पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. चुनाव प्रचार जोरशोर से चल रहा है. नए-नए सियासी गठबंधन अस्तित्व में आ रहे हैं. हुमायूँ कबीर की जनता उन्नयन पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम ने साथ लड़ने का फैसला किया है. दोनों पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने के फैसले ने मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण को दिलचस्प बना दिया है. खास तौर पर दो (मालदा,मुर्शिदाबाद) मुस्लिम बहुल जिलों और बीरभूम की कुछ मुस्लिम डॉमिनेटेड सीटों का समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि ओवैसी की पार्टी इन्हीं जगहों को टारगेट में लेकर चुनाव मैदान में उतर रही है.
50 से कम सीटों पर लड़ेगी AIMIM-
एआईएमआईएम की नजर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद मालदा और बीरभूम पर है. 50 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक हुमायूँ कबीर एआईएमआईएम को 50 सीट देने के पक्ष में हैं. लेकिन पार्टी इससे भी कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसकी वजह कम सीटों पर ज्यादा फोकस बताया जा रहा है, जो बिहार चुनाव की तर्ज पर है. पार्टी ने बिहार में केवल 29 सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीटें हासिल कर ली थी.
एआईएमआईएम बंगाल के प्रेसिडेंट इमरान सोलंकी ने बताया कि पार्टी फिलहाल बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा और बीरभूम पर ध्यान लगाते हुए चुनाव में उतर रही है. पार्टी की रणनीति एकदम साफ है. कम सीटों पर चुनाव लड़ना और बेहतर रिजल्ट. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता पहुंच रहे हैं और चुनाव के दौरान इन तीन जिलों में चुनाव प्रचार करेंगे.
अगर मालदा और मुर्शिदाबाद की बात करें तो इन जिलों में काफी दिनों से एआईएमआईएम अपना बेस तैयार करने में लगी हुई थी. सालों से पार्टी यहाँ ग्राउंड वर्क करने में सक्षम हो चुकी है, वहीं मुर्शिदाबाद से सटे बीरभूम के कुछ मुस्लिम बहुल इलाकों में भी एआईएमआईएम को लगता है कि उसकी ज़मीन तैयार हो चुकी है.
TMC को कितना नुकसान पहुंचाएगा गठबंधन?
ऐसे में अगर एआईएमआईएम हुमायूँ कबीर के साथ मिलकर इन जगहों पर अच्छा प्रदर्शन करती है तो नुकसान सीधे तौर पर तृणमूल को होता दिख रहा है. लेकिन जमीनी स्तर पर देखने से हुमायूँ कबीर की जनता उन्नयन पार्टी बेहद नई पार्टी है और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा और रेजीनगर इलाकों के अलावा हुमायूँ कबीर का बेस अभी तैयार नहीं हो पाया है. ऐसे में ये संशय बना ही हुआ है कि केवल मुर्शिदाबाद मालदा और बीरभूम की कुछ सीटों के भरोसे तैयार ये गठबंधन ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में कितनी दरार डाल पाएगा.
TMC का क्या कहना है?
वहीं तृणमूल का कहना है कि इस गठबंधन से उनको कोई नुकसान नहीं होने वाला. टीएमसी के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम कहते हैं कि दोनों ही पार्टियां कम्युनल पार्टी हैं और बंगाल में ममता का चहरा देखकर चुनाव होता है ऐसे में टीएमसी को कोई नुकसान नहीं है. साथ ही फिरहाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी फंडिंग कर रही है.
मुर्शिदाबाद जिले में कुल 22 विधानसभा सीट हैं. पिछले चुनाव में टीएमसी को 20 और बीजेपी को 2 सीट मिली थीं. वहीं मालदा जिले में कुल 12 सीटें हैं, यहाँ पिछले चुनाव में बीजेपी को 4 सीट मिली थीं और टीएमसी को 8 सीट मिली थीं.
ऐसे में बंगाल चुनाव में हुमायूँ कबीर और ओवैसी के गठबंधन ने खास तौर पर इन तीन जिलों में चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है.
(अनुपम मिश्रा की रिपोर्ट)
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