बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर ने 75 साल में दुनिया को अलविदा कह दिया है. सीने में दर्द की शिकायत के बाद उनको अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया. नाना पाटेकर अपने करियर में दमदार एक्टिंग के लिए मशहूर थे. उनके की डायलॉग आज भी लोगों की जुबां पर रहते हैं. चलिए आपको नाना पाटेकर के 10 फेमस डायलॉग बताते हैं.
एक मच्छर साला...
साल 1997 में आई फिल्म यशवंत में उन्होंने क डायलॉग बोला था, जिसे आज भी लोग बोलते हैं. वो डायलॉग था- एक मच्छर, साला आदमी को हिजड़ा बना देता है. एक खटमल पूरी रात को अपाहिज कर देता है. साला, एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है. सुबह घर से निकलो, भीड़ का हिस्सा बनो, शाम को घर जाओ, दारू पिओ, बच्चे पैदा करो और सुबह तलब फिर एक बार मर जाओ... क्योंकि आत्मा और अंदर का इंसान मर चुका है, जीने के लिए घिनौने समझौते कर चुका है. साला एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है.
आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने-
नाना पाटेकर फिल्म क्रांतिवीर साल 1994 में आई थी. इसमें नाना पाटेकर का फेमस डायलॉग है ये- आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने.
अब मुझे लटका देंगे, जुबान ऐसी बाहर आएगी, आंखें बाहर आएंगी, थोड़ी देर लटकता रहूंगा. फिर ये मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा, फिर आप चर्चा करते घर चले जाओगे, खाना खाओगे, सो जाओगे.
तुम्हारी ये नामर्दानगी, बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी. कुछ नहीं कहना मुझे तुम्हें, कुछ नहीं. तुम्हारी जिंदगी में कोई फर्क पड़ने वाला नहीं. अंधेरे में रहने की आदत पड़ी है तुमको, गुलामी करने की आदत पड़ी है...
बता हिंदू का खून है या मुसलमान का...
फिल्म क्रांतिवीर में नाना पाटेकर का ये डायलॉग आज भी फेमस है- ये मुसलमानों का खून, ये हिंदू का खून... बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा है, बता.
धनिया यहां छोटा दिमाग होता है-
फिल्म क्रांतिवीर में नाना पाटेकर का ये डायलॉग काफी फेमस है- ये धनिया, इधर मत मार.. समझा क्या? इधर छोटा दिमाग होता है, आदमी मर जाता है.
गुलाम-ए-मुस्तफा का डायलॉग-
फिल्म गुलाम-ए-मुस्तफा में नाना पाटेकर ने बोला था- 15 सौ की नौकरी करने वाला, एक दिन तुझे डेढ़ सौ का कफन पहनाएगा.
मराठा मरता है...
इस फिल्म में नाना पाटेकर का ये फेमस डायलॉग था- मराठा या तो मरता है या तो मारता है...
परिंदा का डायलॉग-
साल 1989 में नाना पाटेकर की फिल्म परिंदा आई थी. उसमें उनका ये डायलॉग फेमस हुआ-
ये दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं है... इसका इलाज खुद ही ढूंढना पड़ता है0 दुख को भूलना पड़ता है.
फिल्म राजनीति का डायलॉग-
साल 2010 में आई फिल्म राजनीति का नाना पाटेकर का ये डायलॉग खूब मशहूर हुआ था-
राजनीति में फैसले सही या गलत नहीं होते, फैसले होते हैं. उन्हें वक्त और हालात के हिसाब से लिया जाता है.
तू शेर है...
फिल्म प्रहार में नाना पाटेकर का ये डायलॉग काफी फेमस हुआ.
तू शेर है, शेर की तरह दहाड़... वरना कुत्तों की तरह भौंकते रह जाओगे.
फिल्म अब तक छप्पन का डायलॉग-
साल 2004 में नाना पाटेकर की फिल्म अब तक छप्पन आई थी. इसमें उनका फेमस डायलॉग था-
इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं.. एक वो जो खुद के लिए जीते हैं और दूसरे वो जो दूसरों के लिए जीते हैं.
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