Bengal Assembly Elections 2026: ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 5% वोटर खिसके... तो बंगाल में बीजेपी की सत्ता पक्की

West Bengal Assembly Elections 2026 BJP VS TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में मुख्य मुकाबला है. इस चुनाव में टीएमसी का सिर्फ 5% वोट बीजेपी के पाले में गया तो बंगाल में भाजपा की सत्ता पक्की है. ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जी तोड़ कोशिश बीजेपी कर रही है. 

Bengal Assembly Elections 2026
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

Mamata Banerjee Vs BJP: पश्चिम बंगाल में इस समय विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर है. यहां कुल 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने हैं. 4 मई 2026 को वोटों की गिनती होगी और नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे. इस विधानसभा चुनाव में वैसे तो कई पार्टियां अपनी किस्मत आजमा रही हैं लेकिन मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जानता पार्टी (BJP) के बीच है. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) जहां चौथी बार लगातार मुख्यमंत्री बनना चाह रही हैं, तो वहीं बीजेपी हर हाल में बंगाल की सत्ता पर काबिज होना चाह रही है. 

5% वोट स्विंग से बंगाल में पलट जाएगा पासा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद कहा था कि अब बंगाल से 'जंगल राज' को खत्म करना है. बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली विधानसभा की जीत ने बीजेपी को नया जोश दिया है. अब बीजेपी हर हार में बंगाल की सत्ता पर काबिज होना चाह रही है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिर्फ 5% वोट बीजेपी के पाले में गया तो बंगाल में भाजपा की सत्ता पक्की है. ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जी तोड़ कोशिश बीजेपी कर रही है. 

दरअसल, विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी को 38.1% वोट मिले थे, जिससे वह 77 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी. उधर, TMC को 48 प्रतिशत वोट के साथ 215 सीटों पर जीत मिली थी. विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी 38 सीटें सिर्फ 5 प्रतिशत के मार्जिन से हारी थीं और 75 सीटें 10% के मार्जिन से हारी थीं. ऐसे में विधानसभा चुनाव 2026 में यदि बीजेपी TMC के सिर्फ 5 प्रतिशत वोट भी अपने पाले में कर लेती है तो वह 10 प्रतिशत के मार्जिन से हारी सीटें जीत सकती है. ऐसे में बीजेपी की जीतीं कुल सीटें 75+77 यानी 152 हो जाएंगी. पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए. राजनीति के जानकारों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को बंगाल की सत्ता में आने के लिए 40-42% से अधिक वोट की जरूरत होगी, ताकि वह टीएमसी के वोट प्रतिशत को पीछे छोड़ सके. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 5 से 6 फीसदी का वोट स्विंग आसान नहीं होता. आम तौर पर सत्ता बदलाव की स्थिति में 2 से 3 फीसद वोटों का अंतर आता है. उधर, भाजपा के रणनीतिकारों के मुताबिक जब बदलाव की स्थिति बनती है तब पुराने आंकड़े ज्यादा मायने नहीं रखते हैं.

...तो बीजेपी की सीटें और हो सकती हैं कम 
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाना बीजेपी के लिए आसान होने वाला नहीं है. यहां सत्ताधारी पार्टी टीएमसी हर कदम पर बीजेपी को कड़ी टक्कर देगी. यदि इस चुनाव में थोड़ा सा भी टीएमसी का वोट प्रतिशत बढ़ा तो 2021 से भी कम सीटें बीजेपी को आ सकती हैं. दरअसल, विधानसभा चुनाव 2021 में कई ऐसी सीटें थी, जिसपर बीजेपी बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की थी. इन सीटों पर टीएमसी ने कड़ी टक्कर दी थी. विधानसभा चुनाव 2021 में 5000 या उससे कम वोटों के अंतर से जीती गई 35 सीटों में से 22 सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं. 

सबसे कम अंतर वाली प्रमुख सीटों में नंदीग्राम सीट शामिल थी. यहां से शुभेंदु अधिकारी ने 1956 वोटों के बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल की थी. शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था. बलरामपुर विधानसभा सीट, दिन्हाटा, दान्टन, कुल्टी, तामलुक, जलपाईगुड़ी, घाटाल विधानसभा सीटों पर जीत-हार का अंतर 1000 से भी कम था. इन 7 सीटों में से 4 पर भाजपा और 3 पर टीएमसी ने जीत हासिल की थी. कुल मिलाकर भाजपा ने 77 सीटों में से एक बड़ा हिस्सा कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली सीटों से हासिल किया था. ऐसे में विधानसभा चुनाव 2026 में थोड़ा सा भी बीजेपी का वोट प्रतिशत कम होगा तो टीएमसी को बंपर जीत मिल सकती है. ऐसे में बीजेपी को सावधान रहने की जरूरत है. इस चुनाव में टीएमसी के मजबूत मुस्लिम वोट बैंक (80-90 सीटों पर 50% से अधिक) के कारण, बीजेपी के लिए मुख्य चुनौती गैर-मुस्लिम वोटों में भारी ध्रुवीकरण (50% से अधिक) करना है. 

इस चुनाव में बीजेपी की ताकत और कमजोरी
भारतीय जनता पार्टी इस बार जोर-शोर से चुनावी मैदान में उतरी है. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 160 सीटों पर विजय पाने का लक्ष्य रखा है. विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी को जहां 77 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं विधानसभा चुनाव 2016 में बीजेपी को सिर्फ 3 सीटों पर जीत मिली थी. इस बार विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख बीजेपी की ताकत है. भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुत्व आधारित वैचारिक ध्रुवीकरण के माध्यम से भी अपनी पकड़ बनाई है. इसके साथ ही कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया है. 

बीजेपी की कमजोरी की बात करें तो इस पार्टी के पास स्थानीय स्तर पर कद्दावर बंगाली चेहरे की कमी और टीएमसी द्वारा थोपा गया 'बाहरी'का टैग है. भाजपा की प्रदेश इकाई में जारी आंतरिक कलह भी बड़ी परेशानी है. उत्तर भारतीय मॉडल पर अत्यधिक निर्भरता बंगाल में बीजेपी की जीत की संभावनाओं को सीमित कर सकती है. कुछ राजनीति के जानकारों का कहना है कि एसआईआर पर भाजपा के अत्यधिक जोर देने से मतुआ समुदाय जैसे विभिन्न समूह इस चुनाव में बीजेपी से दूरी बना सकते हैं. आपको मालूम हो कि राष्ट्रीय स्तर पर कई करिश्माई नेताओं के बावजूद बीजेपी को बंगाल में टीएमसी से हार का सामना करना पड़ता है. विश्लेषकों के मुताबिक टीएमसी की भाजपा को बाहरी बताने की मुहिम कारगर रही है.

टीएमसी की ताकत और कमजोरी
पश्चिम बंगाल में अभी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सरकार है. साल 2011 में वाम मोर्चे को सत्ता से हटाने के बाद से टीएमसी बंगाल की सत्ता पर काबिज है. ममता बनर्जी की बंगाल में प्रभावशाली छवि और कल्याणकारी योजनाएं टीएमसी की ताकत हैं. ममता की छवि बंगाल के ग्रामीण इलाकों में काफी गहरी है. विपक्षी पार्टियों के पास इसका तोड़ नहीं है. टीएमसी का मजबूत बूथ स्तरीय संगठन और लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री और स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं ने महिलाओं और गरीबों के बीच एक मजबूत वोट बैंक तैयार किया है. टीएमसी की कमजोरी की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी कमजोरी सत्ता विरोधी लहर है. इसके अलावा भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं. जिला स्तर पर गुटबाजी और स्थानीय नेताओं के प्रति जनता का आक्रोश ममता बनर्जी की फिर सत्ता पर काबिज होने की राह में बाधा डाल सकते हैं.

 

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