पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के साथ आने की चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, दोनों दलों के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है. जल्द ही गठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 35 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि बाकी सीटों पर अकाली दल और उसके सहयोगी दल मैदान में उतर सकते हैं.
साथ आ सकते हैं पुराने सहयोगी-
अकाली दल के सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़कर देख चुकी हैं और अब यह समझ बन रही है कि अलग लड़ने से दोनों को नुकसान हो रहा है. ऐसे में एक बार फिर पुराने सहयोगी साथ आ सकते हैं.
अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, गठबंधन के ऐलान में ज्यादा देरी नहीं होनी चाहिए. जितनी देर होगी, चुनाव से पहले संगठनात्मक तालमेल और गठबंधन को जमीन पर उतारने में उतनी ही मुश्किल आएगी.
सूत्रों के अनुसार, गठबंधन में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रहेगा. अगर गठबंधन चुनाव जीतता है, तो मुख्यमंत्री पद पर भी अकाली दल का मजबूत दावा होगा. वहीं बीजेपी उन सीटों पर ज्यादा जोर दे रही है, जहां पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है.
शाह ने किया था NDA सरकार बनने का दावा-
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में एनडीए की सरकार बनने संबंधी बयान के बाद गठबंधन की संभावनाओं को और बल मिला है. अब तक बीजेपी नेता पंजाब में बीजेपी की सरकार बनाने का दावा करते रहे हैं. एनडीए सरकार की बात को दोनों दलों के संभावित साथ आने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के आंतरिक आकलन में भी यह बात सामने आई है कि अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर गठबंधन मजबूत स्थिति में आ सकता है. हालांकि, 80 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा अभी बीजेपी के आंतरिक आकलन पर आधारित है, इसे चुनावी नतीजे या स्वतंत्र अनुमान नहीं माना जा सकता.
बीजेपी और अकाली दल के साथ आने के पीछे सबसे बड़ी वजह दोनों दलों का वोट बैंक और क्षेत्रीय पकड़ मानी जा रही है.
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में करीब 25 लाख वोट यानी 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं, अकाली दल को लगभग 18 लाख वोट यानी 13.42 प्रतिशत वोट मिले. दोनों के वोट जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 43 लाख और कुल वोट प्रतिशत लगभग 32 प्रतिशत बैठता है.
2022 चुनाव में क्या थे आंकड़े?
2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल को करीब 28.61 लाख वोट यानी 18.38 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को लगभग 12 लाख वोट यानी 8 प्रतिशत वोट मिले थे. दोनों का संयुक्त आंकड़ा करीब 40-41 लाख वोट तक पहुंचता है.
दूसरी तरफ, 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 42 प्रतिशत वोट के साथ 92 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को 22.98 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में आप का वोट प्रतिशत घटकर 26.30 प्रतिशत रह गया, जबकि कांग्रेस को 26.02 प्रतिशत वोट मिले.
बीजेपी नेताओं का मानना है कि वोटों के इस बदलते समीकरण में अकाली दल के साथ गठबंधन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को चुनौती दे सकता है. हालांकि, अलग-अलग चुनावों के वोटों को सीधे जोड़कर विधानसभा सीटों का अनुमान लगाना पूरी तरह सटीक नहीं होगा.
2024 लोकसभा में बीजेपी थी भारी-
2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों को बीजेपी अपने पक्ष में बता रही है. पार्टी को 23 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी, जबकि छह सीटों पर वह दूसरे और 16 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही थी. कुल 45 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी अकाली दल से आगे रही.
वहीं, अकाली दल 9 विधानसभा क्षेत्रों में पहले, 5 में दूसरे और पांच में तीसरे स्थान पर रहा था. बीजेपी का तर्क है कि अगर दोनों दल साथ चुनाव लड़ते, तो कई सीटों पर मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती थी.
गौरतलब है कि पुराने गठबंधन के दौरान बीजेपी आमतौर पर 117 में से 23 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ती थी. इस बार पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन के आधार पर ज्यादा सीटें मांग रही है. इसी वजह से सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अहम मानी जा रही है.
सीटों का बंटवारा चुनौती-
गठबंधन की राह में सबसे बड़ी चुनौती सीटों का बंटवारा हो सकता है. पारंपरिक तौर पर बीजेपी शहरी इलाकों में और अकाली दल ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत माना जाता रहा है. लेकिन इस बार अकाली दल सेमी-अर्बन यानी अर्ध-शहरी सीटों पर भी चुनाव लड़ना चाहता है. इनमें कुछ ऐसी सीटें शामिल हो सकती हैं, जहां बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत मानती है. ऐसे में दोनों दलों को उम्मीदवारों के चयन और सीटों की अदला-बदली पर सहमति बनानी होगी.
इसके अलावा अकाली दल अपने से अलग हुए नेताओं और बिखरे हुए धड़ों को भी साथ लाने की कोशिश कर रहा है. पार्टी उन पुराने नेताओं की वापसी पर चर्चा कर रही है, जिन्होंने आपसी मतभेदों के चलते पार्टी छोड़ दी थी.
गठबंधन का इतिहास-
बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन पंजाब की राजनीति में पुराना रहा है. दोनों दल 1996 से 2020 तक साथ रहे और इस दौरान कई बार सरकार बनाई. 1997 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 75 और बीजेपी ने 18 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था. 2007 में अकाली दल को 49 और बीजेपी को 19 सीटें मिलीं. 2012 में अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की.
2020 में कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के बीच गठबंधन टूट गया था. इसके बाद दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़े, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली. अब एक बार फिर दोनों दलों के साथ आने की चर्चा ने पंजाब की सियासत में नए समीकरणों की संभावना पैदा कर दी है. कुल मिलाकर, बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की बातचीत अंतिम दौर में होने के संकेत हैं. लेकिन असली तस्वीर सीटों के बंटवारे, मुख्यमंत्री पद के फॉर्मूले और शहरी-अर्धशहरी सीटों पर सहमति बनने के बाद ही साफ होगी.
ये भी पढ़ें: