सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अमिताभ बच्चन की फिल्म ' झुंड' की ओटीटी रिलीज को हरी झंडी दिखाते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही फिल्म झुंड के ओटीटी पर 6 मई को रिलीज का रास्ता साफ हो गया है. इस फिल्म के निर्माताओं पर कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप लगे हैं.
तेलंगाना हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक
हाल ही में तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस फिल्म को लेकर हुए विवाद के बाद इसके 6 मई को ओटीटी पर रिलीज करने पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 9 जून तय कर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ फिल्म के निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक नागराज पोपटराव मंजुले ने किया है.
4 मार्च को सिनेमाघरों में हुई थी रिलीज
ये फिल्म 4 मार्च 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. अब इसको ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का प्लान है. यह फिल्म भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, सविता राज हिरेमठ, राज हिरेमठ, नागराज पोपटराव मंजुले, गार्गी कुलकर्णी, मीनू अरोड़ा और संदीप सिंह द्वारा निर्मित है. जी स्टूडियोज ने इसे वर्ल्ड की यानी विश्वव्यापी रिलीज किया था. याचिकाकर्ता फिल्म निर्माताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अर्यमा सुंदरम ने बुधवार को ये मामला चीफ जस्टिस के कोर्ट के सामने उठाते हुए इसकी जल्दी सुनवाई की गुहार लगाई. कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले को सूचीबद्ध करने को कहा था.
कॉपीराइट के उल्लंघन का आरोप
इस मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट में जस्टिस पी श्री सुधा की एकल जज पीठ ने 29 अप्रैल को हैदराबाद स्थित फिल्म निर्माता नंदी चिन्नी कुमार ने फिल्म झुंड के निर्माता पर कॉपीराइट के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी. कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर स्टेटस को ऑर्डर देते हुए रिलीज रोकने के आदेश दिए. अगली सुनवाई 9 जून को सूचीबद्ध की गई थी.
क्या है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी काफी सहज है. नागपुर की पृष्ठभूमि पर गरीबों-उपेक्षितों की एक बस्ती है, जिसमें कुछ किशोर और युवा छोटे-मोटे अपराध, लूट और नशे का सामान बेच कर पैसे कमाते हैं. ये लोग खुद भटके हुए हैं, और नशे भी करते हैं. कॉलेज से रिटायर होने जा रहे प्रोफेसर विजय बोराडे (अमिताभ बच्चन) इन्हें एक दिन देखते हैं, जब से बच्चे बरसात में एक छोटे ड्रम को फुटबॉल बना देते हैं. ये सब देख कर प्रोफेसर विजय को लगता है कि अगर उन्हें सही ट्रेनिंग मिले तो ये वाकई बहुत अच्छा कर सकते हैं. फिल्म की कहानी आगे इस ट्रैक पर आगे बढ़ती है.