नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश के चेहरों ने 2027 की पटकथा लिख दी है. OBC, Gen Z यानि युवा और महिला जिसपर सीएम योगी ने भी अपना फोकस बढ़ा दिया है, वहीं नितिन नवीन की टीम में यूपी से भी दिखाई दे रहा है.
युवा, ओबीसी और महिला. यह 2027 के विधानसभा चुनाव का मंत्र होने जा रहा है. यही मंत्र नितिन नवीन की टीम में उत्तर प्रदेश से दिखाई दिए हैं. अहम पदों पर कुल आठ बड़े चेहरे उत्तर प्रदेश से हैं जिसने जातीय संतुलन और क्षेत्रीय संतुलन साधा गया है.
नितिन नवीन के नई टीम के ऐलान के बाद अब इस टीम की पहली परीक्षा उत्तर प्रदेश के चुनाव में होने वाली है. कुछ महीनो के बाद उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं, जिसका अक्स बीजेपी के इस नई राष्ट्रीय टीम में दिखाई दे रहा है.
नितिन नवीन की टीम में उत्तर पदेश से तीन महिलाओं और तीन ओबीसी को जगह मिली है. जिसका मकसद एकदम साफ है कि फोकस महिला, ओबीसी और युवा है. बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में जिस तरीके से ओबीसी को प्राथमिकता मिली ली है, महिलाओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है यह साफ है कि बीजेपी विपक्ष के सामने युवा महिला और ओबीसी चेहरा आगे रख रही है.
संगठन के सबसे बड़े पदों में एक राष्ट्रीय महासचिव के पद पर स्मृति ईरानी को लाया गया है. फायर ब्रांड महिला नेता के तौर पर स्मृति ईरानी की पहचान है. राहुल गांधी को अमेठी में हार मिल चुकी हैं. हालांकि इस बार वह अमेठी से चुनाव हार गई थी, लेकिन राष्ट्रीय टीम में लाकर बीजेपी ने एक बड़ा संदेश दिया है. यह संदेश यूपी में भी महिला सशक्तिकरण को लेकर है.
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रेखा वर्मा को जगह मिली है , कुर्मी बिरादरी से आने वाली रेखा वर्मा 53 साल की हैं धौरहरा से दो बार की सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकी हैं लेकिन बीजेपी ने रेखा वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखकर कुर्मी वोटो को साधने की अपनी मुहिम को साफ कर दिया है. बरेली मंडल से संतोष गंगवार के गवर्नर बनने के बाद उस पूरे इलाके में बीजेपी ने अपने पुराने कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए रेखा वर्मा पर दांव लगाया है.
अमरपाल मौर्य राज्यसभा सांसद हैं, केशव मौर्य के करीबी माने जाते हैं, प्रयागराज मंडल से आते हैं. उस इलाके में कुशवाहा समाज को प्रतिनिधित्व देने और खासकर उत्तर प्रदेश में मौर्य बिरादरी को साधने के लिए बीजेपी ने अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चे का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया है. 2024 लोकसभा चुनाव में कुशवाहा समाज का बड़ा वोट बीजेपी से खिसक गया था. बीजेपी एक बार फिर या कोशिश कर रही है की कुशवाहा मौर्य बिरादरी को साधा जा सके.
राष्ट्रीय मंत्री के पद पर संगीता यादव को लाया गया है, वह यादव बिरादरी से महिला चेहरा है .योगी सरकार में पिछले मंत्रिमंडल में मंत्री और विधायक रह चुकी हैं फिलहाल राज्यसभा में है और पूर्वांचल में बीजेपी की सबसे कमजोर कड़ी जो इलाके माने जाते हैं उसे इलाके में यादवों को साधने के लिहाज से इस चेहरे को स्थान दिया है.
भोला सिंह उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले सांसदों में शुमार हैं. बुलंदशहर की सुरक्षित सीट से भाजपा के सांसद हैं. दलित बिरादरी से आते हैं और पश्चिम में दलितों को साधने की जिम्मेदारी भोला सिंह को मिली है. राष्ट्रीय मंत्री रहते हुए भाजपा ने पश्चिम में दलितों के चेहरे के तौर पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह देकर पश्चिम के दलितों में को संदेश देने की कोशिश है.
हरीश द्विवेदी पूर्व सांसद हैंऔर पूर्वांचल के बस्ती से आते हैं. एबीवीपी और युवा मोर्चा का उनका लंबा अनुभव रहा है. 2024 का चुनाव हार गए थे, लेकिन संगठन का काम नहीं छोड़ा. चुनाव हारने के बाद भी हरीश द्विवेदी असम में संगठन प्रभारी के तौर पर काम करते रहे इसका उन्हें राष्ट्रीय टीम में इनाम मिला है. युवा ब्राह्मण चेहरे हैं और ब्राह्मणों को साधने के लिए बीजेपी ने इस चेहरे को अपने राष्ट्रीय टीम में जगह दी है.
संगठन के अहम पदों पर दो मुसलमान चेहरे भी हैं, जो उत्तर प्रदेश से लाए गए हैं. तारिक़ मंसूर को उपाध्यक्ष बनाया गया, जो फिलहाल राज्यसभा में हैं. लेकिन बीजेपी ने अब उन्हें संगठन में भी जगह दी है. इसके अलावा कुंवर वासी ताली जो की अभी तक उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष थे. यूपी में मेरठ से आते हैं पश्चिम में मुसलमान को साधने की बीजेपी की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि यह दोनों मुस्लिम चेहरे पश्चिमी यूपी से ही हैं.