उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की गरमाहट तेज हो रही है. सियासी दल कमर कस चुके हैं. पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं. जाति से लेकर धर्म तक के आंकड़े दुरुस्त करने लगी हैं. इस बीच जातिगत समीकरण साधने की कवायद तेज हो गई है. यूपी की सियासत में हर जाति की अपना प्रभाव है. कई जातियों का प्रभाव ज्यादा है तो कई जातियां दूसरी जातियों के साथ जोड़कर खुद की ताकत दिखाती हैं. निषाद एक ऐसा ही समुदाय है, जो अब तक अकेले तो सियासत में कुछ खास नहीं कर पाया है, लेकिन दलों के साथ अपनी ताकत जोड़कर समीकरण बदलता रहा है. चलिए आपको निषाद समुदाय की यूपी में सियासी ताकत के बारे में बताते हैं.
यूपी में निषाद समुदाय कौन?
उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय एक बड़ा समूह है. इसमें कई उपजातियां आती हैं. इसमें मुख्य तौर पर पानी से जुड़े काम करने वाली जातियां शामिल होती हैं. इसमें मल्लाह, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर उपजातियां शामिल हैं. इनको मछुआरा या जलवंशी कहा जाता है. ये समुदाय नदी किनारे रहने और खेती-मछली से जुड़ा है. यूपी में इस समुदाय की ज्यादातर आबादी गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा नदियों के किनारे है.
यूपी में मल्लाह की आबादी-
उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय की आबादी 5 से 6 फीसदी मानी जाती है. ये समुदाय खुद को निषादराज का वंशज मानता है. निषादराज का जिक्र रामायण में है. जब भगवान राम, लक्ष्मण और सीता वनवास जाते हैं. उस समय निषादराज ही भगवान राम को नाव से नदी पार कराते हैं. आज भी इस समुदाय की ज्यादातर आबादी नदियों के किनारे ही मिलती है.
कितनी है सियासी ताकत?
उत्तर प्रदेश की सियासत में निषाद समुदाय कुछ समय तक ज्यादा प्रभावी नजर नहीं आता था. लेकिन अब से समुदाय धीरे-धीरे एक मजबूत सियासी ताकत बनता जा रहा है. खासकर सूबे के पूर्वांचल इलाके मल्लाह एक मजबूत जनाधार है. एक अनुमान के मुताबिक यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 160 सीटों पर निषाद समुदाय की ठीक-ठाक आबादी है. इसमें से 50-60 सीटों पर मल्लाहों का वोटबैंक काफी प्रभावी है. ये समुदाय हार-जीत का समीकरण बदल सकता है.
सूबे में निषादों की मध्य और पूर्वी इलाके में है. सूबे के 18 जिलों में इनका प्रभाव माना जाता है. इसमें गोरखपुर, देवरिया, संतकबीर नगर, बस्ती, मऊ, बलिया, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, प्रयागराज, फतेहपुर और हमीरपुर जैसे जिले शामिल हैं.
सत्ता में भागीदारी-
यूपी में निषाद समुदाय से 8 विधायक हैं. इसमें 6 विधायक एनडीए और 2 विधायक समाजवादी पार्टी के हैं. बीजेपी से पीयूष रंजन निषाद, डॉ. धर्मराज निषाद, जय प्रकाश निषाद, रामकेश निषाद और सरवन निषाद विधायक हैं. जबकि निषाद पार्टी से डॉ. विनोद बिंद विधायक बने, लेकिन बाद में सांसद चुने गए. समाजवादी पार्टी की तरफ से मुकेश वर्मा और हाकिम लाल बिंद इस समुदाय से विधायक हैं. निषाद पार्टी के मुखिया और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद एमएलसी हैं. रामकेश निषाद सूबे में राज्यमंत्री हैं.
यूपी में निषाद समुदाय से 3 लोकसबा सांसद हैं. इसमें 2 समाजवादी पार्टी और एक बीजेपी से हैं. सुल्तानपुर से सांसद रामभुआल निषाद, संतकबीर नगर से लक्ष्मीकांत निषाद और भदोही से डॉ. विनोद बिंद सांसद हैं.
सियासत के फेमस चेहरे-
यूपी की सियासत में निषाद समुदाय से सबसे बड़े लीडर संजय निषाद माने जाते हैं. वो निषाद पार्टी के मुखिया हैं और यूपी सरकार में मंत्री हैं. इसके अलावा साध्वी निरंजन ज्योति भी मल्लाह समुदाय से आती हैं और बीजेपी की बड़ा चेहरा है, वो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष हैं.
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