मेरठ की किठौर विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल सीट है. हालांकि गुर्जर, दलित , त्यागी और जाट मतदाता भी यहां निर्णय की स्थिति में हैं. किठौर विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है. यहां जातीय समीकरणों के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय विकास के मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं. फिलहाल यहां से शाहिद मंजूर विधायक हैं. अखिलेश सरकार में वह कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं. शाहिद मंजूर दिग्गज नेता मंजूर अहमद के बेटे है और अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाले हैं.
सपा के शाहिद मंजूर का दबदबा
समाजवादी पार्टी के शाहिद मंजूर ने 2002, 2007, 2012 और 2022 में जीत दर्ज की, जबकि 2017 में भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने उन्हें हराकर सीट पर कब्जा किया था.विधानसभा चुनाव 2022 में शाहिद मंजूर ने भाजपा के सत्यवीर त्यागी को महज 2,180 वोटों से हरा कर सीट पर वापस कब्जा कर लिया. किठौर की राजनीति में सपा का पारंपरिक समर्थन और भाजपा का मजबूत चुनावी मुकाबला प्रमुख विशेषता है. किठौर विधानसभा के पिछले पांच चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां समाजवादी पार्टी के नेता शाहिद मंजूर का दबदबा रहा है. शाहिद मंजूर ने तीन बार लगातार जीत दर्ज की, 2017 में हार का सामना किया और 2022 में फिर वापसी की. 2017 में शाहिद मंजूर को 79,800 वोट और 33.02% वोट मिले, उधर सत्यवीर त्यागी के 90,622 वोट मिले थे. उस चुनाव में जीत का अंतर 10,822 वोट था. 2002 और 2007 में शाहिद मंजूर ने जीत दर्ज की. 2012 में उनका वोट बढ़कर 73,015 हो गया. वर्ष 2017 में भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने 90,622 वोट हासिल करके उन्हें पीछे छोड़ दिया. 2022 में शाहिद मंजूर ने 1,07,104 वोट प्राप्त कर सीट दोबारा जीत ली.
सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता
एक रिपोर्ट के अनुसार यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 1.25 लाख और दलित मतदाताओं की संख्या करीब 72 हजार बताई गई थी. वही गुर्जर, ठाकुर, जाट, त्यागी, सैनी, कश्यप और अन्य समुदायों की भी उल्लेखनीय भागीदारी बताई गई. ये पुराने अनुमान हैं, वर्तमान आधिकारिक जातिवार आंकड़े नहीं.
तीसरे दल का वोट भी हो सकता है महत्वपूर्ण
जातीय समीकरण में मुस्लिम मतदाताओं को सपा का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, जबकि भाजपा गुर्जर, त्यागी और अन्य हिंदू समुदायों के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश करती रही है. दलित मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. 2022 में बसपा के कुशल पाल मावी को 31,213 वोट मिले थे. इससे स्पष्ट है कि सपा-भाजपा के बीच करीबी मुकाबले में तीसरे दल का वोट भी महत्वपूर्ण हो सकता है. पिछले चुनाव में सपा और भाजपा के बीच केवल 2,180 वोटों का जीत का अंतर रहा था. ऐसे में स्थानीय विकास, उम्मीदवार की छवि, समुदायों का समर्थन और तीसरे दलों को मिलने वाले वोट चुनावी नतीजे में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
एक सीट के लिए कई दावेदार
किठौर को तहसील बनाने की मांग वर्षों पुरानी बताई जाती है. शाहजहांपुर में सड़क किनारे फल-सब्जी की आढ़त से जाम की समस्या और नवीन मंडी की मांग भी क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं. हालांकि किठौर विधानसभा पर सभी पार्टी के कई दावेदार हैं. समाजवादी पार्टी से शहीद मंज़ूर का टिकट लगभग पक्का है. वहीं एनडीए में सत्यवीर त्यागी, देवेंद्र गुर्जर टिकट की लाइन में लगे हैं. सत्यवीर त्यागी किठौर से बीजेपी के विधायक रहे हैं लेकिन पहले वह राष्ट्रीय लोकदल में हुआ करते थे. वहीं इस सीट पर आरएलडी की भी बड़ी दावेदारी है. आजाद समाज पार्टी से बाबर चौहान खरदौनी चुनाव मैदान में हैं. इस सीट पर लगातार एआईएमआईइएम भी अपनी पकड़ बनाने में लगी है और इस दल से भी कई दावेदार हैं. बहुजन समाज पार्टी से अभी कोई नाम सामने नहीं आया है लेकिन बसपा से जुड़े एक राजनीतिक घराने से चुनाव मैदान में आने की चर्चा है. भाजपा को यहां से अपनी वापसी तय करने के चुनौती है जबकि शाहिद मंजूर को इस विधानसभा पर अपना दबदबा कायम रखने की बड़ी चुनौती है.