प्रयागराज.शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही शहर में दुर्गा पूजा पंडालों की सजावट, मां की आरती और रामलीला मंचन की धूम शुरू हो गई है. कहीं भगवान राम की लीलाओं का मंचन हो रहा है तो कहीं देवी पूजा और भक्ति के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इन सबके बीच रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकार भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. ऐसे ही एक कलाकार हैं प्रयागराज के गौतम त्रिपाठी, जिन्होंने फिल्म 'हनुमान अंश' में बाबा नीम करौली के भक्त राधेश्याम की भूमिका निभाकर खास पहचान बनाई है. अब गौतम सिविल लाइंस की श्रीश्री बाल रामलीला कमेटी में भगवान विष्णु के रूप में मंचन करते नजर आ रहे हैं.
प्रयागराज के कटरा निवासी गौतम त्रिपाठी पिछले नौ वर्षों से रंगमंच की दुनिया में सक्रिय हैं. उन्होंने अनिल रंजन भौमिक की रंगमंच कार्यशाला से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद समानांतर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राकेश वर्मा के सानिध्य में अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारा और रंगमंच की दुनिया में पहचान बनाई. गौतम श्री श्री बाल रामलीला कमेटी, सिविल लाइंस की रामलीला में पहले पांच वर्षों तक भरत और श्रवण कुमार की भूमिकाएं निभा चुके हैं. इसके अलावा वह राजकुमार राव अभिनीत फिल्म 'शादी में जरूर आना' में भी नजर आ चुके हैं'
फिल्म 'हनुमान अंश' में गौतम त्रिपाठी ने भले ही करीब 15 मिनट की भूमिका निभाई हो, लेकिन उनका किरदार कहानी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है. फिल्म में उन्होंने बाबा नीम करौली के भक्त राधेश्याम का किरदार निभाया है, जिसकी सर्पदंश से जान बचने की घटना दिखाई गई है. फिल्म में इस प्रसंग को भावनात्मक और रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों का ध्यान खींचता है. फिल्म में राधेश्याम की पत्नी को बाबा के माध्यम से पहले ही उसके जीवन पर आने वाले संकट की जानकारी मिल जाती है. इसके बाद सर्पदंश की घटना में उसकी जान बच जाती है और पूरा परिवार बाबा का भक्त बन जाता है. इस किरदार के जरिए गौतम ने अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया है.
चित्रकूट में हुई थी फिल्म की शूटिंग
गौतम त्रिपाठी के मुताबिक, फिल्म 'हनुमान अंश' की शूटिंग नवंबर 2025 में हुई थी. इसमें उनके किरदार राधेश्याम से जुड़े ज्यादातर दृश्यों की शूटिंग चित्रकूट में की गई थी. फिल्म में छोटी लेकिन अहम भूमिका निभाने के बाद अब वह रामलीला के मंच पर भगवान विष्णु के रूप में दर्शकों के सामने हैं. गौतम का फिल्म और रंगमंच दोनों से जुड़ा सफर यह बताता है कि छोटे शहरों के कलाकार भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बड़े पर्दे तक अपनी पहचान बना सकते हैं.
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