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Happy Birthday Runa Laila:'दमा दम मस्त कलंदर' से लेकर 'दो दीवाने शहर में' जैसे गानों से मशहूर हुई सिंगर की कहानी, जिनको बांग्लादेश से पाकिस्तान तक मिला लोगों का प्यार

रूना लैला एक बांग्लादेशी सिंगर हैं. हिंदी सिनेमा में उनके गाने बेहद मशहूर हैं. रूना लैला एक ऐसी सिंगर हैं जिन्हें बांग्लादेश, पाकिस्तान और हिंदुस्तान हर जगह से लोगों का खूब प्यार मिला.

Runa Laila
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST
  • अहमद रुश्दी की हैं प्रशंसक
  • 17 भाषाओं में गाए गानें

रूना लैला एक बांग्लादेशी गायिका हैं जिनका जन्म 17 नवंबर 1952 को हुआ था. उन्हें दक्षिण एशिया में लोकप्रिय गायकों में से एक माना जाता है और उन्होंने 1960 के दशक के अंत में पाकिस्तान फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू किया था. उनकी गायन शैली पाकिस्तानी पार्श्व गायक अहमद रुश्दी से प्रेरित है. रूना लैला को जादुर बंशी, दुर्घटना, ओंटोर ओंटोर, तुमी अशबे बोले, देवदास और प्रिया तुमी शुखी होउ के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए छह बांग्लादेश राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले.

लैला का जन्म सिलहट में हुआ था. उनके माता-पिता सैयद मोहम्मद इमदाद अली, कराची में एक सिविल सरवेंट थे. उनकी मां का नाम अमीना लैला था. उन्होंने कथक और भरतनाट्यम शैली का नृत्य सीखना शुरू किया. इसके बाद उन्होंने अपनी बड़ी बहन दीना लैला के साथ शास्त्रीय संगीत सीखा.

अहमद रुश्दी की हैं प्रशंसक
रूना और उनकी बहन कराची के एक स्कूल में पढ़ने जाते थे. उन दिनों, अहमद रुश्दी फिल्म संगीत का नेतृत्व कर रहे थे क्योंकि उन्होंने दक्षिण एशियाई संगीत में हिप-हॉप, रॉक एन रोल, डिस्को और अन्य आधुनिक शैलियों की शुरुआत की और तब से बांग्लादेश, भारत और हाल ही में नेपाल में पॉप संस्कृतियों को एक अग्रणी प्रभाव के रूप में अपनाया गया है. रुश्दी की सफलता के बाद, जैज़ में विशेषज्ञता वाले ईसाई बैंड ने कराची, हैदराबाद, मुंबई, ढाका और लाहौर में विभिन्न नाइट क्लबों और होटल लॉबी में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. वह गायक अहमद रुश्दी की प्रशंसक बन गईं, जिन्हें वह अपना गुरु (शिक्षक) मानती थीं, और न केवल उनकी गायन शैली का अनुकरण करने की कोशिश करती थीं, बल्कि जिस तरह से वे मंच पर प्रस्तुति देती थीं रूना उसे भी फॉलो करने लगीं.

कौन-कौन से गाए गाने?
साल 1966 में लैला ने फिल्म हम दोनों के लिए "उनकी नजरों से मोहब्बत का जो पैगाम मिला" गीत के साथ अपनी सफलता हासिल की. वह पीटीवी पर परफॉर्म करती थीं. लैला ने 'जिया मोहिउद्दीन शो' (1972-74) में दिखना शुरू किया और बाद में 1970 के दशक में फिल्म उमराव जान अदा (1972) जैसी फिल्मों के लिए गाने गाए. 1974 में, उन्होंने कोलकाता में "शादर लाउ" रिकॉर्ड किया. भारत में उनका पहला संगीत कार्यक्रम 1974 में मुंबई में हुआ था. उन्होंने बॉलीवुड में निर्देशक जयदेव के साथ शुरुआत की, जिनसे वह दिल्ली में मिलीं. इसके बाद उन्हें दूरदर्शन के उद्घाटन समारोह में गाने का मौका मिला. उन्होंने पहली बार संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के साथ एक फिल्म के शीर्षक गीत एक से बढ़कर एक के लिए काम किया. गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान लता मंगेशकर ने लैला को आशीर्वाद दिया. उन्होंने भारत में 'ओ मेरा बाबू छैल छबीला' और 'दमदम मस्त कलंदर' गाने से लोकप्रियता हासिल की.

17 भाषाओं में गाए गानें
अक्टूबर 2009 में, उन्होंने भारत में पंजाबी विवाह गीतों के कलेक्शन "कला शा कला" को रिलीज़ किया. साल 2012 में, लैला ने शौकिया गायकों के लिए एक भारतीय टेलीविजन प्रतियोगिता शो सुर क्षेत्र में एक जज के रूप में काम किया. वो आशा भोसलें को अपनी बहन जैसा मानती थीं. रुना ने अपनी मूल बंगाली, हिंदी, उर्दू, पंजाबी, सिंधी, गुजराती, पश्तो, बलूची, अरबी, फारसी, मलय, नेपाली, जापानी, इतालवी, स्पेनिश, फ्रेंच और अंग्रेजी सहित 17 भाषाओं में गाना गाया है.

 

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