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दुर्लभ बीमारी से जूझते छात्र का सपना हुआ पूरा, बना एक दिन का जिला कलेक्टर, पढ़िए भावुक कर देने वाली कहानी

इस विशेष दिन की शुरुआत बेहद सम्मानजनक रही. गर्वित रेवाड़ को पूरे प्रोटोकॉल के साथ राजकीय वाहन से कलेक्ट्रेट लाया गया. जैसे ही गाड़ी कलेक्ट्रेट परिसर में रुकी, खुद जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने आगे बढ़कर गुलदस्ता भेंट किया.

one day collector
gnttv.com
  • डीडवाना,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

राजस्थान के डीडवाना जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट कार्यालय में आज एक ऐसी अनूठी और भावुक कर देने वाली मानवीय पहल देखने को मिली, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है. जिला कलेक्टर अवधेश मीणा की सहृदयता के चलते लाडनूं क्षेत्र के ग्राम रोडू के रहने वाले 15 वर्षीय बहादुर बालक गर्वित रेवाड़ का आईएएस बनने का सपना सच हो गया. गर्वित को एक दिन के लिए डीडवाना-कुचामन जिले की कमान सौंपी गई और उसने बाकायदा जिला कलेक्टर की कुर्सी संभालकर अधिकारियों की बैठक ली.

राजकीय वाहन से पहुंचे 'कलेक्टर साहब', खुद अवधेश मीणा ने किया स्वागत
इस विशेष दिन की शुरुआत बेहद सम्मानजनक रही. गर्वित रेवाड़ को पूरे प्रोटोकॉल के साथ राजकीय वाहन से कलेक्ट्रेट लाया गया. जैसे ही गाड़ी कलेक्ट्रेट परिसर में रुकी, खुद जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने आगे बढ़कर गुलदस्ता भेंट किया और गर्मजोशी के साथ 'एक दिन के कलेक्टर' का स्वागत और अभिनंदन किया. इसके बाद गर्वित को आदर सहित कलेक्टर के मुख्य चेंबर में ले जाया गया, जहां उसने जिला कलेक्टर की मुख्य कुर्सी संभाली.

कलेक्ट्रेट में ली बैठक, दिए निर्देश और की अवकाश की घोषणा
कुर्सी संभालने के बाद एक दिन के जिला कलेक्टर गर्वित रेवाड़ ने कलेक्ट्रेट के विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ एक आवश्यक बैठक की. बैठक में गर्वित ने बेहद परिपक्वता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि:जनता की जो भी शिकायतें और समस्याएं हैं, उनका निस्तारण सबसे पहले और त्वरित गति से होना चाहिए. कलेक्टर की कुर्सी पर बैठने वाले का पहला धर्म जनता की बात सुनना है.अपने कार्यकाल के दौरान गर्वित ने एक दिन के राजकीय अवकाश की भी घोषणा की, जिस पर वहां मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने मेज थपथपाकर और तालियां बजाकर खुशी जाहिर की. इस दौरान कई स्थानीय नागरिकों ने गर्वित को अपनी समस्याओं के ज्ञापन सौंपे और विभिन्न कार्यक्रमों में आने का निमंत्रण भी दिया.

गंभीर बीमारी पर भारी पड़ा हौसला: 10वीं में हासिल किए 82.83% अंक
24 अगस्त 2010 को जन्मे गर्वित की कहानी जितनी भावुक करने वाली है, उतनी ही प्रेरणा से भरी है. गर्वित डीएमडी नामक एक बेहद गंभीर और लाइलाज जेनेटिक बीमारी से ग्रसित है. इस बीमारी के कारण उसके शरीर का कोई भी अंग हाथ की हथेली और मस्तिष्क को छोड़कर काम नहीं करता है. डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित बच्चे अमूमन 18 से 20 वर्ष तक ही जीवित रह पाते हैं.शुरुआती 7-8 साल तक गर्वित बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह खेलता-कूदता था, लेकिन इसके बाद अचानक बीमारी के लक्षण दिखने लगे. शारीरिक अक्षमता के बावजूद गर्वित का दिमाग बेहद शार्प है. उसने हाल ही में घोषित हुए साल 2026 के कक्षा 10 वीं के परीक्षा परिणामों में 82.83% अंक हासिल कर सबको चौंका दिया. शारीरिक रूप से लिखने में असमर्थ गर्वित प्रश्नों के उत्तर बोलता था और उसकी जगह एक 9वीं कक्षा के छात्र ने परीक्षा में उत्तर लिखे.


पिता की प्रेरणा और आईएएस बनने का सपना
गर्वित के पिता एक सरकारी शिक्षक हैं और वर्तमान में खुद आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. गर्वित ने बताया,मेरे घर में हमेशा से ही शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का माहौल रहा है. मेरे पिताजी ही मेरी प्रेरणा हैं. उन्हें देखकर ही मेरे मन में देश की सेवा करने और आईएएस बनने का सपना जागा.मीडिया से बात करते हुए गर्वित ने देश के युवाओं को एक बेहद मजबूत संदेश दिया. उसने कहा:चाहे लाइफ में कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों न हो, इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए. अपनी पढ़ाई और काम को 100% दो. अगर आप पूरी लगन से मेहनत करोगे, तो वह मेहनत कभी बेकार नहीं जाएगी; सफलता के रूप में एक दिन उसका रिवॉर्ड (पुरस्कार) जरूर मिलेगा.

क्या कहा जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने
इस ऐतिहासिक पहल पर डीडवाना-कुचामन के जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने कहा गर्वित के माता-पिता कुछ दिन पहले मुझसे मिले थे और उन्होंने बच्चे की इस अंतिम इच्छा के बारे में बताया था. डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद इस बच्चे ने 10वीं में जो सफलता हासिल की है, वह हमारे पूरे जिले के लिए गर्व की बात है. इसे एक दिन का कलेक्टर बनाने का उद्देश्य यही था कि समाज और जिले के अन्य युवा इसे देखकर मोटिवेट हो सकें. जिंदगी में परिस्थितियां कैसी भी हों, हमें कभी भी गिव अप (हार मानना) नहीं करना चाहिए."

जब तक गर्वित कलेक्ट्रेट की कुर्सी पर बैठा रहा, उसके चेहरे पर एक अलौकिक खुशी और संतोष की चमक साफ देखी जा सकती थी. जिला प्रशासन की इस अनूठी मानवीय पहल ने न सिर्फ एक मासूम का सपना पूरा किया, बल्कि पूरे समाज को संवेदनशीलता और हौसले का एक नया पाठ पढ़ा दिया है.

-केशा राम की रिपोर्ट

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