'आने वाला पल, जाने वाला है…
हो सके तो इसमें जिंदगी बिता दो, पल जो ये जाने वाला है…'
जिंदगी को इतने सादे शब्दों में लोगों को समझा देने में बड़े-बड़े सुरमा के शब्द डगमगा जाते हैं. गुलजार साहब के शब्दों की यही खासियत है. कभी उनका लिखा कोई गीत दिल को प्यार से भर देता है, तो कभी पुराने दौर की याद दिलाता है. कभी-कभी तो उनके शब्द जिंदगी की कोई ऐसी सच्चाई सामने रख देते हैं, जिसे हम जीते तो हैं लेकिन महसूस या कह नहीं कर पाते. 18 अगस्त 1934 को जन्मे गुलजार आज हिंदी सिनेमा के सबसे अलग और यादगार नामों में गिने जाते हैं. उनके जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी और करियर से जुड़ी 10 खास बातें.
1. पाकिस्तान में जन्मे थे गुलजार
गुलजार साहब का जन्म 18 अगस्त 1934 को अविभाजित भारत के पंजाब के झेलम जिले में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया.
2. सम्पूर्ण सिंह कालरा से कैसे बने गुलजार?
उनका असली नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा है. लिखने के लिए उन्होंने परिवार के विरुद्ध जाकर 'गुलजार' नाम अपनाया. बाद में यही नाम उनकी पहचान बन गया. 'गुलजार' सिर्फ एक नाम नहीं रहा, बल्कि उनकी शायरी और लेखन की अपनी अलग पहचान बन गया.
3. राखी से शादी हुई, लेकिन साथ नहीं रह पाए
गुलजार साहब ने अभिनेत्री राखी से 1973 में शादी की थी. दोनों की एक बेटी मेघना है. बेटी के जन्म के बाद दोनों अलग रहने लगे. खास बात यह है कि दोनों ने कभी औपचारिक तौर पर तलाक नहीं लिया.
4. बेटी की जिम्मेदारी खुद संभाली
गुलजार और राखी के अलग होने के बाद मेघना की परवरिश की जिम्मेदारी गुलजार साहब ने अकेले संभाली. मेघना ने अपनी किताब Because He Is में पिता के साथ अपने रिश्ते और बचपन की कई बातों को लिखा हैं. उन्होंने बताया कि गुलजार ने उनके जीवन में पिता और मां, दोनों की भूमिका निभाते आए हैं.
5. मेघना गुलजार भी हैं बड़ा नाम
गुलजार की बेटी मेघना गुलजार आज फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखती हैं. वह फिल्म निर्देशक और लेखिका हैं. उन्होंने तलवार, राजी और छपाक जैसी यादगार फिल्मों का निर्देशन किया है.
6. फिल्मों में पहला बड़ा मौका कैसे मिला?
गुलजार ने 1961 में बिमल रॉय प्रोडक्शंस के साथ काम शुरू किया. इसके बाद 1963 में फिल्म 'बंदिनी' के गीत 'मोरा गोरा अंग लै ले' से बतौर गीतकार उनकी फिल्मी पहचान बनी. यह गाना लोगों द्वारा काफी पसंद किया गया.
7. किन गानों ने दिलाई पहचान?
गुलजार के लिखे गानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. 'तुझसे नाराज नहीं जिंदगी', 'तेरे बिना जिंदगी से', 'आने वाला पल जाने वाला है' जैसे गीतों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई. उनके गीतों में भावनाएं भी हैं और जिंदगी को देखने का एक अलग नजरिया भी. फिल्म Slumdog Millionaire के 'जय हो' ने गुलजार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.
8. हर तरह के गीत लिखने में माहिर
गुलजार को सिर्फ गंभीर या भावुक गीतों तक सीमित करना सही नहीं हैं. उन्होंने रोमांटिक गानों से लेकर मस्ती और अलग अंदाज वाले गीत भी लिखे. 'चैंया चैंया', 'बीड़ी' और 'इब्न-ए-बतूता' जैसे गाने बताते हैं कि उनके शब्द किसी एक तरह के संगीत में बंधे हुए नहीं हैं.
9. शायरी में भी बनाई अपनी अलग पहचान
गुलजार हिंदी और उर्दू दोनों में लिखते हैं और उनकी भाषा में दोनों का खूबसूरत मेल दिखाई देता है. उन्होंने 'त्रिवेणी' नाम की तीन पंक्तियों वाली काव्य शैली को भी लोकप्रिय बनाया. उनकी रचनाओं में मिर्जा गालिब की शायरी और उर्दू अदब की छाप भी साफ झलकती है, जिसको खुद गुलजार भी मानते हैं.
10. इन पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं गुलजार
गुलजार साहब को उनके बेहतरीन लेखन और सिनेमा में योगदान के लिए देश-विदेश में कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं. उन्हें पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जा चुका है. फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के गाने 'जय हो' के लिए उन्हें ए.आर. रहमान के साथ 2009 में ऑस्कर जीता. इसके बाद 2010 में इसी गीत के लिए उन्हें ग्रैमी अवॉर्ड भी मिला. इन सम्मानों के साथ गुलजार ने साहित्य और सिनेमा, दोनों जगह अपनी अलग पहचान बनाई है.
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