8 लाख महिलाओं का भरोसा बना ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’, अब दिल्ली की बसों में सफर हुआ मुफ्त और स्मार्ट

राजधानी दिल्ली में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया रिकॉर्ड बना है. अब तक 8 लाख से अधिक महिलाओं ने 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' बनवा लिया है.

Pink Saheli Smart Card
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

राजधानी दिल्ली में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया रिकॉर्ड बना है. अब तक 8 लाख से अधिक महिलाओं ने 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' बनवा लिया है. यह कार्ड न केवल यात्रा को आसान बना रहा है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वतंत्रता को भी नई मजबूती दे रहा है.

दिल्ली सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर नागरिकों को दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और क्लस्टर बसों में मुफ्त सफर की सुविधा मिल रही है. खास बात यह है कि सरकार ने जुलाई से गुलाबी पेपर टिकट को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे बसों में अब पूरी व्यवस्था डिजिटल हो गई है.

टिकट लेने की झंझट भी खत्म
'टैप-एंड-गो' तकनीक से लैस यह स्मार्ट कार्ड बस में चढ़ते ही ईटीएम मशीन पर टैप करने से यात्रा दर्ज कर देता है. इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि टिकट लेने की झंझट भी खत्म हो जाती है. वहीं CM रेखा गुप्ता ने कहा कि, यह कार्ड सिर्फ मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का माध्यम है. सरकार लगातार रिहायशी इलाकों और सरकारी दफ्तरों में विशेष कैंप लगाकर अधिक से अधिक महिलाओं तक इस योजना का लाभ पहुंचा रही है.

हर महीने 1200 से 2400 रुपये तक की बचत
इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कामकाजी महिलाएं, छात्राएं और गृहिणियां अब अधिक आत्मविश्वास के साथ सफर कर रही हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सुविधा से महिलाओं को हर महीने 1200 से 2400 रुपये तक की बचत हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी सहारा मिल रहा है. साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड और आसान रिचार्ज सुविधा से यात्रा अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बन गई है. बसों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से यात्रा का माहौल भी पहले से ज्यादा सहज और भरोसेमंद हुआ है.

दिल्ली सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह महिला हितैषी, स्मार्ट और विश्वस्तरीय बनाना है. 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' अब केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि दिल्ली की महिलाओं के लिए सम्मान और सशक्तिकरण की नई पहचान बनता जा रहा है.

रिपोर्टर: शुशांत मेहरा

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