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'प्लीज आ जाइए, मुझे बचा लीजिए'... इजरायल-फिलिस्तीन कॉन्फ्लिक्ट पर बनी फिल्म 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब' को भारत में रिलीज के लिए मिली हरी झंडी

कहते हैं युद्ध दो ताकतवर देश लड़ते हैं, लेकिन इस लड़ाई में भुगतना आम नागरिक को पड़ता है. इसी स्थिति पर बनी फिल्म 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब' अब भारत में रिलीज होने को पूरी तरह तैयार है. मार्च के महीने से चक्कर काटने के बाद अब फिल्म थिएटर में 19 जून को रिलीज होने को पूरी तरह तैयार है, जो इजरायल-फिलिस्तीन कॉन्फ्लिक्ट पर पूरी तरह आधारित है.

The Voice of Hind Rajab movie release on 19 june
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष की पृष्ठभूमि पर बनी चर्चित फिल्म 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब' एक बार फिर सुर्खियों में है. लंबे समय तक अटकी रहने के बाद अब इस फिल्म को भारत में रिलीज की मंजूरी मिल गई है. ये फिल्म 19 जून को रिलीज होगी. यह फिल्म किसी काल्पनिक कहानी पर नहीं, बल्कि एक मासूम बच्ची की वास्तविक घटना पर आधारित है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था. फिल्म पहले ऑस्कर तक पहुंची, फिर सेंसर बोर्ड की मंजूरी को लेकर चर्चा में रही और अब आखिरकार भारतीय दर्शक भी इसे बड़े पर्दे पर देख सकेंगे.

पहले क्यों अटक गई थी फिल्म की रिलीज?
फिल्म की भारतीय रिलीज पहले मार्च 2026 में प्रस्तावित की गई थी, लेकिन इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से मंजूरी नहीं मिल सकी थी. रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि फिल्म के विषय को बेहद संवेदनशील माना गया और इसे लेकर कई तरह की चिंताएं जताई गई थीं, माना गया था कि इससे भारत और इजरायल के रिश्ते बिगड़ सकते हैं. लेकिन अब इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ पिल्म सार्टिफिकेशन की मंजूरी मिल चुकी है. अब बिना किसी कट के फिल्म को प्रमाणपत्र मिल चुका है और इसके रिलीज का रास्ता 19 जून को भारत में भी साफ हो गया है.

क्या है हिंद रजब की असली कहानी?
फिल्म की कहानी फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब की वास्तविक घटना पर आधारित है. वर्ष 2024 में गाजा में संघर्ष के दौरान हिंद अपने परिवार के साथ एक कार में फंसी हुई थी. बताया जाता है कि वह मदद के लिए लगातार आपातकालीन सेवाओं से संपर्क कर रही थी. उसकी आवाज और मदद की गुहार ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था. बाद में वह मृत पाई गई. फिल्म में उसी घटना को डॉक्यूड्रामा शैली में पेश किया गया है. सबसे इमोशनल एंगल तब आता है जब फिल्म में हिंद की असली आपातकालीन अंतिम कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी इस्तेमाल किया गया है.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने क्या खुलासे किए?
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंद की मदद के लिए राहतकर्मियों ने प्रयास किए थे, लेकिन हालात बेहद कठिन थे. कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि बचाव दल को मौके तक पहुंचने में देरी हुई और अंततः बच्ची को नहीं बचाया जा सका. फिल्म इन्हीं घटनाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई है और युद्ध के बीच में वहां फंसे आम नागरिकों की पीड़ा को दिखाने की कोशिश की गई है

ऑस्कर तक पहुंची फिल्म
'द वॉयस ऑफ हिंद रजब' को दुनियाभर में काफी सराहना मिली. फिल्म को 98वें अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर) में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए नामांकित किया गया था. इसके अलावा इसे गोल्डन ग्लोब में भी नॉन-इंग्लिश भाषा की फिल्म कैटेगरी में नामांकन किया गया था.

स्टार कास्ट और फिल्म से जुड़े बड़े नाम
इस फिल्म का निर्देशन ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर कौथर बेन हनिया ने किया है. फिल्म में साजा किलानी, मोताज मलहीस, आमेर हलेहल और क्लारा खौरी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं. फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में भी सराहना और सम्मान मिल चुका है. यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि युद्ध और मानवीय त्रासदी से जुड़ी एक ऐसी कहानी है जिसने दुनियाभर में बहस छेड़ दी. एक मासूम बच्ची की आखिरी आवाज को पर्दे पर उतारने वाली यह फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चा में थी, और अब भारत में रिलीज की मंजूरी मिलने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है.
 

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