पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कविताओं के लिए भी जाने जाते थे. उनकी लिखी पंक्तियों में जिंदगी, अकेलापन, संघर्ष और इंसानी भावनाओं की गहरी झलक दिखाई देती है. ऐसी ही एक चर्चित रचना 'क्या खोया क्या पाया' है, जिसे गजल सम्राट जगजीत सिंह ने अपनी आवाज और संगीत से ऐसा रूप दिया कि कविता का मूल भाव पूरी तरह बरकरार रहा.
'संवेदना' का हिस्सा था 'क्या खोया क्या पाया'
'क्या खोया क्या पाया' को 2002 में आए चर्चित सहयोगी एल्बम 'संवेदना' (Samvedna) में शामिल किया गया था. इस पूरे प्रोजेक्ट में देश की राजनीति, साहित्य, संगीत और सिनेमा से जुड़े कई बड़े नाम एक साथ आए थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें कविताएं लिखीं और उन्हें अपनी आवाज में पेश भी किया. वहीं जगजीत सिंह ने इन कविताओं को संगीत दिया और अपनी आवाज में गाया.
एल्बम में अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान भी जुड़े
'संवेदना' सिर्फ अटल जी और जगजीत सिंह की वजह से खास नहीं था. एल्बम के लिए प्रस्तावना जावेद अख्तर ने लिखी थी, जिसे अमिताभ बच्चन ने अपनी दमदार आवाज में पेश किया था. इसके अलावा इस प्रोजेक्ट के चर्चित म्यूजिक वीडियो में सुपरस्टार शाहरुख खान भी नजर आए थे, जिसका निर्देशन खुद यश चोपड़ा ने किया था.
अटल जी की कविताओं के पीछे था गहरा दर्द
जगजीत सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी बैठकों के दौरान कविता और उसके पीछे की भावनाओं को लेकर बातचीत होती थी. अटल जी ने उन्हें समझाया था कि उनके जीवन में आया गहरा अकेलापन और देश के मुश्किल दौर ने उनके भीतर के कवि को और मजबूत किया. उनकी कई संवेदनशील रचनाओं पर इमरजेंसी के दौर में झेला गया कारावास और उस समय का व्यक्तिगत व सामूहिक दर्द भी असर डालता था.
जगजीत सिंह ने करीब तीन साल तक तैयार किया संगीत
जगजीत सिंह ने अटल जी की कविताओं को संगीत देने में जल्दबाजी नहीं की. उन्होंने करीब तीन साल तक 'संवेदना' की अवधारणा और इन कविताओं की धुनों पर काम किया. उनकी कोशिश थी कि संगीत कविता के शब्दों पर हावी न हो. इसलिए उन्होंने धुन को बेहद सादगी के साथ रखा, ताकि अटल जी की लिखी पंक्तियों की संवेदनशीलता, दार्शनिक गहराई और उनमें छिपा अकेलापन उसी तरह सामने आए.
अटल जी की एक शर्त ने बदल दिया था पूरा नजरिया
जगजीत सिंह अटल जी की रचनाओं को सामान्य राजनीतिक कविताओं की तरह पेश नहीं करना चाहते थे. उनका मकसद इन शब्दों को इंसान की जिंदगी, अकेलेपन, मृत्यु और मुश्किल समय में बने रहने की ताकत से जोड़ना था. अटल जी की शर्त भी यही थी कि कविता के मूल भाव और शब्दों के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. जगजीत सिंह ने इसी बात का ध्यान रखते हुए संगीत को इतना सधा हुआ रखा कि कविता की अपनी पहचान बनी रहे. यही वजह है कि 'क्या खोया क्या पाया' सिर्फ एक कविता का संगीतबद्ध रूप नहीं लगा, बल्कि अटल जी के शब्दों और जगजीत सिंह के संगीत का ऐसा मेल बना, जिसमें दोनों की अपनी-अपनी पहचान साफ सुनाई देती है.
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