांकीपुर में कब कितने फीसदी हुई वोटिंग?
बांकीपुर में इस बार काफी कम वोटिंग हुई है. इस शहरी सीट पर अब तक का सबसे कम मतदान का रिकॉर्ड माना जा रहा है. पिछले साल विधानसभा चुनाव में 41.39 फीसदी वोटिंग हुई थी. जबकि साल 2020 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 36.9 फीसदी वोटिंग हुई थी. जिसमें बीजेपी के नितिन नवीन ने 59.56 फीसदी वोटों के साथ जीत दर्ज की थी. साल 2015 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 40.3 फीसदी वोटिंग हुई थी. जिसमें बीजेपी के नितिन नवीन ने 60.62 फीसदी वोट के साथ जीत हासिल की थी. साल 2010 में 37 फीसदी वोटिंग हुई थी. जिसमें नितिन नवीन ने 72.06 फीसदी वोट के साथ जीत दर्ज की थी.
इस सीट पर बीजेपी का दबदबा-
बांकीपुर विधानसभा सीट पर वोटिंग पैटर्न से कोई फर्क नहीं पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी इस सीट पर साल 1995 से जीत दर्ज करती आ रही है. चाहे वोटिंग परसेंटेज कम हो या ज्यादा, नतीजों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है. लेकिन इस बार प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से समीकरण थोड़ा अलग है.
उपचुनावों के लिए उत्साह काफी कम होता है. कम वोटिंग होने का मतलब उत्साह में कमी भी हो सकता है. एक धड़ा ये भी है, जिसका मानना है कि प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से बीजेपी के लिए मुश्किलें आ सकती है. प्रशांत किशोर चुनाव में आगे निकल सकते हैं. हालांकि कई सर्वे प्रशांत किशोर को आगे बताया जा रहा है. लेकिन असली नतीजे 3 अगस्त को ही मालूम होंगे.
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