West Bengal Election Phase 2: पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं. इस साल दो चरणों में चुनाव हो रहा है. पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान संपन्न हो चुका है. पहले चरण में बंगाल की जनता ने रिकॉर्ड 92 फीसदी से ऊपर मतदान किया था. दूसरे चरण में 29 अप्रैल दिन बुधवार को 142 सीटों पर मतदान हो रहा है. इस चरण में ममता बनर्जी सहित 1448 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. मुख्य टक्कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच है. 4 मई 2026 को चुनाव के नतीजे आएंगे. किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का बहुमत हासिल करना जरूरी है. बीजेपी और टीएमसी ने इस चुनाव में पूरी ताकत लगा दी दी है.
दूसरे चरण के मतदान में ममता और भाजपा की परीक्षा है. विधानसभा चुनाव 2021 में जब इन 142 सीटों पर मतदान हुआ था, तब टीएमसी ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए 123 सीटों पर विजय पाई थी. उधर, भाजपा को सिर्फ 18 सीटें ही मिल पाईं थी. दूसरे चरण में जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उन्हें तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता है. हालांकि इस बार हवाओं का रुख कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है. टीएमसी के गढ़ में ममता को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने इस बार खास रणनीति अपनाई है. इस बार बीजेपी की आक्रामक रणनीति के साथ चुनावी मैदान में है. उधर, इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ‘एक्स फैक्टर’ साबित हो सकते हैं. राज्य में लगभग 27% मुस्लिम आबादी है, जो 100 से अधिक सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है. ओवैसी ने इस बार सीधे तौर पर उन इलाकों को निशाना बनाया है जहां टीएमसी का वोट बैंक सबसे ज्यादा है. AIMIM और हुमायूं कबीर अल्पसंख्यक वोटों में 5 से 10 प्रतिशत की भी सेंध लगाता है, तो इसका सीधा नुकसान तृणमूल कांग्रेस को होगा. वोटों का यह बिखराव बीजेपी के लिए जीत की राह आसान कर सकता है.
बीजेपी के लिए करो या मरो जैसी स्थिति
बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल में हो रहा दूसरे चरण का चुनाव करो या मरो जैसी स्थिति वाला है. बीजेपी को यदि टीएमसी को सत्ता से बेदखल करना है तो इस चरण में अधिक से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में रैलियों की झड़ी लगा दी थी. बीजेपी इस बार स्थानीय भ्रष्टाचार, राशन घोटाला और संदेशखाली जैसे संवेदनशील मुद्दों को ढाल बनाकर ममता सरकार पर हमलावर है. पार्टी का मानना है कि दक्षिण बंगाल के इन गढ़ों में अगर सेंध लग गई तो कोलकाता की सत्ता तक पहुंचना नामुमकिन नहीं होगा. उधर, यदि ममता बनर्जी यानी दीदी अपना किला बचाने में सफल रहती हैं तो यह उनकी हैट्रिक के बाद चौथी बड़ी जीत होगी. यदि बीजेपी के चक्रव्यूह में टीएमसी फंस गई तो बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है.
बीजेपी को समीकरण को पूरी तरह से बदलना होगा
दूसरे चरण में आठ चुनावी जिलों कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, हावड़ा, नादिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और पूर्वी बर्धमान में मतदान हो रहा है. कोलकाता के शहरी निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर और दक्षिण 24 परगना के घनी आबादी वाले उपनगरीय क्षेत्र, हावड़ा का औद्योगिक गलियारा ये वे क्षेत्र हैं जहां टीएमसी न सिर्फ चुनाव लड़ती है बल्कि ये वे क्षेत्र हैं, जहां उसने वर्षों से जमीनी स्तर पर शासन किया है. जहां उसका कल्याणकारी वितरण नेटवर्क सबसे मजबूत है और जहां उसकी संगठनात्मक व्यवस्था सबसे अधिक सुदृढ़ है. भाजपा को सरकार बनाने के लिए इस समीकरण को पूरी तरह से बदलना होगा. विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी ने राज्य भर में कुल 77 सीटें जीतीं, जिनमें से अधिकांश उत्तर बंगाल से थीं. बहुमत हासिल करने के लिए उसे दर्जनों और सीटें जीतनी होंगी और इनमें से अधिकतर सीटें उन्हीं जिलों से आनी चाहिए जहां पिछली बार टीएमसी को सबसे अधिक सीटें मिली थीं.
...तो ममता बनर्जी को होगा नुकसान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में एक्स फैक्टर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर का है. आपको मालूम हो कि बंगाल चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक ममता बनर्जी का मजबूत आधार है. इस राज्य में लगभग 27% मुस्लिम आबादी है, जो 100 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है. ओवैसी ने इस बार उन क्षेत्रों को अपना निशाना बनाया है, जहां ममता की पार्टी टीएमसी का वोट बैंक अधिक है.
ऐसे में यदि AIMIM और हुमायूं कबीर अल्पसंख्यक वोटों में 5 से 10 प्रतिशत की भी सेंध लगाते हैं तो इसका सीधा नुकसान टीएमसी को होगा. उधर, वोटों का यह बिखराव भारतीय जनता पार्टी के लिए जीत की राह आसान कर सकता है. आपको मालूम हो कि ममता बनर्जी ने अपनी रैलियों में कई बार ओवैसी को बीजेपी की बी-टीम कहकर संबोधित कर चुकी हैं.
भवानीपुर में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी में लड़ाई
कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों ने कई चुनावों में टीएमसी को वोट दिया है लेकिन इस बार सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों को भाजपा और वाम मोर्चा के उम्मीदवारों से कड़ी टक्कर मिल रही है. दूसरे चरण में ममता सरकार के आधे दर्जन से अधिक मंत्रियों के साथ खुद मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी का चुनावी भविष्य तय होगा. इस बार तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर सीट से चुनावी मैदान में हैं. उनके सामने भाजपा के शुभेंदु अधिकारी हैं. यह मुकाबला सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है. विधानसभा चुनाव 2021 में नंदीग्राम में हुए कड़े मुकाबले के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है. शुभेंदु अधिकारी ने 2021 में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को लगभग 1900 वोटों से हराया था.
कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम कोलकाता पोर्ट से चुनाव लड़ रहे हैं. राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य दमदम उत्तर से चुनाव लड़ रही हैं. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री शशि पांजा श्यामपुकुर से चुनाव लड़ रहे हैं. विद्युत मंत्री अरूप बिस्वास टॉलीगंज से चुनाव लड़ रहे हैं. शिक्षा मंत्री ब्रात्या बसु दमदम से चुनाव लड़ रहे हैं. अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बसु बिधाननगर से चुनाव लड़ रहे हैं. इन सभी निर्वाचन क्षेत्रों में टीएमसी की कैबिनेट की असल में परीक्षा होने वाली है. उधर, भाजपा पनिहाटी से उस जूनियर डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाया है, जिसके साथ अक्टूबर 2024 में कोलकाता के आरजी कार अस्पताल में बलात्कार और हत्या कर दी गई थी. पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता राशबेहारी से चुनाव लड़ रहे हैं. अभिनेत्री से राजनेता बनीं रूपा गांगुली को सोनरापुर दक्षिण से उम्मीदवार बनाया गया है.
महिला वोटरों की रहेगी महत्वपूर्ण भूमिका
पश्चिम बंगाल में बुधवार को जिन 142 सीटों पर मतदान हो रहा है, उसमें से 23 सीटों पर महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से ज्यादा है.जादवपुर में सबसे अधिक महिला मतदाता हैं. यहां पुरुषों के मुकाबले 11759 महिला उम्मीदवार अधिक हैं. इसके अलावा पानीहाटी, बेहाला पश्चिम, बेहाला पूर्व, लीगंज, दम दम, बिधाननगर, राजारहाट गोपालपुर, राशबिहारी, बारानगर और बर्दवान दक्षिण में भी महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से ज्यादा है. बंगाल में हमेशा महिला मतदाता बढ़-चढ़कर मतदान करती हैं. पहले चरण में भी महिलाओं ने खूब मतदान किया था. ऐसे में दूसरे चरण में भी महिला मतदाताओं की संख्या महत्वपूर्ण हो सकती है.