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जो गोबर था बेकार, वही अब बनेगा कमाई का आधार, गांवों में शुरू होगा ग्रीन बिजनेस

गौशालाओं से निकलने वाला वेस्ट अब सीधे रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली से जुड़ चुका है. आजमगढ़ जिले में 27 लाख पौधारोपण के महाअभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने एक अनोखी पहल शुरू की है.

गांवों में बनेगी जैविक खाद
gnttv.com
  • आजमगढ़,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

आजमगढ़ में अब गोबर सिर्फ कचरा नहीं माना जाएगा, बल्कि यह गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने का बड़ा जरिया बनने जा रहा है. जिले में 27 लाख पौधारोपण के महाअभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है. इस योजना के तहत गौशालाओं से निकलने वाले गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी. खास बात यह है कि इस काम की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी गई है. प्रशासन का मानना है कि इससे एक साथ रोजगार, स्वच्छता, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

गोबर से बनेगी जैविक खाद
जिले में इस बार पौधारोपण अभियान को सिर्फ रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं रखा गया है. प्रशासन पौधों के संरक्षण और उनकी बेहतर ग्रोथ पर भी फोकस कर रहा है. इसी सोच के तहत गौशालाओं में जमा होने वाले गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी. यह जैविक खाद पौधों के लिए काफी लाभकारी मानी जाती है. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है.

गांव में ही उत्पादन और रोजगार
योजना के अनुसार गौशालाओं से गोबर 50 पैसे प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा. इसके बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उसी गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करेंगी. फिर ग्राम पंचायतें और प्रधान इस खाद को 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदेंगे. यानी गांव में ही उत्पादन होगा, गांव में ही बिक्री होगी और गांव में ही रोजगार भी पैदा होगा. प्रशासन का कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर मजबूत अर्थव्यवस्था विकसित होगी और महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी.

महिलाओं को मिलेगा आत्मनिर्भर बनने का मौका
इस योजना से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को स्थायी रोजगार मिलने की उम्मीद है. समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले गोबर बेकार चला जाता था, लेकिन अब उसी से कमाई होगी. महिलाओं का मानना है कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी.

गांव, गौशाला और पर्यावरण तीनों को फायदा
मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना के मुताबिक, योजना का उद्देश्य गौशालाओं के गोबर का सही उपयोग करना और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. साथ ही पौधारोपण अभियान को टिकाऊ और सफल बनाना भी इसका बड़ा लक्ष्य है. इस पहल से गौशालाओं की सफाई व्यवस्था बेहतर होगी, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी और गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा.

राजीव कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट
 

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