इमरान मसूद ने आज तक के खास कार्यक्रम में कहा था कि अगर अक्टूबर के पहले सीटों की संख्या पर सीटों के नाम तय नहीं हुए तो बीजेपी से मुकाबला करना मुश्किल होगा, क्योंकि बीजेपी ने चुनाव जहां लाकर खड़ा कर दिया है वहां लड़ाई बहुत कठिन हो गई है.
समाजवादी पार्टी फिलहाल सीटों के बंटवारे को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं है. समाजवादी पार्टी को लगता है कि अगर अभी सीटों पर बातचीत शुरू हुई तो कांग्रेस हर तरह के दबाव बना डालेगी. जिसमें दूसरे सहयोगियों के साथ जाने की ब्लैकमेलिंग भी शामिल है.
कांग्रेस की कितनी सीटों पर तैयारी?
कांग्रेस पार्टी अपनी आंतरिक मीटिंग में आलाकमान को 150 से ज्यादा सीटों की लिस्ट दे दी है. लेकिन समाजवादी पार्टी से अभी कोई स्ट्रक्चर्ड बातचीत शुरू नहीं हुई है.
अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि गठबंधन सिर्फ कांग्रेस पार्टी से ही होगा और अपने पुराने गठबंधन को ही साथ लेकर चलेंगे. लेकिन सीटों को लेकर फिलहाल सपा के भीतर चुप्पी है.
पहले शीर्ष स्तर पर बातचीत चाहती है सपा- सूत्र
सपा के सूत्रों के मुताबिक जब तक शीर्ष स्तर पर बातचीत की शुरुआत नहीं होगी, तब तक सीटों के बंटवारे पर नीचे कोई बातचीत संभव नहीं है. पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव बातचीत करेंगे, फिर समाजवादी पार्टी सीट शेयरिंग की अपनी कमेटी बनाएगी और वह नेताओं की कमेटी कांग्रेस के सीट शेयरिंग के लिए बनाई गई टीम से बात करेगी, तभी सीटों का बंटवारा फाइनल होगा.
अखिलेश यादव सीट बंटवारे को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं है. लेकिन कांग्रेस के भीतर एक जल्दबाजी दिखाई देने लगी है.
क्या चाहती है कांग्रेस?
कांग्रेस के नेता मानते हैं कि 2027 में अगर चुनाव जीतना है तो अखिलेश यादव को कांग्रेस को हर हाल में लगभग बराबरी का दर्जा देना होगा. ऐसा नहीं हो सकता कि कांग्रेस दोयम दर्जे की पार्टी बनकर एक सहयोगी की तरह रहे.
कांग्रेस के बड़े नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी का माहौल जिस तरीके से देश में बना है और खासकर भारत छोड़ो यात्रा के बाद उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है. उसके बाद अब समाजवादी पार्टी तो कांग्रेस पार्टी को और ना ही राहुल गांधी को इग्नोर कर सकती है.
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