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Nagaur News: नागौर की सियासत में बेनीवाल परिवार का चुनावी उलटफेर! छोटी भाभी बनीं सरपंच, बड़ी को मिली करारी शिकस्त, मतदान करने भी नहीं पहुंचे RLP सुप्रीमो Hanuman Beniwal

बरण गांव का यह चुनाव केवल सरपंच पद की जीत-हार तक सीमित नहीं रहा. सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़ी दो प्रत्याशियों के अलग-अलग परिणाम और उनका मतदान से दूर रहना चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है.

Baran Village Panchayat Elections
केशा राम गढ़वार
  • नागौर ,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

राजस्थान के पंचायती राज चुनाव में नागौर जिले के बरण गांव का सरपंच चुनाव राजनीतिक और पारिवारिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़ी दो महिला प्रत्याशियों के चुनावी नतीजों ने सबका ध्यान खींचा है. सांसद की छोटी भाभी राजबाला पत्नी प्रेमसुख बेनीवाल ने सरपंच पद का चुनाव जीत लिया, जबकि बड़ी भाभी मीरा पत्नी स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल को हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव की एक और चर्चित बात यह रही कि हनुमान बेनीवाल मतदान करने भी नहीं पहुंचे.

छोटी भाभी राजबाला को 982 वोट, बड़ी भाभी मीरा को महज 21 वोट
बरण गांव में सरपंच पद के चुनाव में छह महिला प्रत्याशी मैदान में थीं. इनमें राजबाला पत्नी प्रेमसुख बेनीवाल और मीरा पत्नी स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल के बीच मुकाबले को लेकर खास चर्चा रही. घोषित परिणाम के अनुसार राजबाला ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि मीरा को केवल 21 वोट मिले. परिणाम ने गांव की चुनावी राजनीति में दोनों प्रत्याशियों के बीच समर्थन के बड़े अंतर को सामने ला दिया. राजबाला की जीत के बाद बेनीवाल परिवार में छोटी भाभी की चुनावी सफलता चर्चा का विषय बन गई, वहीं मीरा की हार ने भी लोगों का ध्यान खींचा.

चुनाव परिणाम पर एक नजर 
राजबाला (पत्नी प्रेमसुख बेनीवाल), बरण गांव: 982 वोट
मीरा (पत्नी स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल), बरण गांव: 21 वोट
अन्नपूर्णा (पत्नी मूलचंद), बरण गांव: 97 वोट
उर्मिला (पत्नी तुलछाराम), बूढ़ी: 833 वोट
पपीता (पत्नी सुनील), बूढ़ी: 440 वोट
पिस्ता (पत्नी संग्राम), बूढ़ी: 109 वोट

परिवार की राजनीतिक विरासत के बीच मीरा को क्यों मिले सिर्फ 21 वोट 
इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू मीरा को मिले वोटों की संख्या रही. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके पति स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे थे. इसके बावजूद मीरा को सरपंच चुनाव में केवल 21 वोट मिले. दूसरी ओर, राजबाला ने 982 वोट हासिल किए. दोनों के बीच वोटों का यह बड़ा अंतर गांव की स्थानीय चुनावी परिस्थितियों और मतदाताओं के फैसले को लेकर चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, केवल चुनाव परिणाम के आधार पर मतदाताओं के फैसले के पीछे के कारणों का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

बेनीवाल ने नहीं किया मतदान, नाराजगी की भी चर्चा
हनुमान बेनीवाल के मतदान नहीं करने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं. सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि वह परिवार के सदस्यों के चुनाव लड़ने से नाराज थे और पारिवारिक राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे. यह भी चर्चा है कि वह चाहते थे कि परिवार के बजाय गांव के अन्य लोग चुनाव मैदान में उतरें. हालांकि, बेनीवाल के मतदान नहीं करने के पीछे बताई जा रही नाराजगी की वजह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इस संबंध में उनका आधिकारिक बयान सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

बरण गांव के नतीजे ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल 
बरण गांव का यह चुनाव केवल सरपंच पद की जीत-हार तक सीमित नहीं रहा. सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़ी दो प्रत्याशियों के अलग-अलग परिणाम और उनका मतदान से दूर रहना चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है. एक ओर राजबाला की जीत ने उन्हें गांव की नई सरपंच के रूप में स्थापित किया, तो दूसरी ओर मीरा की हार ने परिवार की राजनीतिक विरासत और स्थानीय मतदाताओं के फैसले को लेकर सवाल खड़े किए हैं. अब इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों की नजर है.

बरण गांव का चुनावी संदेश है साफ 
बरण गांव का चुनावी संदेश साफ है कि अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होता है. लेकिन इस नतीजे के पीछे स्थानीय समीकरणों और मतदान के कारणों को समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार करना होगा.

 

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