गादी बनाने का काम करने वाले जमील पहले 31 साल पहले 10वीं कक्षा में इंग्लिश, मराठी और मैथेमेटिक्स सब्जेट में फेल हो गए थे. मोहम्मद जमील ने करीब 31 वर्ष पहले दसवीं की परीक्षा दी थी, जब वह फेल हो गए तो निराश होकर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी गादी बनाने का काम शुरू कर दिया.
कंधो पर जिम्मेदारी, फिर भी इच्छा नहीं मारी
जिसके कुछ साल बाद उनकी शादी हो गए. ऐसे में घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. परिवार के लिए वह काम करते रहे. लेकिन 31 साल के बाद उनके मन में 10वीं की परीक्षा दोबारा देने की इच्छा जागी और उन्होंने केवल परीक्षा दी ही नहीं बल्कि इस साल उसमें पास भी हो गए.
उन्होंने उन्हीं विषयों की परीक्षा देने का फैसला किया जिनमें उन्हें असफलता मिली थी, और आज जब कक्षा दसवीं के नतीजे आए तो जिन विषयों में वह 31 साल पहले फेल हुए थे. आज मोहम्मद जमील ने उनमें फतह का परचम लहरा दिया.
3 बच्चों के पिता हैं जमील
जमील अब 11 वीं कक्षा (साईंस) मे एडमिशन लेने की तयारी कर रहे हैं. मोहम्मद जमील को तीन बेटे हैं, जिसमे से बड़ा बेटा पुणे मे इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष मे है, दूसरे बेटे ने अभी NEET की परीक्षा दी है और तीसरा बेटा दसवीं कक्षा मे गया है. मोहम्मद जमील कहते हैं कि पढ़ने के लिए उम् नहीं होती. केवल मन में इच्छा होनी चाहिए. साथ ही महनत करने का इरादा होना चाहिए.
अपने से आधी उम्र के बच्चों के साथ बैठे
मोहम्मद जमील ने साबित कर दिया की अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो वह सफलता पा ही लेता है, 47 वर्ष की उम्र मे 31 वर्षों बाद 15 वर्ष के विद्यार्थियों के साथ बैठकर एग्जाम देना यह एक काबिले तारीफ मिसाल है. मोहम्मद जमील के जज्बे की सराहना जिले भर मे की जा रही है.
- जाका खान की रिपोर्ट